Saturday, Apr 20, 2019

‘भारत में भ्रष्टाचार के बढ़ते कदम’ रुकने वाले नहीं!

  • Updated on 4/2/2019

कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजरता जब सरकारी कर्मचारियों तथा अधिकारियों द्वारा भ्रष्टïाचार या अवैध सम्पत्ति जमा करने के समाचार न आते हों। देश की स्वतंत्रता के साथ ही पनपी भ्रष्टाचार रूपी विष की यह अमर बेल लगातार फल-फूल रही है जिसके मात्र सात दिनों के चंद उदाहरण निम्र में दर्ज हैं :

25 मार्च को जी.एस.टी. कार्यालय, पुणे के 2 अधीक्षकों संजीव कुमार और विवेक डेकाटे को शिकायतकत्र्ता के जी.एस.टी. देनदारी संबंधी मामले को रफा-दफा करने के लिए तय हुई 3 लाख रुपए की रकम में से एक लाख रुपए रिश्वत की पहली किस्त वसूल करते हुए पकड़ा गया। 

25 मार्च को ही जयपुर में एक अवकाश प्राप्त कर्मचारी के पैंशन संबंधी कार्य करने के बदले में 10,000 रिश्वत लेते हुए पैंशन विभाग का एक सहायक लेखा अधिकारी अमित पारीक गिरफ्तार किया गया।

25 मार्च को गिद्दड़बाहा में पंजाब विजीलैंस ब्यूरो ने गुप्त सूचना के आधार पर आबकारी व कर विभाग में तैनात आबकारी इंस्पैक्टर दीप दीदार सिंह को 40,000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों काबू किया। ॉ

27 मार्च को एक व्यापारी की शिकायत पर भ्रष्टïाचार निरोधक ब्यूरो की अहमदाबाद इकाई ने जी.एस.टी. विभाग के एक अधिकारी राजेश वी. सांदपा को 21,000 रुपए रिश्वत लेते हुए पकड़ा।

27 मार्च को मुम्बई में मानिकपुर पुलिस थाने के एक सहायक इंस्पैक्टर आसिफ बेग को 25,000 रुपए रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया गया। 

27 मार्च को विजीलैंस ब्यूरो ने शाहपुर गोराया के एक पटवारी हरप्रीत सिंह को 3000 रुपए रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा। इसी दिन माहिलपुर तहसील कार्यालय के सुविधा केंद्र में मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के बदले 4000 रुपए रिश्वत लेने वाली महिला कर्मचारी कमलप्रीत को पकड़ा। 

27 मार्च को उत्तर प्रदेश के पूर्व सरकारी अभियंता अरुण कुमार मिश्रा का नई दिल्ली में 208 करोड़ रुपए मूल्य का बंगला आयकर विभाग ने बेनामी सम्पत्ति लेन-देन निषेध अधिनियम के अंतर्गत कुर्क कर लिया। 

27 मार्च को लुधियाना में एन.ओ.सी. के बगैर प्लाट की रजिस्ट्री करवाने के लिए शिकायतकत्र्ता से 20,000 रुपए रिश्वत लेने वाले वसीका नवीस को काबू किया गया।  

28 मार्च को दिल्ली के वसंत विहार पुलिस थाने के कांस्टेबल को शिकायतकत्र्ता को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर उससे 10,000 रुपए रिश्वत की मांग करते हुए काबू किया। 

28 मार्च को मध्य प्रदेश के सतना में भूमि के इंतकाल के बदले में 2500 रुपए रिश्वत लेते हुए पटवारी सुरेश मिश्रा को लोकायुक्त पुलिस ने गिरफ्तार किया।

30 मार्च को मध्य प्रदेश के बांधवगढ़ राष्ट्रीय उद्यान के उप वन संरक्षक सतीश कुमार श्रीवास्तव के यहां रीवा लोकायुक्त की टीम के छापे में आय से अधिक करोड़ों रुपए की सम्पत्ति बरामद की गई। 

भ्रष्टाचार की ऐसी ही घटनाओं को देखते हुए भारत के प्रमुख न्यायवेत्ता श्री फली एस. नरीमन ने हाल ही में नई दिल्ली में ‘भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान : क्या यह सफल हुआ है’ विषय पर आयोजित एक गोष्ठी में बोलते हुए कहा कि ‘‘भारत में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियान सफल नहीं हुआ है और भ्रष्टाचार का ज्वारभाटा एक सुनामी बन गया है।’’ 

उन्होंने आगे कहा, ‘‘मुझे डर है कि शायद हम (अपने जीते-जी) भ्रष्टïाचार का अंत नहीं देखेंगे... मुझे संदेह है कि यहां मौजूद कोई भी व्यक्ति चाहे वह कितना ही युवा क्यों न हो, कभी भ्रष्टाचार का अंत देख पाएगा। लोगों में भ्रष्टाचार के प्रति स्पष्टï रूप से किसी सीमा तक सहनशीलता दिखाई दे रही है। हमें इसे सहते रहना होगा।’’ 

भ्रष्टाचार के मामलों का लगातार सामने आना श्री फली एस.नरीमन द्वारा व्यक्त शंका की पुष्टिï करता है कि लगातार बढ़ रहे भ्रष्टाचार पर नियंत्रण कर पाना सरकार के लिए यदि असंभव नहीं तो अत्यंत कठिन अवश्य है। यह केवल घोषणाओं से समाप्त होने वाला नहीं। सरकार को इस पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावशाली कदम उठाने होंगे तथा जवाबदेही तय करनी होगी, तभी इस लानत से छुटकारा पाया जा सकेगा।                                                             —विजय कुमार 

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