Sunday, Jun 04, 2023
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किसानों के मन में कृषि बिल को लेकर है संशय, सरकार को जगाना होगा भरोसा

  • Updated on 11/30/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। कृषि बिल (Farm Bill) को लेकर सरकार और किसानों के बीच सीधी जंग देखने को मिल रही है। एक तरफ जहां सरकार किसानों को भरोसा दिलाने की कोशिश कर रही है, वहीं किसानों में कई चीजों को लेकर आशंका बनी हुई है। आइए जानते हैं किसानों को किस बात का है डर-

न्यूनतम समर्थन मूल्य 
नए बिलों को लेकर किसान सबसे ज्यादा इस बात से परेशान हैं कि उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP- Minimum Support Price) नहीं मिलेगा बल्कि किसानों को इसके खत्म होने का पूरा अंदेशा है। हालांकि सरकार इस बात को ख़ारिज करती आ रही है। दरअसल, इस नए बिल के जरिए सरकार ने मंडी से बाहर भी कृषि कारोबार का रास्ता खोल दिया है। अब मंडी के बाहर भी लेन-देन हो सकेगा। जहां मंडी के अंदर लाइसेंसी ट्रेडर किसान से उसकी उपज एमएसपी पर लेते रहे हैं लेकिन बाहर कारोबार करने वालों के लिए एमएसपी को बेंचमार्क नहीं बनाया गया है ऐसे में मंडी से बाहर एमएसपी मिलने की कोई गारंटी नहीं होगी।

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मंडियां हो जायेंगी खत्म  
भले ही सरकार ने नए बिल में मंडियों को खत्म करने की बात नहीं लिखी है लेकिन ये लगभग तय है कि नए नियमों का असर मंडियों को तबाह कर सकता है और इसी बात से किसान सबसे अधिक चिंता में है। यही वो कारण है जिसकी वजह से आढ़तियों को भी डर सता रहा है। ये कारण ही किसान और आढ़ती को एक साथ लाया है।

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मंडियों के अंदर टैक्स
नए बिल के आने से मंडियों के अंदर टैक्स चुकाया जाएगा जबकि मंडियों के बाहर कोई टैक्स नहीं लगेगा। वर्तमान में मंडी से बाहर जिस कृषि व्यापार की सरकार द्वारा व्यवस्था की गई है उसमें कारोबारी को कोई टैक्स नहीं देना होगा लेकिन मंडी के अंदर औसतन 6-7% तक का मंडी टैक्स लगता है।

सरकार को जगाना होगा भरोसा
सरकार को किसानों के उपर्युक्त डर को कम करने के लिए किसानों से बातचीत करनी चाहिए। किसान के मन में मंडी व्यवस्था को खत्म करने और एमएसपी व्यवस्था को हटने का डर बना हुआ है। सरकार को किसानों में भरोसा पैदा करना चाहिए कि जब वो अपने किसी अनाज को बाजारों में बेचेंगे तो उन्हें किसी भी प्रकार का कोई समस्या न झेलना पड़े और उन्हें उचित दाम में मुहैया कराई जाए।  

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