Wednesday, Dec 08, 2021
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these five films have been made on bapu gandhis life know what was more true

बापू गांधी के जीवन पर बन चुकीं हैं ये पांच फिल्में, जाने किसमें दिखी ज्यादा सच्चाई

  • Updated on 10/2/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) पर एक नहीं कई फिल्में बनी हैं। देश-विदेश के फिल्मकारों ने बापू को बड़े पर्दे पर उतारा है। साल 1952 में 1 घंटा, 21 मिनट की अमरीकी डॉक्यूमेंट्री आई थी - Mahatma gandhi: 20th Century ProphetD इसका निर्देशन स्टेनले नील ने किया था। इसके अलावा कई भारतीय निर्देशकों ने भी महात्मा गांधी के जीवन पर अलग-अलग फिल्में बनाई है जैसे:

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महात्मा : लाइफ ऑफ गांधी
साल 1968 में यह डॉक्यूमेंट्री बायोग्राफी फिल्म आई थी, जिसका निर्देशन वि_लभाई झावेरी ने किया था। ब्लैक एंड व्हाइट में यह फिल्म बनाई गई थी। इसमें 1868 से लेकर 1948 तक गांधी की जिंदगी, दक्षिण अफ्रीका से लेकर भारत की आजादी के लिए उनके संघर्ष को दिखाया गया है।

गांधी
साल 1982 में यह इंडो-ब्रिटिश फिल्म आई थी, जिसका निर्देशन रिचर्ड एटनबरो ने किया था। यह फिल्म अमरीकी लेखक लुई फिशर की किताब ‘ए लाइफ ऑफ महात्मा गांधी’ पर आधारित थी। बेन किंग्सले ने गांधी के किरदार को शिद्दत से पर्दे पर उतारा और दुनिया भर में उनकी सराहना हुई। इस फिल्म को 11 श्रेणी में एकेडमी अवॉड्र्स के लिए नामित किया गया था, 8 श्रेणी में यह फिल्म विजयी रही। बेन किंग्सले को सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के तौर पर ऑस्कर पुरस्कार मिला था। सर बेन किंग्सले भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक हैं। उनका शुरुआती नाम कृष्ण पंडित भांजी था। उनकी मां ऐना लीना मेरी ब्रिटेन की रहने वाली थीं, जबकि पिता रहीमतुल्ला हरी भांजी थे।    

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हे राम 
साल 2000 में कमल हासन की फिल्म ‘हे राम’ आई थी, जिसमें दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह ने गांधी को पर्दे पर उतारा, जिसकी सराहना भी हुई। यह फिल्म देश विभाजन और गांधी की शहादत की घटना पर आधारित थी। नसीरुद्दीन शाह ने रिचर्ड एटनबरो की फिल्म ‘गांधी’ के लिए भी ऑडिशन दिया था, लेकिन उनकी जगह यह भूमिका बेन किंग्सले को दी गई थी। एक साक्षात्कार में नसीरुद्दीन शाह ने कहा था कि उन्हें एटनबरो की ‘गांधी’ में भूमिका ना मिलने का कोई अफसोस नहीं है। उनका कहना था, ‘मेरा मकसद गांधी का किरदार निभाना नहीं था। मैं सिर्फ उस इंटरनेशनल प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना चाहता था।’  

द मेकिंग ऑफ  द महात्मा  
साल 1996 में आई इस फिल्म में रजत कपूर ने गांधी का मुख्य किरदार निभाया था। उन्हें इस किरदार के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। मशहूर फिल्मकार श्याम बेनेगल ने इसका निर्देशन किया था। फातिमा मीर की किताब ‘द अप्रेंटिसशिप ऑफ ए महात्मा’ पर यह फिल्म आधारित थी।  

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लगे रहो मुन्नाभाई 
साल 2006 में आई इस फिल्म में गांधी के अहिंसात्मक तरीके को ‘गांधीगीरी’ के तौर पर पेश किया गया, जिसकी काफी सराहना हुई। दिलीप प्रभावलकर ने गांधी की प्रभावी भूमिका की थी और उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। निर्देशक राजकुमार हिरानी की यह फिल्म हिट रही थी। संजय दत्त, अरशद वारसी और बोमन ईरानी ने दमदार भूमिका निभाई थी।  

गांधी, माई फादर 
साल 2007 आई इस फिल्म में महात्मा गांधी और उनके बेटे हरिलाल गांधी के रिश्ते को दिखाया गया है। फिरोज अब्बास खान के निर्देशन में बनी इस फिल्म को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। दर्शन जरीवाला ने फिल्म में गांधी की भूमिका निभाई थी, जबकि हरिलाल के किरदार में अक्षय खन्ना थे।

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गांधीगीरी  
साल 2016 में यह फिल्म आई थी, जिसमें आज के दौर में गांधी के महत्व को दर्शाया गया है। फिल्म में ओम पुरी, संजय मिश्रा ने मुख्य भूमिका निभाई थी। सनोज मिश्रा ने फिल्म का निर्देशन किया था। 

द गांधी मर्डर 
यह गांधी पर बनी ऐसी फिल्म है, जो कि भारत में रिलीज नहीं हो सकी। फिल्म निर्माताओं का कहना था कि धमकी की वजह से वह फिल्म भारत में रिलीज नहीं कर रहे, बाकी देशों में यह इस साल गांधी की पुण्यतिथि पर रिलीज की गई थी। करीम त्रैदिया और यूएई के निर्देशक पंकज सहगल सह-निर्देशित इस फिल्म में महात्मा गांधी की हत्या की सच्चाई सामने लाने की कोशिश की गई है। फिल्म में अमरीकी  अभिनेता स्टीफन लैंग और ओम पुरी ने भूमिका निभाई है। फिल्म की निर्माता लक्ष्मी आर. अय्यर ने कहा था, ‘हमने फिल्म को भारत में रिलीज ना करने का निर्णय लिया। भारत बड़ा बाजार है और यहां हर तरह के लोग हैं। दुर्भाग्यवश कुछ तत्वों ने निर्माता और निर्देशक को धमकी दी है, जिसमें शारीरिक रूप से नुकसान पहुंचाने की धमकी भी शामिल है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड ने पिछले वर्ष इसे मंजूरी दे दी थी। यह किसी भी रूप में पक्षपातपूर्ण नहीं है।’ 

 

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