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These 10 points of focus on PM narendra Modi address on self reliance rkdsnt

आत्मनिर्भरता पर फोकस पीएम मोदी के संबोधन के ये हैं खास 10 बिंदु

  • Updated on 5/31/2020


नई दिल्ली/ब्यूरो। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि कोरोना संकट की मार सबसे ज्यादा गरीबों और श्रमिकों पर पड़ी है। उनके दुःख को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। देश और राज्यों की पूर्ववर्ती सरकारों का नाम लिए बगैर उन्होंने अतीत की ओर से इशारा करते हुए कहा कि अगर हमारे गांव-कस्बे, जिले-राज्य आत्मनिर्भर होते तो मौजूदा तमाम समस्याओं ने वह रूप नहीं लिया होता, जो हमारे सामने आज खड़ी है। 

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उन्होंने कहा कि हम सब मिल कर इस तकलीफ और पीड़ा को बांटने का प्रयास कर रहे हैं और भरोसा है कि देशवासी इस संकट पर जीत हासिल करेंगे। लॉकडाउन के चौथे चरण की समाप्ति वाले दिन रविवार को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम मन की बात में देशवासियों से बात करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई का यह रास्ता लंबा है। यह एक ऐसी आपदा है, जिसका पूरी दुनिया के पास कोई इलाज नहीं है और न ही पहले का अनुभव। 

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ऐसे में नई-नई चुनौतियां और उसके कारण परेशानियां हम अनुभव भी कर रहें हैं। उन्होंने कहा कि दुनिया के हर कोरोना प्रभावित देश इस संकट का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब दुनिया की ओर से देखते हैं तब पता चलता है कि वास्तव में भारतीयों की उपलब्धि कितनी बड़ी है। उन्होंने कहा कि हमारी जनसंख्या अधिकतर देशों से कई गुना ज्यादा है और चुनौतियां भी तमाम हैं। फिर भी हमारे देश में कोरोना वायरस उतनी तेजी से नहीं फैल पाया, जितना दुनिया के दूसरे देशों में फैला। 

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उन्होंने कहा कि कोरोना महामारी से होने वाली मृत्यु दर भी बाकी देशों की अपेक्षा बहुत कम रही। प्रवासी मजदूरों की दिक्कतों को लेकर पीएम ने कहा कि उन्हें उनके घरों तक पहुंचाने के लिए रेलवे के साथी दिन-रात लगे हुए हैं। केंद्र हो, राज्य हो, स्थानीय स्वराज की संस्थाएं हो, हर कोई दिन-रात मेहनत कर रहा है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार रेलवे के कर्मचारी आज जुटे हुए हैं, वे भी एक प्रकार से अग्रिम पंक्ति में खड़े कोरोना वॉरियर्स ही हैं।

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उन्होने कहा कि जो दृश्य आज हम देख रहे हैं, इससे देश को अतीत में जो कुछ हुआ, उसके अवलोकन और भविष्य के लिए सीखने का अवसर भी मिला है। आज हमारे श्रमिकों की पीड़ा में हम देश के पूर्वीं हिस्से की पीड़ा को देख सकते हैं। उन्होंने कहा कि जिस पूर्वी हिस्से में देश का ग्रोथ इंजन बनने की क्षमता है, जिसके श्रमिकों के बाहुबल में देश को नई ऊंचाई पर ले जाने का सामर्थ्य है। उस पूर्वी हिस्से का विकास बहुत आवश्यक है। पीएम ने कहा कि पूर्वी भारत के विकास से ही देश का संतुलित आर्थिक विकास संभव है।

उन्होंने कहा कि उन्हें जब से देश सेवा का अवसर मिला है, पूर्वी भारत के विकास को प्राथमिकता दी है। उन्होंने कहा कि मुझे संतोष है कि बीते वर्षों में इस दिशा में बहुत कुछ हुआ है और अब प्रवासी मजदूरों को देखते हुए बहुत कुछ नए कदम उठाना भी आवश्यक हो गया है और हम लगातार उस दिशा में आगे बढ़ रहें हैं। श्रमिकों की स्किल मैपिंग का काम हो रहा है, कहीं स्टार्टअप इस काम में जुटे हैं, कहीं माइग्रेशन कमीशन बनाने की बात हो रही है। 

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इसके अलावा, केंद्र सरकार ने अभी जो फैसले लिए हैं उससे भी गांवों में रोजगार, स्वरोजगार, लघु उद्योगों से जुड़ी विशाल संभावनाएं खुली हैं। आत्मनिर्भर भारत पर आज देश में व्यापक मंथन शुरू हुआ है। लोगों ने अब इसे अपना अभियान बनाना शुरू किया है। लोग अब लोकल प्रोडक्ट को ही खरीद रहे हैं और वोकल फॉर लोकल को प्रमोट भी कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि जब मैंने पिछली बार आपसे मन की बात की थी तब पैसेंजर ट्रेनें बंद थीं। बसें बंद थीं। हवाई सेवा बंद थी। 

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इस बार, बहुत कुछ खुल चुका है, श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं। अन्य स्पेशल ट्रेनें भी शुरू हो गई हैं। तमाम सावधानियों के साथ, हवाई जहाज उड़ने लगे हैं, धीरे-धीरे उद्योग भी चलना शुरू हुआ है। यानी, अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा अब चल पड़ा है, खुल गया है। ऐसे में, हमें और ज्यादा सतर्क रहने की आवश्यकता है। पीएम ने कहा कि इतनी कठिन तपस्या और कठिनाइयों के बाद देश ने जिस तरह हालात संभाला है, उसे बिगड़ने नहीं देना है। हमें इस लड़ाई को कमज़ोर नहीं होने देना है। 

कोरोना के खिलाफ़ लड़ाई अब भी उतनी ही गंभीर है। आपको, आपके परिवार को कोरोना से अभी भी उतना ही गंभीर ख़तरा हो सकता है। हमें हर इंसान की ज़िन्दगी को बचाना है। इसलिए दो गज की दूरी। चेहरे पर मास्क, हाथों को धोना, इन सब सावधानियों का वैसे ही पालन करते रहना है जैसे अभी तक करते आए हैं। मुझे पूरा विश्वास है कि आप अपने लिए, अपनों के लिए, अपने देश के लिए ये सावधानी ज़रूर रखेंगे।

पीएम के संबोधन के अन्य प्रमुख बिंदु
-देश में सबके सामूहिक प्रयासों से कोरोना के खिलाफ लड़ाई बहुत मजबूती से लड़ी जा रही है।

-जो नुकसान हुआ है, उसका दुःख है। हम जो बचा पाए, वो निश्चित तौर पर देश की सामूहिक संकल्पशक्ति का ही परिणाम है।

-संकल्पशक्ति के साथ एक और शक्ति इस लड़ाई में हमारी सबसे बड़ी ताकत है वो है सेवाशक्ति।

-सेवा और त्याग का हमारा विचार है। यह केवल हमारा आदर्श नहीं है, भारत की जीवनपद्धति है।

-गांवों से लेकर शहरों तक, छोटे व्यापारियों से लेकर स्टार्टअप तक, हमारी लैब्स कोरोना के खिलाफ इनोवेशन कर रहे हैं।

-कोरोना की वैक्सीन पर हमारी लैब्स में जो काम हो रहा है उस पर तो दुनियाभर की नज़र है और हम सबकी आशा भी।

-कोरोना काल में दुनिया की दिलचस्पी योग और आयुर्वेद में बढ़ी है। योग रेसपिरेटरी सिस्टम को मजबूत करने में मददगार।

-कपालभाती, अनुलोम-विलोम के साथ भस्त्रिका, शीतली, भ्रामरी जैसे कई प्राणायाम रेस्पिरेटरी सिस्टम को मजबूत करने में सहायक हैं।

-आयुष्मान भारत योजना से एक करोड़ से ज्यादा मरीजों का मुफ्त इलाज हुआ। इनमें 80 प्रतिशत ग्रामीण इलाकों के हैं, जिनमें 50 फीसद महिलाएं हैं।

-पश्चिम बंगाल और ओडिशा के लोगों ने हिम्मत और बहादुरी साइक्लॉन अम्फन का सामना किया और हालात को संभाला, प्रशंसनीय है। 

-5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस है। स्वच्छ पर्यावरण के लिए हर व्यक्ति कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाए।

-जल है तो कल है। वर्षा की एक-एक बूंद को बचाना है। गांव-गांव वर्षा के पानी को बचाने के परंपरागत उपायों का इस्तेमाल करें।
 

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