Sunday, Mar 24, 2019

मसूद पर प्रतिबंध न लगने से भारत में आतंकी गतिविधियां जारी रहेंगी

  • Updated on 3/15/2019

भारत में दो दशक से हिंसक गतिविधियों को अंजाम दे रहे पाकिस्तानी आतंकवादी गिरोह जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित करवा के उस पर विश्व समुदाय द्वारा अनेक प्रतिबंध लगवाने की भारत की कोशिशें एक बार फिर नाकाम हो गईं जब 13 मार्च को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यू.एन.एस.सी.) में उसे वैश्विक आतंकवादी घोषित करने वाले प्रस्ताव को चीन ने ‘तकनीकी आधार’ पर वीटो कर दिया।

उल्लेखनीय है कि चीन इससे पूर्व 2009, 2016 और 2017 में भी मसूद को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने के प्रस्तावों को वीटो कर चुका है। इस बार गत 27 फरवरी को अमरीका, ब्रिटेन और फ्रांस ने संयुक्त राष्टï्र सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव पेश किया परंतु इसे वीटो करने का चीन ने पहले ही संकेत दे दिया था कि वह इस मामले में अपना पुराना रवैया अपनाना जारी रखेगा जबकि लगभग सभी देश मसूद पर प्रतिबंध लगाने के पक्ष में थे। 

भले ही चीन की यह तकनीकी रोक 6 महीनों के लिए वैध है परंतु बाद में इसे तीन महीने के लिए और बढ़ाया जा सकता है तथा उसके आगे भी चीन अपने रवैए में कोई बदलाव करेगा, इसमें संदेह ही है। 

90 के दशक में मसूद भारत के कब्जे में था जिसे छुड़वाने के लिए आतंकवादी 31 दिसम्बर, 1999 को भारत का एक विमान अपहरण करके कंधार ले गए जिसमें 178 यात्री सवार थे और उन्हें बचाने के लिए भारत सरकार को मसूद अजहर को कंधार ले जाकर छोडऩा पड़ा था। 

छूटने के कुछ ही समय बाद उसने कराची में 10,000 लोगों की एक सभा में भारत प्रशासित कश्मीर को आजाद करवाने की कसम खाई थी और कहा कि मुसलमानों को तब तक चैन से नहीं बैठना चाहिए जब तक वे भारत को तबाह न कर दें। इसी कड़ी में मसूद अजहर ने मार्च, 2000 में आतंकी गिरोह जैश-ए-मोहम्मद की नींव रखी।

13 दिसम्बर, 2001 को संसद पर हमले (9 लोग शहीद), 24 सितम्बर, 2002 को गांधी नगर के अक्षरधाम में विस्फोट, 29 अक्तूबर, 2005 को दिल्ली में सीरियल ब्लास्ट, 2 जनवरी, 2016 को पठानकोट एयरफोर्स स्टेशन पर हमले (7 जवान शहीद), 18 सितम्बर, 2016 को उड़ी में भारतीय सेना पर हमले (18 जवान शहीद) और 14 फरवरी, 2019 को पुलवामा में सी.आर.पी.एफ. की टुकड़ी पर हमले (40 से अधिक जवान शहीद) में इसी का हाथ था। 

मसूद पर रोक लगाने के लिए इस बार पूरी दुनिया ठान चुकी थी लेकिन पाकिस्तान में अपने हितों के कारण चीन ने ऐसा नहीं होने दिया। वहां पंजीकृत विदेशी कम्पनियों में सर्वाधिक 77 कम्पनियां चीन की ही हैं।

इसके अलावा वह निर्माणाधीन ‘चीन-पाकिस्तान इकॉनोमिक कॉरीडोर’ में 3.8 लाख करोड़ रुपए का निवेश करने के अलावा ‘वन बैल्ट वन रोड’ (ओ.बी.ओ.आर.) प्रोजैक्ट में अरबों रुपए का निवेश करने के साथ ही अन्य अनेक परियोजनाओं में 3.2 लाख करोड़ रुपए खर्च कर चुका है। 

अपने यहां मुसलमानों पर लगाए प्रतिबंधों को उचित ठहराने में पाकिस्तान का समर्थन प्राप्त करने के बदले में भी चीन उसका साथ दे रहा है। भारत द्वारा दलाईलामा को शरण देने पर भी चीन भारत से नाराज है। बेशक चीनी नेता लगातार भारत से संबंध सुधारने की बातें करते रहते हैं लेकिन बार-बार के अनुभवों से यह बात सिद्ध हो चुकी है कि उनकी जुबान पर कुछ और तथा उनके दिल में कुछ और ही होता है। 

चीन ने भारत में सस्ती वस्तुएं उतार कर भारतीय लघु उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया है अत: उस पर दबाव बनाने के लिए चीन निर्मित सामान का पूर्णत: बहिष्कार करके उस पर आॢथक दबाव बनाना चाहिए।

चीन द्वारा मसूद के पक्ष में वीटो करने से जहां भारतीय प्रयासों को आघात लगा है वहीं इससे पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी प्रोत्साहित होंगे जिससे भारत में आतंकवादी हिंसा का खतरा बढ़ गया है। 

इस घटनाक्रम से मानवता विरोधी तत्वों पर रोक लगाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के नियमों में बदलाव की आवश्यकता भी नजर आई है। बजाय इसके कि बहुमत की उपेक्षा करके मात्र एक देश वीटो के अधिकार द्वारा बहुमत का प्रस्ताव रद्द कर दे, जरूरत इस बात की है कि वीटो का निर्णय बहुमत के वोट से ही किया जाए। ऐसा करके ही मसूद अजहर जैसे मानवता विरोधी सरगनाओं पर रोक लगाई जा सकेगी।

संतोष की बात है कि चीन के वीटो से नाराज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने चीन को असामान्य कड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि ‘‘यदि चीन इस कार्य में बाधा डालना जारी रखता है तो जिम्मेदार सदस्य देश सुरक्षा परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं।’’                                                                                       —विजय कुमार 

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