Sunday, Nov 28, 2021
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the committee is analyzing the reasons for the loss of contact with vikramlander: isro

#VikramLander से संपर्क टूटने के कारणों का विश्लेषण कर रही है समिति: ISRO

  • Updated on 9/20/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। भारत (India) के ऐतिहासिक मिशन 'चंद्रयान-2' (Chandrayaan-2) के लैंडर 'विक्रम' (Lander Vikram) के चांद पर उतरते समय इसरो (ISRO) से संपर्क टूट जाने के बाद भी वैज्ञानिकों ने हार नहीं मानी है। अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बृहस्पतिवार को कहा कि कुछ विद्वानों और एजेंसी के विशेषज्ञों की एक राष्ट्रीय स्तर की समिति चंद्रयान-2 मिशन में लैंडर के चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने से पहले उससे संपर्क टूट जाने के कारणों का अध्ययन कर रही है।     

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ISRO संपर्क टूट जाने के कारणों का अध्ययन कर रहा

इसरो (ISRO) ने यह भी कहा कि भारत के दूसरे चंद्र मिशन का ऑर्बिटर निर्धारित वैज्ञानिक प्रयोगों को संतोषजनक तरीके से अंजाम दे रहा है और इसके सभी पेलोड का कामकाज संतोषप्रद है। एजेंसी ने अपनी वेबसाइट पर लिखा,‘‘ऑर्बिटर के सभी पेलोड चल रहे हैं। इसके शुरूआती परीक्षण पूरी तरह सफल रहे हैं। सभी पेलोड का प्रदर्शन संतोषजनक है। इसरो (ISRO) ने कहा ‘‘शिक्षाविदों और इसरो विशेषज्ञों की राष्ट्रीय स्तर की समिति लैंडर से संपर्क टूटने के कारणों का अध्ययन कर रही है।

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क्या है पूरा मामला

बता दें  सात सितंबर को चंद्रयान-2' (Chandrayaan-2) के रोवर प्रज्ञान से लैंडर विक्रम को चंद्रमा की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करनी थी लेकिन अंतिम चरण में चंद्रमा की सतह से महज 2.1 किलोमीटर ऊपर इसका  इसरो (ISRO)से संपर्क टूट गया। तभी से लैंडर से संपर्क साधने के प्रयास किये जा रहे हैं लेकिन कोई सफलता मिलती नहीं दिख रही। इसरो ने आठ सितंबर को कहा था कि चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर में लगे कैमरे से चंद्रमा की सतह पर लैंडर देखा गया है। विक्रम की हार्ड लैंडिंग हुई थी।

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