Sunday, Nov 27, 2022
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शिक्षिका ने दिव्यांगता को मात देकर हासिल की 48वीं रैंक

  • Updated on 6/1/2022

नई दिल्ली/पुष्पेंद्र मिश्र। दिल्ली सरकार के मुबारकपुर स्थित गवर्नमेंट गल्र्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल नं-2 में इतिहास की लेक्चरर आयुषी डबास ने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में 48वीं रैंक हासिल की है। दिव्यांगता मात देते हुए आयुषी ने अपने कड़े परिश्रम और लगन से चौथे प्रयास में ये सफलता हासिल की है। आयुषी ने कहा कि उन्होंने 2018 में आईएएस अधिकारी बनने का सपना लेकर तैयारी शुरू की थी। 2018 ही उनका पहला अटेम्ट था। वह तीन बार मुख्य परीक्षा तक पहुंचीं।

मुबारकपुर के सरकारी स्कूल में पीजीटी इतिहास आयुषी चौथे प्रयास में बनीं आईएएस
लेकिन मामूली प्वाइंट्स से उनका इंटरव्यू के लिए चयन नहीं हो पाता था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और चौथी बार वह साक्षात्कार के लिए चयनित हुईं अब परिणाम सबके सामने हैं। आयुषी कहती हैं इस सफलता के लिए मैं मेरी मां और दोस्तों को श्रेय देना चाहूंगी। पहले टेक्नोलॉजी इतनी 'यादा नहीं थी। तो परिवार वाले बुक्स को रिकॉर्ड कर देते थे। उन्हें मैं सुन लेती थी। या परिवार वाले पढ़कर सुनाते जाते थे उन्हें मैं सुनती जाती थी। तैयारी में विजुअली चैलें'ड होना बहुत बड़ी चुनौती थी।

नौकरी के साथ पढ़ाई करना आसान नहीं था
स्कूल में भी पढ़ाना था और तैयारी भी करनी थी। तो जब मेरी छुट्टी होती थी तो उस दिन मैं 14-15 घंटे पढ़ती थी लेकिन नौकरी पर जाती थी तो स्कूल के बाद जो टाइम मिलता था उसी में तैयारी कर पाती थी। इस दौरान मैंने सभी पार्टियां, जन्मदिन, शादियों में जाना छोड़ दिया था।  

शिक्षा और दिव्यांगता पर करूंगी काम
आईएएस के रूप में मैं जिस भी जगह भेजी जाऊंगी वहां जाकर शिक्षा और दिव्यांगता पर जरूर काम करूंगी। क्योंकि शिक्षा है तो आदमी सब कुछ हासिल कर सकता है। आयुषी ने तैयारी कर रहे युवाओं के लिए कहा कि उम्मीदवार को हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। बार-बार ऐसा लगेगा कि होगा कि नहीं। लेकिन पूरे चांस लें। गलतियां कहां हो रही हैं उनको देखें। रणनीति बनाएं। नकारात्मकता को खुदपर हावी न होने दें। हमेशा सकारात्मकता के साथ आगे बढ़ें।

अनुबंधित शिक्षक और प्राइमरी टीचर के रूप में भी कर चुकीं हैं काम
2012 में आयुषी नगर निगम स्कूल में अनुबंध शिक्षक बनीं थीं। लेकिन 2016 में उन्होंने दिल्ली सरकार में असिस्टेंट टीचर की सरकारी नौकरी हासिल कर ली थी। वह यहीं नहीं रुकी अपना बीएड पूरा कर 2019 में मुबारकपुर सरकारी स्कूल में उन्होंने पीजीटी इतिहास की शिक्षिका के रूप में 'वाइन किया। उन्होंने कहा मेरी शादी 2019 में ही हरियाणा के झ'झर जिले में हुई। मेरे पति आस्ट्रेलिया से एमबीए की पढ़ाई कर रहे हैं।

जामिया, डीयू और इग्नू की रह चुकीं हैं छात्रा
दिल्ली के उत्तर पश्चिम जिले में मुंडका के पास स्थित रानीखेड़ा गांव में 27 अगस्त 1992 को अशोक कुमार और आशा रानी के परिवार में जन्मी आयुषी ने 2009 में 12वीं परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद केशव पुरम के डीआईईटी सेंटर से डिप्लोमा लिया। जिसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के एसपीएम कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। आयुषी ने पोस्ट ग्रेजुएशन इग्नू से किया। वहीं जामिया मिलिया इस्लामिया से 2019 में उन्होंने बीएड पूरा किया है। आयुषी के पिता पंजाब में एचआईएल कंपनी में चीफ डिस्पेंसर हैं। मां आशा रानी ने बेटी की पढ़ाई के लिए महर्षि वाल्मिकी अस्पताल की वरिष्ठ नर्सिंग अधिकारी पद से वीआरएस ले चुकी हैं। आयुषी का भाई कुमुद गुजरात में एक्साइज इंस्पेक्टर के पद पर तैनात है।

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