Monday, Sep 26, 2022
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तेजस्वी यादव ने अमित शाह के भाषण को ‘कॉमेडी शो’ करार दिया 

  • Updated on 9/23/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा शुक्रवार को बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के साथ जाने के लिए भाजपा की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाने और लोगों को जंगल राज की वापसी के बारे में आगाह करने के कुछ घंटे बाद, राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने उनके भाषण को ‘‘कॉमेडी शो’’ करार दिया।      राजद नेता यादव ने यह भी आरोप लगाया कि शाह ने माहौल खराब करने के इरादे से बिहार का दौरा किया है। 

यादव ने दिन के दौरान शाह के भाषण को लेकर पत्रकारों के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘वह न तो देश के गृह मंत्री की तरह बात कर रहे थे और न ही एक नेता की तरह। उनका पूरा भाषण एक ‘कॉमेडी शो’ था। वह मुद्रास्फीति और बेरोजगारी के बारे में कुछ भी नहीं बोले। मैंने पहले भी कहा था कि वह ज्यादातर व्यर्थ की बातें करेंगे।’’ 

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पूर्णिया में शाह ने पूर्व सहयोगी एवं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर शुक्रवार को तीखा हमला किया और उन पर प्रधानमंत्री पद की अपनी महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने की कोशिश में कांग्रेस एवं राजद के साथ हाथ मिलाकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की पीठ में छुरा घोंपने का आरोप लगाया।

 शाह ने कहा कि कुमार और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद की Þजोड़ीÞ का 2024 के लोकसभा चुनावों में ‘सूपड़ा साफ’ हो जाएगा और एक साल बाद, भाजपा राज्य विधानसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत हासिल करेगी। उन्होंने आगाह किया कि बिहार पर 'जंगल-राज का खतरा' मंडरा रहा है। 

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गृह मंत्री की टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए, राजद नेता ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 में एक रैली में कहा था कि बिहार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, लेकिन उन्होंने (अमित शाह) उसका या महंगाई या बेरोजगारी का कोई उल्लेख नहीं किया।’’ यादव ने दावा किया, ‘‘शाह बिहार के लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं। वह माहौल को खराब करने और समुदायों के बीच कड़वाहट पैदा करने के लिए सीमांचल आए हैं।’’ 

बिहार के उप मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को यह याद दिलाने की कोशिश की कि राष्ट्रीय राजधानी में अपराध की दर बिहार की तुलना में 'बहुत अधिक' है। उन्होंने कहा, ‘‘वह (शाह) किस आधार पर जंगल राज की बात करते रहते हैं? दिल्ली में अपराध की दर बिहार की तुलना में बहुत अधिक है और दिल्ली की कानून व्यवस्था केंद्र सरकार का विषय है। उन्हें बिहार पर टिप्पणी करने से पहले राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़ों को देखना चाहिए।’’ 

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