Wednesday, Oct 27, 2021
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इस बावली के पानी से जल उठे थे चिराग

  • Updated on 9/23/2021

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। पानी से दीपक जलने का दृश्य आपने फिल्मों में देखा होगा लेकिन अगर हम कहें कि ऐतिहासिक दस्तावेज इस घटना को सही बताते हैं कि पानी से दीपक जल चुके हैं। जी हां, ये मजाक नहीं बल्कि सच है। कहा जाता है कि जिस समय सूफी संत निजामुद्दीन औलिया एक बावली का निर्माण करवा रहे थे तो गयासुद्दीन तुगलक अपने किले तुगलकाबाद का निर्माण करवा रहे थे, जिसके चलते रात के समय मजदूरों द्वारा निजामुद्दीन दरगाह परिसर में बनी बावली का निर्माण किया जाता था वो भी पानी से चिराग जलाकर।
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रोक दी थी सुल्तान ने तेल की आपूर्ति
बता दें कि निजामुद्दीन बावली का निर्माण साल 1321-22 में औलिया ने खुद करवाया था। जिस समय इस बावली को बनवाया जा रहा था उसी समय तुगलक, तुगलकाबाद किले का निर्माण अरावली पर्वत श्रृंख्ला पर करवा रहे थे। किले के निर्माण के चलते औलिया की बावली का निर्माण कार्य अधर में लटकता जा रहा था। तब औलिया ने मजदूरों को रात में बावली का निर्माण करने को कहा लेकिन औलिया से अपनी चिढ की वजह से सुल्तान ने ग्यासपुर बस्ती यानि निजामुद्दीन बस्ती में तेल की सप्लाई बंद कर दी। 
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औलिया के शिष्य ने पानी में अपनी अंगुली डाली और चिराग रौशन हो गए
तेल ना मिलने पर औलिया ने अपने शिष्य नसीमुद्दीन महमूद को निर्देश दिया कि चिराग में तेल की जगह बावली का पानी डाल दिया जाए और महमूद पानी में अपनी अंगुली डाल कर छू ले तो वो तेल का काम करेगी और चिराग रौशन हो जाएंगे। ‘दिल्ली और उसका आंचल’ पुस्तक में इतिहासकार वाई डी शर्मा लिखते हैं कि 9 दिनों तक चिराग जलाकर बावली का काम पूरा किया गया था। आज भी इस बावली की मान्यता बहुत अधिक है। 80 फीट गहरे इस बावली के अगल-बगल कई ऐतिहासिक स्मारक जैसे चीनी का बुर्ज, गोगाबाई मकबरा व लाल चैबारा भी बना हुआ है। दरगाह परिसर में होने की वजह से आने वाले दूर-दूर से श्रद्धालु इस दरगाह के पानी को बुरी नजर से बचाने, बच्चों की शिक्षा में आने वाली बाधा को टालने सहित बिगडे कामों को बनाने के लिए ले जाया करते हैं। इसे वो अल्लाह का आशीर्वाद व औलिया की कृपा व प्रसाद मानते हैं।
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आगा खां ट्रस्ट ने करवाया जीर्णोद्धार
बावली का जीर्णोद्धार पहली बार साल 2008 में आगा खां ट्रस्ट फाॅर कल्चर ने करवाया था क्योंकि लगातार बावली के प्रयोग से और सफाई ना होने की वजह से इस पर काईं जम रही थी। आज भी बावली का समय-समय पर साफ-सफाई का कार्य ट्रस्ट द्वारा किया जाता है।
 

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