Friday, Jun 21, 2019

किसानों पर हुई सियासत में भारी पड़ी मोदी सरकार, काम नहीं आए राहुल के ये पैंतरे!

  • Updated on 5/21/2019

नई दिल्ली/अमरदीप शर्मा। लोकसभा चुनावों से पहले देशभर में किसानों की हालात एक बड़ा मुद्दा बनी हुई थी। इसको लेकर कांग्रेस और भाजपा दोनों अपने- अपने सियासी दांव चलते हुए देखे गए। विपक्ष लगातार किसानों का मुद्दा लेकर सरकार पर हमला करता रहा। सरकार के खिलाफ किसानों का आंदोलन भी एक चर्चा का विषय बना हुआ था।

इसी बीच राहुल गांधी अपनी पार्टी को किसान हितेशी बताने में बिल्कुल भी पीछे नहीं रहे। उन्होंने कई मौकों पर किसानों के लिए लुभावने वादे भी किए। हालांकि एक्जिट पोल का आंकड़ा देखा जाए तो राहुल गांधी के सभी पैंतरे फीके पड़ते हुए नजर आ रहे हैं। 

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बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही पार्टियों ने अपने मेनिफेस्टों में किसानों के लिए कई प्रकार की योजनाएं बनाईं। कई लुभावने वादे भी किए गए। बीजेपी तो 2014 से ही 2022 तक किसानों की आय लगभग दोगुनी करने की बात कर रही है।  इसके अलावा कांग्रेस ने अपने घोषणा पत्र में गरीबों को न्याय देने की बात कही है।

इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हम किसानों के लिए अलग से बजट लाएंगे. जैसे रेल के लिए अलग बजट होता था, वैसे ही किसानों के लिए भी अलग से बजट होगा। चलिए तो एक नजर डालते हैं हम कि बीजेपी और कांग्रेस के घोषणापत्र में किसानों के लिए क्या थी उम्मीदें...

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कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में किसानों के लिए चले थे ये दाव...

किसानों के लिए अलग बजट...

राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी ने अपने चुनावी घोषणापत्र में किसानों के साधने की भारी कोशिश की। राहुल गांधी ने किसानों के लिए अलग से बजट देने की बात कही। इसके साथ ही कहा कि किसानों पर कर्ज नहीं चुका पाने पर अपराधिक मामला दर्ज नहीं होगा। अगर किसान कर्ज नहीं चुका पा रहा है तो उसे सिविल मुकद्दमें के तहत देखा जाएगा। 

गरीबों को मिलेगा न्याय...

राहुल गांधी ने गरीबों को न्याय देने की बात कही। जिसमें कांग्रेस घोषणापत्र में हर व्यक्ति कि न्यूनतम आय 72 हजार रुपये सालाना करने की बात कही। राहुल गांधी ने कहा कि पांच साल में सीधे तौर पर एक व्यक्ति को 3 लाख 60 हजार रुपये की मदद दी जाएगी। इसके लिए राहुल ने गरीबी पर वार, 72 हजार का नाार भी दिया।

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तीन राज्यों में किसान कर्ज माफ...

हाल ही में कांग्रेस पार्टी ने तीन राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव नें किसानों की कर्जमाफी को मुद्दा बनाकर चुनाव लड़ा। और जीत दर्ज की। राहुल गांधी ने कहा था कि हमारी सरकार बनने के बाद 10 दिन के भीतर हम कर्ज माफी करेंगे। जिसके बाद सरकार बनते ही ये फैसला लिया गया। हालांकि बीजेपी का आरोप है कि अभी किसी का भी कर्ज माफ नहीं किया गया है। 

भाजपा ने भी किसानों को साधने के लिए किए ये प्रयास...

किसानों को बिना ब्याज के ऋण...

भारतीय जनता पार्टी ने भी अपने घोषणापत्र में किसानों के लिए अपना पिटारा खोल दिया था। उन्होंने अपने संकल्प पत्र में किसानों का सबसे पहले जिक्र करते हुए किसानों को साधने की कोशिश की। जिसके लिए राजनाथ सिंह ने ऐलान करते हुए कहा कि किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए 1 लाख रुपये तक के लोन पर 5 साल तक कोई भी ब्याज नहीं लगेगी। 

हर साल 6 हजार रुपये...
सरकार ने अपने कार्यकाल का आखिरी बजट पेश करते हुए किसानों के लिए बड़ा दाव खेला। जिसमें हर साल 6 हजार रुपये सालाना देने की बात कही इसी बात को बीजेपी ने अपने घोषणापत्र में दोहराते हुए किसान को हर साल 6000 रुपये देने का वादा भी किया। इतना ही नहीं 60 साल से अधिक उम्र के किसानों के लिए पैंसन की योजना की घोषणा की। 

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