Friday, May 27, 2022
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The smugglers are thirsty for the blood of elephants, from Assam to Kerala

हाथियों के खून के प्यासे है  तस्कर, असम से लेकर केरल तक

  • Updated on 1/21/2022


नई दिल्ली, टीम डिजीटल / चंद रुपये के लालच में तस्कर बाघ, चीता, शेर, कछुआ के साथ ही हाथियों का भी शिकार कर रहे हैं। इन पशुओं के दांत, खाल और अन्य अंग के लिए लोग इनकी जान लेने से भी नहीं चूक रहे है। एक रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021 में देशभर के विभिन्न राज्यों में 49 हाथियों का शिकार किया गया। इनमें सबसे ज्यादा नौ हाथियों का शिकार असम राज्य और सबसे कम दो-दो हाथियों का शिकार अरुणाचल व केरल में हुआ है।
सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत नोएडा के समाजसेवी एवं अधिवक्ता रंजन तोमर के मुताबिक वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो से मिली जानकारी के मुताबिक जानवरों के शिकार को लेकर कई चौकानें वाले दुखद खुलासे हुए है। कोरोना काल में वर्ष 2021 जनवरी से दिसंबर तक देश के विभिन्न राज्यों में 49 हाथियों का शिकार किया गया। इनमें सर्वाधिक नौ हाथियों का शिकार असम में हुआ है, इसके लिए 15 शिकारियों को गिरफ्तार भी किया गया। दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल और ओडिशा एवं तमिलनाडु रहे, यहां आठ-आठ हाथियों को मौत के घाट उतार दिया गया, जबकि गिरफ्तार होने वाली शिकारियों की संख्या केवल 11 ,13 और 17 रही। वहीं, उत्तराखंड और कर्नाटक में तीन-तीन हाथी मारे गए और चार व एक शिकारी को गिरफ्तार किया गया। सबसे कम केरल एवं अरुणाचल प्रदेश में दो-दो हाथियों का शिकार हुआ। कुल मिलाकर 49 हाथियों की हत्या होने पर 77 शिकारियों को गिरफ्तार किया गया। समाजसेवी एवं अधिवक्ता रंजन तोमर के मुताबिक जल्द ही ज़्यादा शिकार होने वाले राज्यों के सम्बंधित मंत्रियों को पत्र लिखकर जानकारी मांगी जाएगी। भारत सरकार को भी इस बाबत जानकारी देते हुए उनसे हाथी समेत अन्य जानवरों के बचाव की अपील करेंगे।

पर्यावरण के लिए ज़रूरी है हाथी का रहना 
हाथी 24 घंटे में औसतन 50 से 10 किलोमीटर तक जंगल में चल लेता है। यह पेड़ पौधों की पत्तियां और फल खाता है। जब वह एक जगह से दूसरी जगह पर जाता है तो उसके गोबर के रास्ते एक जगह के पेड़-पौधों के बीज दूसरी जगह पहुंचकर उग जाते हैं। इस तरह वो जंगल को बढ़ाने और उसे अलग-अलग तरह के पौधों से समृद्ध करने का काम करता है।

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