Monday, Jan 21, 2019

‘बाहरी’ लोगों के लिए पूरी प्रक्रिया फिर से शुरू होगी

  • Updated on 12/31/2018

मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल के अंतिम चरण में स्पष्ट रूप से कामकाज धीमा कर दिया है। यद्यपि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सरकार के कामकाज को कारगर बनाने की कोशिश की है लेकिन इसके मिश्रित परिणाम आए हैं। हालांकि इसकी संपूर्ण तौर पर मूल्यांकन प्रणाली अब अच्छी तरह से स्थापित है और मोदी को नौकरशाही पर लगाम लगाने के लिए सेवाओं से बाहर की प्रतिभा को शामिल करने की कोशिश करने में काफी परेशानी हो रही है।

सरकार ने जून में अपने विज्ञापन के जवाब में 6,000 से अधिक आवेदन प्राप्त किए, जिसमें 10 निजी क्षेत्र के विशेषज्ञों को विभिन्न केन्द्रीय मंत्रालयों में संयुक्त सचिव के रूप में नियुक्त करने की मांग की गई थी, वह नियुक्ति प्रक्रिया ठप्प हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, आवेदकों से प्राप्त ‘आधी-अधूरी’ या ‘अनुपयोगी’ जानकारी के कारण संघ लोक सेवा आयोग (यू.पी.एस.सी.) उम्मीदवारों को शॉर्ट लिस्ट करने की ज्यादा कोशिश नहीं कर सका।

भर्ती प्रक्रिया लगभग ठप्प होने से सरकार ने अब एक नया विज्ञापन जारी किया है जिसमें ‘विस्तृत आवेदन’ मांगे गए हैं। इसलिए, विज्ञापित पदों को भरने के इच्छुक लोगों को नए आवेदन भेजने चाहिएं। सरकार ने भर्ती के लिए कोई समय सीमा निर्धारित नहीं की है।

प्रमुख बाबुओं को मिला सेवा विस्तार
इंटैलीजैंस ब्यूरो (आई.बी.) के निदेशक राजीव जैन और रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के सचिव अनिल के. धस्माना को 6 महीने का सेवा विस्तार दिया गया है। वे इस महीने के अंत में सेवानिवृत्त होने वाले थे।

सूत्रों का कहना है कि यह निर्णय प्रधानमंत्री मोदी की अगुवाई वाली नियुक्ति समिति (कैबिनेट) की कमेटी ने लिया था। स्पष्ट रूप से, केन्द्र आई.बी. और आर.एंड.डब्ल्यू. में निरंतरता को बाधित नहीं करना चाहता है और आगामी लोकसभा चुनावों के बाद इन प्रमुख पदों पर नियुक्तियों पर निर्णय लेने के लिए एक नई सरकार चाहता है।

जैन ने संवेदनशील कश्मीर डैस्क सहित आई.बी. के विभिन्न विभागों में काम किया है। वह पिछली राजग सरकार के कश्मीर पर वार्ताकार के.सी. पंत के सलाहकार थे, जब पंत शब्बीर शाह जैसे अलगाववादी नेताओं के साथ बातचीत कर रहे थे।

धस्माना जो 1981 बैच के मध्य प्रदेश कैडर के अधिकारी हैं, 23 वर्षों के लिए रॉ के साथ रहे, इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान डैस्क सहित महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी सेवाएं दीं। ये नियमित कदम हैं, लेकिन खतरनाक समय में निरंतरता बनाए रखने के प्रयासों के रूप में उल्लेखनीय रिकॉर्ड रखते हैं।

बाबू और जनता की आवाज
कर्नाटक के आई.ए.एस. अधिकारी डी. रणदीप जिन्हें बृहत बेंगलुरू महानगर पालिका के अतिरिक्त आयुक्त के रूप में अपने पद से स्थानांतरित किया गया था, जनता के दबाव के कारण अपने पद पर वापस आ गए हैं। 

सूत्रों के अनुसार, रणदीप ने बेंगलुरु के बदनाम रूप से प्रबंधित अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली में सुधार के अपने प्रयासों के लिए अपशिष्ट प्रबंधन कार्यकत्र्ताओं का विश्वास और सद्भावना अर्जित की।  लोगों ने उनके तबादले के विरोध में आवाज उठाई और उनकी बहाली का आह्वान किया। सरकार को संदेश मिला और बाबू को बहाल किया गया।

यह नौकरशाहों का दुर्लभ मामला प्रतीत होता है जो अपना काम अच्छी तरह से करके जनता का विश्वास जीतने में सक्षम हैं और एक दुर्लभ मामला भी जहां सरकार उन नागरिकों को सुनती है जिनके पास कोई राजनीतिक एजैंडा नहीं है।

                                                                                                                                         ---दिलीप चेरियन

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख (ब्लाग) में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं। इसमें सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं। इसमें दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार पंजाब केसरी समूह के नहीं हैं, तथा नवोदय टाइम्स (पंजाब केसरी समूह) उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है।

 

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