Wednesday, Oct 16, 2019
the petition filed against the odd-even in the ngt

दिल्ली: Odd-Even के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से NGT ने किया इनकार

  • Updated on 9/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। एनजीटी ने 4 से 15 नवंबर तक Odd-Even योजना फिर से लागू करने के AAP सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है।  एनजीटी में एक याचिका दायर कर 4 से 15 नवम्बर के बीच राष्ट्रीय राजधानी में वाहनों की ऑड-ईवन (Odd-Even) योजना’ लागू करने के आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के फैसले को चुनौती दी गई थी।

अधिवक्ता गौरव कुमार बंसल द्वारा याचिका दायर की कई थी। जिसमें कहा गया था कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने दिल्ली की वायु गुणवत्ता पर ऑड-ईवन योजना के प्रभाव का आकलन किया और यह पाया कि इसके क्रियान्वयन अवधि में शहर की वायु गुणवत्ता इसके लागू नहीं रहने की अवधि की तुलना में और खराब हो गई।  

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यह योजना दो बार पहले भी लागू की जा चुकी है
बता दें कि दिल्ली में यह योजना दो बार पहले भी लागू की जा चुकी है। वाहनों की ऑड-ईवन योजना के तहत एक दिन ऐसे वाहन चलेंगे, जिनकी नम्बर प्लेट की आखिरी संख्या ऑड होगी। वहीं, अगले दिन वे वाहन चलेंगे, जिनके नंबर प्लेट पर आखिरी संख्या ईवन होगी। साथ ही, उसके बाद के दिनों में भी यह क्रम जारी रहेगा।

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सीपीसीबी एवं दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति की रिपोर्ट
दिल्ली में यह योजना जनवरी और अप्रैल 2016 में लागू की गई थी। याचिका में कहा गया है कि जब सीपीसीबी एवं दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) जैसे देश के शीर्ष पर्यावरण प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों ने एक स्वर में कहा है कि ऑड-ईवन योजना 2016 में वायु प्रदूषण की समस्या पर रोक लगाने में नाकाम रही थी, ऐसे में अन्य देशों के लोगों द्वारा किए गए महज एक अध्ययन के आधार पर ऑड-ईवन योजना को दिल्ली सरकार का लागू करना, न सिर्फ अप्रिय है बल्कि यह सीपीसीबी और डीपीसीसी जैसी संस्थाओं की साख भी गिराएगा।

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ओड-ईवन योजना पराली प्रदूषण पर सात सूत्री कार्य योजना का हिस्सा
गौरतलब है कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने 13 सितम्बर को कहा था कि ओड-ईवन योजना पराली प्रदूषण पर सात सूत्री कार्य योजना का हिस्सा है। याचिका के जरिए दिल्ली सरकार को अन्य देशों द्वारा किए गए उन अध्ययनों को सौंपने के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया गया है, जिनके आधार पर आप सरकार ने ऑड-ईवन नीति लागू करने का फैसला किया था। साथ ही, अध्ययन की सत्यता का पता लगाने के लिए वरिष्ठ वैज्ञानिकों की एक समिति गठित करने का भी अनुरोध किया गया है। सीपीसीबी ने 2016 की अपनी रिपोर्ट में एनजीटी से कहा था कि यह बताने के लिए कोई आंकड़ा नहीं है कि इस योजना ने वाहनों के प्रदूषण को घटाने में कोई असर डाला होगा। 

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