Sunday, Oct 02, 2022
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tejas can fly more than half a kilometer, know its other features

आधे किलोमीटर से भी उड़ान भर सकता है तेजस, जानिए इसकी अन्य खूबियां

  • Updated on 9/19/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका शर्मा। भारतीय वायु (Air force) सेना में तेजस विमान (HAL Tejas) एक ऐसा शस्त्र है। जिसने अपनी खूबी के कारण कई विमानों को दरकिनार कर दिया है। जंग के मैदान में अचूक क्षमता और दुश्मनों के हमले से निपटने की कलाबाजी के कारण ही आज तेजस दुनिया भर में चर्चा का विषय बना हुआ है। इस फाइटर जेट में आज रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने उड़ान भरी। अधिकारियों का कहना है कि तेजस में उड़ान भड़ने वाले राजनाथ सिंह पहले रक्षा मंत्री है। बता दें कि तेजस का बजन कम होने से यह फाइटर जेट हवा में उड़ने और युद्ध के लिए ज्यादा कुशल है। भारतीय वायुसेना के पायलट इसकी खूबियों से काफी संतुष्ट हैं।

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तेजस की शुरुआत
1983 में पहली बार तेजस की कल्पना की गई थी जो 10 सालों बाद 1993 में जाकर सैंक्शन हुआ। तेजस को डिजाइन करने का श्रेय डीआरडीओ की ऐरोनॉटिकल डिवेलपमेंट एजेंसी को जाता है। और इसे हिंदुस्तान ऐरोनॉटिकल लिमिटेड ने तैयार किया है। तेजस भारतीय ही है, लेकिन इसमें थोड़ी मदद विदेशियों की भी है। जैसे इसका इंजन अमेरिकी है, रेडार और हथियार इजरायली हैं और कई अन्य पुर्जे भी विदेश से लाए गए। तेजस एक बार में 2,300 किलोमीटर की दूरी तय कर सकता है। जो कि अन्य विमानों से कई ज्यादा है। तेजस की एक और खूबी है कि इसमें हवा में ही ईंधन भरा जा सकता है।

अनुठी क्षमता है तेजस में
तेजस के बारे में एयर चीफ मार्शल बीएस धनोआ बताते हैं कि तेजस ना सिर्फ लगातार हमले करने में सक्षम है। बल्कि यह सही निशाने पर हथियार गिराने की भी अचूक क्षमता रखता है। यह एक फाइटर प्लेन है, इसने हवा से हवा और हवा से जमीन दोनों मोड में अच्छा काम किया है। सेना के पायलट्स भी इससे काफी खुश हैं। मलयेशिया समेत कई देश भी इसकी ताकत देख फिदा हो गए हैं।

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तेजस इतना हल्का क्यों है?
तेजस का ढांचा कार्बन फाइबर से बना हुआ है। इसलिए ये हल्का है क्योंकि यह धातु काफी हल्का होता है और अन्य धातु से बनने वाले विमानों की तुलना में यह काफी हल्का होता है। कमाल की बात है कि हल्का होने के बावजूद भी यह अन्य विमानों की तुलना में ज्यादा मजबूत है। जो इसकी खूबी को और बढ़ाता है। इसका कुल वजन लगभग 6,560 किलोग्राम है। जिसकी वजह से यह 50 हजार फीट तक की ऊंचाई पर उड़ान भर सकता है। इसके विंग्स 8.2 मीटर चौड़े हैं। तेजस विमान कुल 13.2 मीटर लंबा और 4.4 मीटर ऊंचा है।

आधे किलोमीटर से भी कम जगह में भी उड़ान भर सकता है तेजस
तेजस को उड़ान भरने के लिए और जेट्स की तरह ज्यादा जगह की जरूरत नहीं है। यह आधे किलोमीटर से भी कम जगह में भी उड़ान भर सकता है। दरअसल, अरेस्ट लैंडिंग के दौरान युद्धपोत या हवाई पट्टी पर लगा एक तार विमान से जुड़ जाता है, जिसके चलते विमान कम से कम दूरी में रुक सकता है। कई बार तार की बजाय छोटे पैराशूट का भी इस्तेमाल किया जाता है। जिसमें हवा भरने से विमान की स्पीड कम हो जाती है।

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रखरखाव के लिहाज से भी तेजस सस्ता है
अगर रखरखाव और तैयारी की बात करे तो तेजस काफी सस्ता और उपयोगी है। इस मामले में यह सुखोई-30 से भी कहीं बेहतर है। सुखोई-30 के मुकाबले में 60 फीसदी से भी कम में ही विमान मिशन के लिए मौजूद रहते हैं बाकी विमानों की मरम्मत चलती रहती है। वहीं, तेजस के 70 फीसदी से ज्यादा विमान उड़ान के लिए तैयार रहते हैं। इस प्रतिशत को बढ़ाने का काम जारी है। तेजस भारतीय वायुसेना को मिग 21 का विकल्‍प उपलब्‍ध कराएगा।

भविष्य में अपग्रेड भी हो सकेगा
तेजस में सेंसर से मिलने वाले डेटा को प्रोसेस करने वाले मिशन कंप्‍यूटर का हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर ओपन आर्किटेक्‍चर फ्रेमवर्क को ध्‍यान में रखकर डिजाइन किया गया है जिससे इसे भविष्‍य में अपग्रेड भी किया जा सकता है। आने वाले समय में और अधिक तकनीकि बदलाव होंगे। और उस समय यह विमान पिछे न रह जाए इसलिए इसमें इसको अपग्रेड करने की व्यवस्था की गई है।

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