Tuesday, Jan 18, 2022
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किसान हट भी गए, तो भी तुरंत नहीं मिल सकेगा गाजीपुर बॉर्डर का फायदा

  • Updated on 10/21/2021

नई दिल्ली/आलोक कुमार। गाजीपुर बॉर्डर पर किसानों को आंदोलन करते हुए 26 तारीख को 11 महीने पूरे हो जाएंगे। वीरवार को हालांकि ऐसा लगा कि किसान शायद बॉर्डर खाली करने जा रहे हैं। लेकिन बाद में सभी अनुमान निराधार ही साबित हुए। गाजीपुर बॉर्डर के बंद होने से रोजाना लाखों लोग परेशान होते हैं। गाजियाबाद से दिल्ली जाने के लिए इन लोगों को आनंद विहार व दिलशाद गॉर्डन बॉर्डर का इस्तेमाल करना पड़ता है। जिससे सुबह व शाम पीक आवर्स में लोगों को भीषणा जाम की समस्या झेलनी पड़ती है। लोगों का ईंधन और वक्त दोनों ज्यादा लगते हैं। इसलिए लोग बेसब्री से गाजीपुर बॉर्डर के खुलने का इंतजार कर रहे हैं। लेकिन अगर वीरवार को भी बॉर्डर को किसान खाली कर देते तो भी लोगों को इसका फायदा तुरंत नहीं मिलेगा। किसानों के हटने के बाद हाई-वे की जांच पड़ताल के बाद ही इसे आवाजाही के लिए खोला जाएगा। 

नुकसान के आंकलन के बाद शुरू होगी आवाजाही 
राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के परियोजना निदेशक मुदित गर्ग ने बताया कि अगर अब भी किसान हटते हैं। तो भी राजमार्ग को तुंरत नहीं खोला जा सकेगा। बीते लंबे समय से मैनंटेनेंस ना होने की वजह से निर्माण को हुई क्षति का आंकलन करना होगा। इसके लिए किसानों द्वारा किए गए पक्के निर्माण, टैंटों को गाढने के लिए सडक़ों में की गई तोडफ़ोड़, पुलिस की बैरिकेटिंग और तारबंदी से निर्माण को हुए नुकसान का आकंलन जरूरी है। इसके अलावा राजमार्ग पर पानी की निकासी का व्यवस्था, टैफ्रिक सिग्नल व साइन बोर्ड को भी दुरूस्त करना होगा। उन्होंने कहा कि राजमार्ग को दुरूस्त करने का खर्च व समय उस वक्त के हिसाब से ही तय हो सकेगा। हालांकि अगर ज्यादा नुकसान नहीं हुआ तो जरूरी काम निपटाकर जल्दी ही ट्रैफिक को गुजारा जा सकेगा। 
 

रखरखाव के लिए कई बार गुहार लगा चुका है एनएचएआई
गाजीपुर बॉर्डर पर रखरखाव के लिए एनएचएआई कई जिला प्रशासन व दिल्ली सरकार तक से गुहार लगा चुका है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक मुदित गर्ग ने बताया कि इस संबध में गाजियाबाद जिला प्रशासन को 3 बार खत लिखकर हम चिंता जता चुके हैं कि राजमार्ग के रखरखाव पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। इसके लिए नियमित सर्वे किया जाए। बताते हैं कि बीते जुलाई में एनएचएआई के कुछ अधिकारी सर्वे के लिए पहुंचे भी थे। लेकिन किसानों के साथ अधिकारियों के बाद फिर कोई नहीं आया।
 

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