Friday, Sep 30, 2022
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The soldiers of Maharaja Surajmal had established Katwaria Sarai

महाराजा सूरजमल के सैनिकों ने बसाया था कटवारिया सराय

  • Updated on 6/28/2022

नई दिल्ली/पुष्पेंद्र मिश्र। भरतपुर राजस्थान के हिंदू महाराजा सूरजमल ने जब दिल्ली पर आक्रमण किया था उस समय उनके साथ आए सैनिकों के द्वारा बसाया हुआ गांव है कटवारिया सराय। यहां के लोग खुद को महाराजा सूरजमल का वंशज बताते हैं। जब लालकिले पर हमला करके उसका दरवाजा लेकर महाराजा सूरजमल की सेना वापस डीग लौट गई। तो कुछ लोग यहां रुक गए। लेकिन उनके पास रहने के लिए जमीन नहीं थी।

कटवारिया सराय के बाबा गोरखनाथ मंदिर में आए थे महात्मा गांधी

250 साल पुराना है कटवारिया सराय गांव
18वीं सदी में महरौली से कटकर ये जमीन का टुकड़ा इन लोगों को मिला जिसका नाम कटवारिया पड़ा। मुगल राजाओं ने उससे पूर्व में दिल्ली सल्तनत में जो सराएं बनवाईं वहां गुम्बद बनबाए। एक गुम्बद कटवारिया में भी है इसलिए इसे कटवारिया सराय कहा गया। ग्रामवासी बताते हैं कि कटवारिया सराय का इतिहास 250 साल पुराना है। यहां की जनसंख्या तकरीबन 40 हजार है। जिसमें 10-12 हजार स्थानीय निवासी हैं। बाकी किराएदार रहते हैं। कटवारिया सराय के जातीय समीकरण की बात करें तो यहां जाटों की बहुतायत है। इसके बाद हरिजन, वामन, वाल्मिकी, नाई आदि रहते हैं। हालांकि किराएदार यहां लगभग सभी जातियों के हैं। 

पुराने जमाने में विक्रमपुरी था मस्जिद मोठ गांव का नाम

कटवारिया सराय में 90 के दशक में बना था दर्शनीय पार्क 
कटवारिया सराय में रहने वाले उमेश चतुर्वेदी ने बताया कि 90 के दशक में यहां बहुत बड़ा पार्क हुआ करता था। जिसमें साप्ताहिक बाजार लगता था। उस समय दिल्ली के उपराज्यपाल जगमोहन ने पार्क में एक शानदार फव्वारे का निर्माण कराया था। दिल्ली आने वाले कई पर्यटक कटवारिया सराय का यह पार्क घूमने आते थे। उस समय कटवारिया सराय में जो हाट लगता था उसमें जेएनयू, आईआईएमसी, आईआईटी के प्रोफेसर छात्र खरीदारी करने आते हैं। लेकिन 2002 में इस पार्क में बारात घर बन गया जिसका अधिक इस्तेमाल नहीं है। इससे पार्क की सुंदरता चली गई। 

कभी महाराजा सूरजमल की छावनी होता था हुमायूंपुर गांव

भारत पाक 1965 युद्ध में गांव के जीत सिंह ने दिखाई थी वीरता 
कटवारिया सराय के बुजुर्ग बड़े गर्व से बताते हैं कि हमारे गांव के जीत सिंह ने 1965 में हुए भारत पाकिस्तान युद्ध में जमकर लड़ाई लड़ी। अपनी वीरता दिखाई 13 सितम्बर 1965 को वह देश की आन के लिए शहीद हो गए। देश की सरकार ने उनके सम्मान में जेएनयू से लेकर अधचिनी तक एक सडक़ का नाम शहीद जीत सिंह रखा है। 

मैहरौली से कटा हिस्सा होने के कारण कहा गया कटवारिया 
कटवारिया सराय को मुस्लिमों ने नाम नहीं है। दिया मैहरौली से मिली जमीन के कारण कटे हुए हिस्से को कटवारिया कहा गया। यह पहले बहुत छोटा गांव था अब इसका आकार 20 गुना बढ़ गया है। यहां जेएनयू, आईआईटी दिल्ली और कम्प्टीशन की तैयारी करने वाले वाशिंदे ज्यादा रहते हैं। 
-मास्टर सुखवीर सिंह उम्र 84 वर्ष 

नाम बदलना समस्याओं का हल नहीं 
किसी गांव का नाम बदलना वहां की समस्याओं का हल नहीं है। ये पूर्वजों से भी पहले का दिया हुआ नाम है। राजनीतिक पार्टिंयां राजनीति कर रही हैं। नौजवानों को रोजगार मिले, गांवों में विकास के कार्य हों। नाम बदलने में क्या रखा है। आखिर नाम बदलने से क्या बदल जाएगा। 
-किशनवती, स्थानीय निवासी 

कटवारिया सराय के नाम बदलने की मांग खारिज करते हैं 
नाम बदलने की मांग हमारे गांव में से नहीं उठी है। हम इस मांग को खारिज करते हैं। कटवारिया सराय इसी नाम से ठीक है। हमारे गांव की विरासत बहुत समृद्ध है हम इसके साथ किसी भी रूप में छेड़छाड़ नहीं करना चाहते हैं। लिहाजा हमारे गांव का नाम न बदला जाए। 
-जयदेव, उम्र 70 वर्ष 

न बदला जाए गांव का नाम 
कटवारिया सराय में आए हमें दो दशक से ज्यादा समय हो चुका है। कभी गांव के नाम बदलने की बात नहीं सुनी। कुछ दिन पहले टीवी पर चर्चा देखी है। वहीं से हमें इस मामले की जानकारी मिली। गांव का नाम न बदला जाए। यहां विकास कार्य और बेरोजगारों को रोजगार दिया जाए। 
-हेमलता, उम्र 42 वर्ष 

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