Saturday, Jul 20, 2019

विपक्ष को डरना जरुरी है, देश को तो जवाब चाहिए

  • Updated on 7/8/2019

नई दिल्ली/कुमार आलोक भास्कर। लोकसभा चुनाव ( general election) के परिणाम के साथ ही बीजेपी (bjp) एक तरह से स्वर्णिम युग में प्रवेश कर गई है। इसमें कोई दो मत नहीं है। बीजेपी ने पीएम नरेंद्र मोदी (narendra modi) की अगुवाई में वो कर दिखाया जो जिसके लिए बीजेपी और उससे पहले जनसंघ (jansangh) की कई पीढ़ी को तपती संघर्ष से होकर गुजरना पड़ा। यह कोई आसान कार्य नहीं था। जब आजादी के तुरंत बाद महत्मा गांधी (mahatma gandhi) की हत्या के कारण उपजे संतोष के आग में उस समय आरएसएस (rss) पर प्रतिबंध भी लगा।

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संघ ने फिर हासिल की अपनी विश्वसनीयता

हालांकि संघ ने गोडसे के संघ से तालुक्कात को एक सिरे से खारिज भी कर दिया था। लेकिन देश भक्ति से लबरेज संगठन संघ ने प्रतिबंध की परवाह किये बगेर समय के साथ फिर से और तेजी से अपनी विश्सवनीयता को प्राप्त किया। जो काबिलेतारिफ है।

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नेहरु संघ से थे प्रभावित

यहीं नहीं देश के पहले पीएम जवाहर लाल नेहरु तो संघ की अनुशासन और समाज के प्रति कार्य से इतने प्रभावित हुए कि 26 जनवरी के परेड में आमंत्रित भी कर दिया था। उस समय 1962 में चीन के साथ युद्ध में संघ की सेवा भाव की नेहरु ने तारिफ की थी।  एक लंबा इतिहास है भगवा पार्टी का जनसंघ से लेकर अब तक उनके अनेक नेताओं के तपस्या का ही फल है कि आज इतनी ज्यादा देश के जनमानस में लोकप्रिय है।

Navodayatimesमौजूदा सरकार पर विपक्ष का आरोप

लेकिन मौजूदा समय में जब से मोदी सरकार दोबारा केंद्र में लौटी है तो पार्टी के हाव-भाव पर सवाल भी उठने शुरु हो गए है। जब 23 मई को चुनाव परिणाम आया तो मानो विपक्ष को सांप सूंघ गया। जबकि विपक्ष दावा कर रही थी कि चुनाव परिणाम में मोदी की हार होगी। जो कि हो नहीं सका।

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कांग्रेस मुख्त से अब विपक्ष मुक्त की रणनीति

खैर यह देश के लिए अच्छा है कि किसी एक पार्टी को बहुमत आने से राजनीतिक स्थिरता कम से कम अगले 5 साल के लिए कायम रहेगी। लेकिन विपक्ष जो सवाल खड़ा कर रहा है कि इस बहुमत का दुरुपयोग मोदी सरकार विरोधियों को कमजोर करने के लिए कर सकता है। इस आशंका को तब बल मिलता है जब बीजेपी की रणनीति 2014 में कांग्रेस मुक्त से शुरु होकर 2019 में विपक्ष मुक्त तक पहुंच गया है। इसकी जांच पड़ताल भी जरुरी है।

सुषमा नहीं शामिल हुई नए मंत्रिमंडल में

30 मई को पीएम नरेंद्र मोदी की अगुवाई में उनके सहयोगियों ने संविधान रक्षा करने की शपथ ली थी। जिसमें मोदी के बाद सबसे ताकतवर बीजेपी नेता अमित शाह भी शामिल हुए। यह अलग मुद्दा हो सकता है कि सुषमा स्वराज जैसी नेता को आखिर मोदी ने अपने मंत्रिमंडल में जगह क्यों नहीं दी। हालांकि उन्होंने अपने पहले कार्यकाल के कई ऐसे मंत्री को शामिल नहीं किया जो उनके उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे। लेकिन सुषमा स्वराज अपवाद रही क्योंकि उन्हें विदेश मंत्री के तौर पर एक यादगार काम के लिए हमेशा याद किया जाएगा। खैर यह पीएम का विशेषाधिकार है किसे वे अपने मंत्रिमंडल में जगह देते है अथवा नहीं। 

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दक्षिण के राज्य में बढ़ गई है उथल-पुथल

लेकिन दक्षिण के राज्य आंध्रप्रदेश, तेलंगना, कर्नाटक में जिस तरह से उठापठक जारी है उससे बीजेपी पर विपक्ष ने गंभीर सवाल उठाये है। हालांकि उत्तर के अनेक राज्यों में बीजेपी की सरकार है तो इस पर ज्यादा कहना अभी जल्दबाजी होगी। आंध्र में चंद्र बाबू नायडू जो कल तक बीजेपी के साथ थे, लेकिन पाला बदलने का सबसे ज्यादा नुकसान उनकी पार्टी टीडीपी को उठाना पड़ रहा है।

बीजेपी की चल रही है सदस्यता अभियान

टीडीपी के 4 राज्यसभा सांसद ने हाल ही में बीजेपी की सदस्यता ग्रहण की थी। इसी आंधी में उनके अलावा हरियाणा के इनेलो पार्टी के 1 मात्र राज्यसभा सांसद भी बीजेपी की सदस्यता ली। फिलहाल बीजेपी की सदस्यता अभियान को इससे फलीभूत होने में कितना फायदा होगा यह तो समय ही बतायेगा। बीजेपी दावा कर रही है कि जल्द ही आंध्रा और तेलंगना में पार्टी मुख्य विपक्ष की पार्टी बन जाएगी। कर्नाटक में कुमारस्वामी की गठबंधन सरकार पर बनने के दिन से ही तलवार लटक रही है जो अब गर्दन तक पहुंच गई है।  दूसरी तरफ गुजरात में जिस तरह से 2 राज्यसभा सीट का चुनाव हुआ उससे तो चुनाव आयोग पर भी विपक्ष सवाल उठाने से नहीं चूका। 

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सवाल यह है कि एक ऐसी पार्टी जिसे जनता ने आम चुनाव में सर-आंखों पर बैठा लिया और नरेंद्र मोदी के तो किया कहने। उनके एक इशारे पर देश झूम उठता है। तो फिर उनकी पार्टी बीजेपी को क्यों जल्दबाजी हो रही है कि किसी राज्य में सरकार या विपक्ष को अस्थिर करने की जैसा कि विपक्ष लगातार आरोप लगा रही है। 

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कांग्रेस सबसे कमजोर स्थिति में

लेकिन इतना तो तय है कि खुद सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस तो आईसीयू में पहुंच गई है। अब गिने-चुने विपक्ष को भी खत्म करने के लिए किसी हथकंडे की नहीं बल्कि अपने बोझ तले खुद ब खुद टूट कर बिखड़ने को तैयार है तो बीजेपी अपना हाथ क्यों झुलसा रही है। कारण पार्टी के खिलाफ एक भी चिनगारी कभी भी आग बन सकती है इसको याद रखना चाहिए। पार्टी सत्ता में है तो जिम्मेदारी का एहसास देश को भी महसूस कराना चाहिए। मोदी सरकार के विकास कार्यों से ही प्रभावित होकर जनमानस में पार्टी की लोकप्रियता बढ़ेगी। यह हमेशा जेहन में रखना चाहिए।     

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