Tuesday, Nov 30, 2021
-->
there-are-also-inscriptions-of-emperor-ashoka-in-delhi-

दिल्ली में भी हैं सम्राट अशोक के शिलालेख

  • Updated on 11/22/2021

नई दिल्ली। अनामिका सिंह। बुद्धम शरणम गच्छामि...इन्हीं शब्दों के साथ महान सम्राट अशोक ने बुद्ध धर्म की दीक्षा लेते हुए अपने पूरे जीवन को महात्मा बुद्ध की शिक्षाओं को प्रचारित व प्रसारित करने के लिए लगा दिया था। उनके पुत्र महेंद्र तथा पुत्री संघमित्रा ने महान सम्राट अशोक की ही भांति बौद्ध धर्म के प्रचार में अपने जीवन को समर्पित कर दिया। आज तक आपने बिहार, सांची, बौद्धगया सहित अन्य प्रदेशों में अशोक द्वारा प्राप्त अभिलेखों व शिलालेखों के बारे में काफी पढ़ा होगा लेकिन क्या आप जानते हैं कि दिल्ली में भी अशोक के लघु शिलालेख मौजूद हैं। तो आइए हम आपको आज बताते हैं कि कहां देख सकते हैं आप अशोक के इस लघु शिलालेखों को।
150 साल बाद फिर जोडा गया था अशोक स्तंभ

ब्राह्मी लिपि में लिखा सम्राट अशोक का व्यक्तिगत संदेश 
कालकाजी मंदिर से करीब 1 किलोमीटर की दूरी पर ग्रेटर कैलाश व श्रीनिवासपुरी के बीच बसे दक्षिणी दिल्ली के एक गांव बाहापुर में देख सकते हैं। अशोक के लघु शिलालेखों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित किया गया है। यह लघु शिलालेख चट्टान के एक छोटे से हिस्से पर उकेरा गया है। जोकि ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है। कहा जाता है कि यह सम्राट अशोक का पहला व्यक्तिगत संदेश था जो लोगों को बौद्ध जीवन शैली का पालन करने के लिए प्रेरित करता है। इसे अनुवाद करने के बाद लिखा गया है कि सम्राट अशोक कहते हैं कि महामहिम मुझे भक्त बने ढाई साल से अधिक हो गए हैं लेकिन पहले मेरे द्वारा कोई बड़ा प्रयास नहीं किया गया था लेकिन पिछले वर्ष मैं बौद्ध व्यवस्था के करीब आ गया हूं और खुद को उत्साहपूर्वक और दूसरों में देवताओं के साथ धूलने-मिलने के लिए तैयार हो गया हूं। यह लक्ष्य केवल महान लोगों तक सीमित नहीं है बल्कि एक विनम्र व्यक्ति भी जो खुद को परिश्रम कर स्वर्ग तक पहुंच सकता है उसके लिए भी है। यह उद्घोषणा निम्नलिखित उद्देश्य के लिए की गई है विनम्र और महान लोगों को खुद का परिश्रम करने के लिए प्रोत्साहित करने और राज्य की सीमाओं से परे रहने वाले लोगों को इसके बारे में जानने के लिए। ताकि परिश्रम और बढ़े व डेढ गुना हो जाए।
आखिर क्यों बन गए खास, राखीगढी के माउंट 4 से 7

कब की गई इसकी खोज
आवासीय कॉलोनी के निर्माण के दौरान इस रॉक एडिट एपिग्राफ की खोज हुई, जिसकी जांच साल 1966 को पुरातत्वविदें ने की और भारत के विभिन्न हिस्सों में खोजबीन की गई। तब पाया गया कि ऐसे रॉक एडिट एपिग्राफ भारत में कुल 13 अन्य स्थानों पर स्थित हैं। दिल्ली का यह शिलालेख 14वें पुरालेख संस्करण के रूप में दर्ज किया गया था। शिलालेख का आकार 75 सेंटीमीटर लंबाई व 77 सेंटीमीटर ऊंचाई है। जोकि प्राकृत भाषा में प्रारंभिक ब्राह्मी लिपि में लिखा गया है और अलग-अलग लंबाई की 10 पंक्तियां है और इसमें अक्षरों की एकरूपता का अभाव है।
हवेली जो कभी थी दिल्ली की पहली कचहरी

क्या कहना है एएसआई का
एएसआई के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बाहापुर में प्राप्त शिलालेख से यह साफ है कि उत्तर भारत के अंतर क्षेत्रीय व्यापार मार्ग को गंगा के डेल्टा और भारतीय उपमहाद्वीप के उत्तर-पश्चिमी भाग के बीच एक प्राचीन व्यापार लिंक के रूप में दर्शाता है। दूसरा कि इस पत्थर को कहीं से लाए जाने का कोई प्रमाण नहीं मिलता बल्कि यह इसी स्थान से प्राप्त हुआ जिससे इसकी ऐतिहासिकता बढ़ जाती है और यह दावा की कालकाजी मंदिर पांडवों द्वारा निर्मित एक मंदिर व पुराना स्थान है उसे भी बल मिलता है। यह शिलालेख 273-236 ईसा पूर्व का है।
पुराना किला ही नहीं, दिल्ली के इन स्थानों के भी जुडे़ हैं पांडवों से नाम

विश्वभर में मिलते हैं अभिलेख व शिलालेख
मौर्य राजवंश के सम्राट अशोक के अभिलेख व शिलालेख स्तंभों, शिलाओं और गुफाओं की दीवारों के माध्यम से पूरे विश्व में मिलते हैं, खासकर जहां-जहां बौद्ध धर्म अस्तित्व में आया। इन शिलालेखों के अनुसार अशोक बौद्ध धर्म फैलाने के प्रयास भूमध्य सागर के क्षेत्र तक सक्रिय थे और सम्राट मिस्त्र व यूनान तक की राजनैतिक परिस्थितियों से भलीभांति परिचित थे। दिल्ली में लिखे लेख में वो खुद को देवानम्प्रिय लिखते हैं यानि देवों का प्रिय जबकि कहीं-कहीं वो खुद को प्रियदर्शी की उपाधि के रूप में भी लिखे गए हैं।
द्वारका बावली, जो बुझाती थी लोहारहेडी गांव के लोगों की प्यास

एएसआई मना रहा है यहां वल्र्ड हेरिटेज वीक
एएसआई दिल्ली अशोक के लघु शिलालेख परिसर में इस साल 19 से 25 नवंबर तक चलने वाले वल्र्ड हेरिटेज वीक  मना रहा है। इस दौरान बुद्ध साइट की अर्काइवल फोटो की प्रदर्शनी भी लगाई गई है। खासकर इसमें सांची, नालंदा, बौद्धगया, अंजता व एलोरा को सम्मिलित किया गया है। इसके अलावा वो स्थान जहां से बुद्ध भगवान के अवशेष मिले जिनमें कुशीनगर भी है उन साईट्स के फोटो प्रदर्शनी भी देखने को मिलेगी।
अंग्रेजों ने भी बनाई थी नगर प्राचीर, नाम दिया ‘माॅर्टेलो टाॅवर’

बुद्ध भगवान के 8 चमत्कारों की साईट की भी दिखेगी फोटो
इस फोटो प्रदर्शनी में बुद्ध भगवान के उन 8 चमत्कारों की साईट्स के दर्शन होंगे जो उन्होंने समाज का कल्याण करने के लिए किए थे। इनमें से एक चमत्कार पागल हाथी द्वारा उन्हें मरवाए जाने की कोशिश की गई, जिसे उन्होंने अपने चमत्कार से ठीक कर दिया था। वहीं दूसरा चमत्कार उनके द्वारा पानी पर चलना था, जिसे देखकर लोग अचंभित रह गए थे। एएसआई ने उन घटनाओं व चमत्कारों से जुड़े 8 साईट्स की फोटो यहां लगाई है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.