Thursday, Feb 02, 2023
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the potters are getting the benefit of indigenous people

"स्वदेशी अपनाओं" का फायदा मिल रहा है कुम्हारों को, विदेशों से मिल रहे ऑर्डर

  • Updated on 10/19/2022

नई दिल्ली/अनामिका सिंह। दिवाली, जो बिन दीयों के हमेशा अधूरी रहती है। कुम्हार की चाक जब चलती है तो मिट्टी को कई आकार देती है। इससे दीए, मंदिर, सजावटी सामान, देवी-देवताओं की मूर्तियों से लेकर आभूषण तक तैयार होते हैं। शायद ही ऐसा कोई भी त्योहार हो जो बिन कुम्हार के दीयों के पूरा हो सके, उसमें दिवाली तो है ही अंधेरे से रौशनी की ओर जाने का त्योहार।

जब तम में फैला अंधकार घना हो जाता है तो कुम्हारों की चाक पर बने दीए ही उस अंधेरे को दूर करते हैं। इस साल इन कुम्हारों के चेहरे भी दीए की रौशनी की तरह ही चमक रहे हैं। उनका कहना है कि प्रधानमंत्री के मंत्र स्वदेशी अपनाओं का फायदा कुम्हारों को भी मिल रहा है। तो आइए जानते हैं कि क्या कहते हैं विकास नगर कुम्हार कॉलोनी के कुम्हार और कुम्हारों ने दिवाली के दिन घर सजाने के लिए क्या खास तैयार किया है। 
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अमेरिका, आस्ट्रेलिया सहित कई एशियाई देशों से मिले ऑर्डर
कुम्हारों का कहना है कि एशिया की दो सबसे बड़ी आधुनिक उपकरणों से लैस कुम्हार कॉलोनी होने की वजह से विकास नगर व बिंदापुर में काफी बड़े ऑर्डर आ रहे हैं। कुम्हार डायरेक्ट डील नहीं करते बल्कि कई बिचौलियों के माध्यम से भारतीयों की संख्या जिन देशों में ज्यादा है, वहां से बड़े ऑर्डर मिल रहे हैं। जिनमें अमेरिका, आस्ट्रेलिया, सुमात्रा, बाली, इंडोनेशिया सहित कई देश शामिल हैं। 

रिप्लेस हुए हैं चाइनीज दीए
प्रधानमंत्री हमेशा अपने भाषणों में स्वदेशी अपनाने पर जोर देते हैं। कुम्हारों का कहना है कि उसका असर साफ राजधानी के बाजारों में भी देखने को मिल रहा है। कुछ सालों पहले तक भारतीय बाजारों में चाइनीज दीयों की भरमार रहती थी, जोकि एल्यूमिनियम में मोम भरकर तैयार किए जाते थे। लेकिन भारतीय दीयों ने इन चाइनीज दीयों को रिप्लेस कर दिया है। जिससे कुम्हारों के घरों की भी रोजी-रोटी सुरक्षित हो गई है।

ऑनलाइन कंपनियां भी महीनों पहले करती है संपर्क
कुम्हारों ने बताया कि कोविड 19 के चलते साल 2020 के बाद तेजी से ऑनलाइन खरीदारी का प्रचलन बड़ा है। लोग घर बैठे ही अपनी पसंद की हर वस्तु खरीदना चाहते हैं। इसी तरह ऑनलाइन कंपनियों उनसे दिवाली से करीब एक-दो महीने पहले ही संपर्क कर लेती हैं और डिजाइन देखकर बताती हैं कि उन्हें किस डिजाइन के कितने पीस चाहिए। कुम्हार कॉलोनी में जो डिजाइनर दीए थोक में 70-80 रुपए में आधा दर्जन मिलते हैं, वहीं ऑनलाइन 100-150 रुपए पर बिक रहे हैं।
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बड़ी संख्या में महिलाएं भी बनाती हैं मिट्टी का सामान
विकास नगर कुम्हार कॉलोनी में सिर्फ पुरूष ही नहीं बल्कि बड़ी संख्या में महिलाएं भी मिट्टी का सामान बनाती हैं। मिट्टी को आकार देने के साथ ही वो इसे पकाने, रंगने व पैकेजिंग के काम में भी बड़ा योगदान निभा रही हैं। अकेले इस कुम्हार कॉलोनी में ही 2 हजार के लगभग कुम्हारों के घरों की महिलाओं के साथ ही महिला मजदूर भी काम कर रही हैं। जिन्हें कुम्हार दिवाली के मौके पर मांग अधिक होने के चलते काम के लिए बुलाते हैं।

खुद भी लगाते हैं दुकान: परमू प्रधान
विकास नगर कुम्हार कॉलोनी के परमू प्रधान ने बताया कि करीब 750 कुम्हारों का परिवार यहां मिट्टी के बर्तन, सजावटी सामान, दीए, मंदिर व ज्वैलरी बनाने के काम में लगा हुआ है। आगामी शुक्रवार तक बाहर से मिले ऑर्डर को तैयार कर रहे हैं। जिसके बाद सभी कुम्हार हर साल तय बाजारों में निश्चित स्थानों पर अपनी दूकानें लगाएंगें।

इस साल ऑर्डर काफी अच्छा मिला है लेकिन महंगाई के चलते मुनाफा उतना मिलता नहीं दिख रहा है लेकिन ये संतुष्टि है कि धीरे-धीरे लोग अपनी परंपरागत वस्तुओं की ओर लौट रहे हैं तो अच्छे दिन कुम्हारों के जल्द आएंगें। उन्होंने बताया कि उपराज्यपाल द्वारा हाल ही में मीटिंग कर कुम्हारों को दिल्ली में दो जगह पुनर्वास किए जाने की बात कही है। साथ ही आधुनिक भट्टियों को दिए जाने का आश्वासन भी दिया है ताकि एनजीटी द्वारा लटकती तलवार से कुम्हारों को बचाया जा सके।

विभिन्न साइज व डिजाइन के उपलब्ध हैं मिट्टी के दीए
इस बार मार्केट में कई डिजाइन व साइज में मिट्टी के दीए उपलब्ध हैं। छोटे दीयों का थोक दाम 15-29 दर्जन है। वहीं बड़े दीए 5 से 25 रूपए प्रति पीस के हिसाब से बेचे जा रहे हैं। जबकि मिट्टी के रंगीन डिजाइनर दीयों में मोम भरकर भी मार्केट में बेचा जा रहा है, जिसका दाम 80-150 रूपए के 10 पीस का पैकेट है। वहीं बात अगर डिजाइनर रंग-बिरंगे दियों की करें तो इनका 6 पीस का पैक थोक में 70-80 रुपए में बिक रहा है।

सुंदर मंदिर देखकर मन हो जाएगा खुश
दिवाली के दिन मिट्टी का मंदिर रखकर उसकी पूजा की जाती है। कहते हैं कि इससे लक्ष्मी का आगमन होता है। इस बार बेहद सुंदर व कई आकार के मंदिर मार्केट में उपलब्ध हैं जिन्हें देखकर आपका मन खुश हो जाएगा। जहां छोटे बिना रंग के मंदिरों का थोक दाम 70-80 रुपए है। वहीं डिजाइनर व विभिन्न साइज के मंदिरों का आकार 150-500 रुपए तक का है।
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गणेश- लक्ष्मी मूर्ति की डिमांड सबसे ज्यादा
दिवाली की पूजा गणेश-लक्ष्मी जी के बिना अधूरी है। प्रथमदेव गणपति जहां घर में सब मंगल करते हैं, वहीं लक्ष्मी जी की कृपा से सर्वगुण व मलेच्छ विदा हो जाता है। यही वजह है दीपावली पर सबसे ज्यादा डिमांड में इस बार गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति है। वो भी डिजाइनर। जहां छोटी मूर्ति का दाम 40-50 रूपए प्रति पीस है वहीं अधिकतम 1 हजार रूपए की मूर्ति भी मार्केट में उपलब्ध है। इनमें स्टोन व मोती के काम वाली मूर्तियां इस बार काफी ट्रेंड में हैं। 

घंटियों व लटकन से सजाएं अपना घर-आंगन
दिवाली पर लोग घंटियां व लटकन खरीदना बेहद पसंद करते हैं। इनसे घर में एक आर्टिस्टिक लुक आती है। घर के मुख्यद्वार व आंगन सहित खिड़कियों की शोभा इनसे काफी बढ़ जाती है। इस बार घंटियां 150-650 रुपए प्रति पीस तक है क्योंकि घंटियों के अनुसार इनके दाम तय किए जाते हैं। जैसे 7 घंटी का जोड़ा 300 रुपए में है। वहीं लटकन 150-800 रुपए तक की है। लटकन का दाम लंबाई, रंगों और डिजाइन पर आधारित होता है। 

साड़ी की मैचिंग की पहने टेराकोटा ज्वैलरी
कुम्हार कॉलोनी में सिर्फ दीए, मंदिर या मूर्तियां ही नहीं बल्कि टेराकोटा ज्वैलरी भी आप खरीद सकते हैं। बता दें कि टेराकोटा ज्वैलरी कॉटन व सिल्क की साडिय़ों के साथ ही कुर्ते पर काफी जंचती हैं। जहां इयर रिंग्स यहां 50 रुपए प्रति पीस में मिल जाएगा। वहीं ज्वैलरी सेट डिजाइन के हिसाब से मिलेगा। जितना बारीक काम होगा दाम उतना ही अधिक होगा। रंग-बिरंगी इन ज्वैलरी को आप यहां थोक रेट में 150-250 रुपए तक आसानी से खरीद सकते हैं।
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