फिर बिगड़े राजधानी के हालात, हवा में घुला जहर, सांस लेने में हो रही परेशानी

  • Updated on 1/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। दिल्ली में हवा की गति कम होने के कारण वायु गुणवत्ता और खराब होकर ‘खतरनाक’ श्रेणी में पहुंच गई। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, शहर में समग्र वायु गुणवत्ता गुरुवार को गंभीर श्रेणी में रहा।

उल्लेखनीय है कि समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 100 और 200 के बीच होता है तब उसे ‘मध्यम’ श्रेणी का माना जाता है, 201 और 300 के बीच होने पर ‘खराब’, 301 और 400 के बीच ‘बहुत खराब’, जबकि 401 और 500 के बीच ‘गंभीर’ श्रेणी का माना जाता है।

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हवा की गुणवत्ता रविवार तक गंभीर थी लेकिन हवा की गति सुधरकर 20 किमी प्रति घंटे होने से वायु गुणवत्ता में काफी सुधार हुआ और मंगलवार तक यह ‘खराब’ श्रेणी तक आ गयी थी। बुधवार को हवा की गति कम होने से हवा की गुणवत्ता फिर से खराब हो गई और बहुत खराब श्रेणी में पहुंच गई।

सीपीसीबी ने कहा कि वीरवार को वायु गुणवत्ता 29 इलाकों में ‘गंभीर’ श्रेणी, जबकि तीन इलाकों में ‘बहुत खराब’ श्रेणी में दर्ज की गई। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, गाजियाबाद, फरीदाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा में वायु गुणवत्ता ‘गंभीर’ श्रेणी में दर्ज की गई, जबकि गुडग़ांव में‘बहुत खराब’वायु गुणवत्ता दर्ज की गई।

दिल्ली में पीएम 2.5 का स्तर 365 है, जबकि पीएम 10 का स्तर 540 है। केंद्र सरकार द्वारा संचालित वायु गुणवत्ता एवं मौसम पूर्वानुमान प्रणाली (सफर) ने कहा कि पूरे दिल्ली में समग्र एक्यूआई गंभीर श्रेणी में दर्ज किया गया है। 

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सीपीसीबी ने लगाया निगमों पर एक-एक करोड़ का जुर्माना
केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने गैर-अनुरूपता वाले आवासीय क्षेत्रों में खुले में कूड़ा जलाने, अपशिष्ट फेंकने और अवैध तरीके से प्लास्टिक उद्योग चलाने के मामले में तीन नगर निगमों पर एक-एक करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है।

पूर्वी दिल्ली नगर निगम, दक्षिण दिल्ली नगर निगम और उत्तरी दिल्ली नगर निगम को जारी किये गये तीन अलग-अलग नोटिस में सीपीसीबी ने कहा कि यह पाया गया है कि दिल्ली और एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण में खुले में कचरा फेंकने से लगभग 13.1 प्रतिशत और खुले में कचरा जलाने से करीब 11.1 प्रतिशत का योगदान रहा।

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सीपीसीबी ने कहा कि 31 जनवरी तक तीनों निगमों से एक करोड़ रुपये का जुर्माना भरने को कहा है और ऐसा नहीं करने पर कानून के मुताबिक कार्रवाई शुरू की जाएगी।

16 जनवरी को जारी किये गये नोटिस में ईडीएमसी, एसडीएमसी और उत्तरी दिल्ली नगर निगम को सीपीसीबी ने कहा है कि जांच के दौरान यह पाया गया कि प्लास्टिक और कचरा को जलाने की घटना अधिक प्रमख है। सीपीसीबी ने उत्तरी दिल्ली नगर निगम में भी इलाकों की पहचान की है जहां अवैध औद्योगिक गतिविधियां देखने को मिली है।

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