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भारतीय स्वतंत्रता के बाद इन लोगों ने संभाली कांग्रेस की कमान

  • Updated on 8/10/2019

नई दिल्ली/ प्रियंका अग्रवाल। 2019 के लोकसभा चुनाव (Loksabha Elections) में मोदी सरकार (Modi Government) के आगे घुटने टेक चुकी कांग्रेस (Congress) इन दिनों खुदको उभारने के लिए अपने नए अध्यक्ष (President) की तलाश में जुटी हुई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) और बीजेपी (BJP) लगातार कांग्रेस पर परिवार वाद का आरोप लगाती रही है। लेकिन पार्टी के इतिहास की बात करें तो आजादी के बाद यानी 1947 के बाद से अब तक कांग्रेस के कुल 18 अध्यक्ष रहे हैं। इनमें से 5 अध्यक्ष गांधी परिवार से तो 13 अध्यक्ष गैर गांधी परिवार से रहे हैं। खैर सच तो यह भी है कि कांग्रेस की कमान गांधी परिवार (Gandhi Family) के सदस्यों के पास ज्यादा समय तक रही।

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देश की आजादी के बाद से कांग्रेस में कुल 18 लोग अध्यक्ष पद पर विराजमन रहें। जिसमें से जवाहर लाल नेहरू, इंदिरा गांधी, राजीव गांधी, सोनिया गांधी, और राहुल गांधी ही गांधी परिवार से अध्यक्ष बने। जबकि 13 अध्यक्ष का गांधी परिवार से दूर-दूर तक ताल्लुक नहीं रहा है।

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ये है 1947 के बाद से कांग्रेस अध्यक्ष की लिस्ट :

  • भारत की स्वतंत्रता के बाद 1947 में जेबी कृपलानी को पार्टी (कांग्रेस) का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया गया था। वह एक साल (1947-1948) तक अध्यक्ष पद पर आसीन रहें।
  • 1948 में पट्टाभि सीतारमैया कांग्रेस के अध्यक्ष बने। उन्होंने दो साल तक इस पद की कमान संभाली थी। 
  • 1950 में पार्टी की कमान पुरुषोत्तम दास टंडन को मिली थी। वे 1 साल तक इस पद पर थे।
  • 1951 में जवाहर लाल नेहरू तत्कालीन प्रधानमंत्री के साथ-साथ पार्टी के अध्यक्ष भी बने थे। नेहरू (1951-1954) तक इस पद पर रहे।
  • 1955 से 1959 तक यूएन ढेबर ने पार्टी के अध्यक्ष पद की कमीन संभाली। 
  • इसके बाद इंदिरा गांधी (1959-1960) ने अध्यक्ष पद की जिम्मदारी ली।
  • 1960 में नीलम संजीव रेड्डी कांग्रेस के अध्यक्ष बने। रेड्डी ने 1963 तक पद की जिम्मेदारी संभाली।
  • 1964 में के. कामराज को अध्यक्ष पद की कमान सौंपी गई। 1968 तक वे इस पद पर थे। उन्होंने जवाहर लाल नेहरू की मौत के बाद लाल बहादुर शास्त्री के पीएम बनने में बेहद अहम भूमिका निभाई। कामराज को भारतीय राजनीति का किंगमेकर कहा जाता था।
  • 1968-1969 एस. निजलिंगप्पा ने कांग्रेस की अध्यक्षता की। स्वतंत्रता आंदोलन में भी उन्होंने अहम रोल निभाया।
  • 1970 में बाबू जगजीवन राम कांग्रेस के अध्यक्ष रहे। वे दलित नेता थे और दो साल तक अध्यक्ष पद पर रहे।
  • 1972 से 1974 तक शंकर दयाल शर्मा को पार्टी की जिम्मेदारी मिली।
  • 1975-1977 में देवकांत बरुआ पार्टी के अध्यक्ष बने। इस दौरान देश में इमरजेंसी थी। उस समय का बेहद चर्चित नारा 'इंदिरा इज इंडिया और इंडिया इज इंदिरा' बरुआ ने दिया था।
  • 1977 से 1978 तक ब्रह्मनंद रेड्डी पार्टी के अध्यक्ष बने। बाद में कांग्रेस के विभाजन के बाद इंदिरा गांधी एक बार फिर कांग्रेस की अध्यक्ष बनी। इस बार उन्होंने 7 सालों तक इस पद को संभाले रखा। 1984 में उनकी हत्या हो गई। 
  • 1985 में इंदिरा की मौत के बाद उनके बेटे राजीव गांधी ने जिम्मेदारी संभाली। वे 1991 यानी 7 साल तक अध्यक्ष पद पर रहे।
  • 1992 में पीवी नरसिम्हा राव को पार्टी का अध्यक्ष चुना गया। वे 1996 तक इस पद पर रहे।
  • 1996 में सीताराम केसरी को पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया। इनके पद का कार्यकाल 1997 तक चला। 
  • 1998 में सोनिया गांधी ने कांग्रेस पार्टी की कमान संभाली। सोनिया सबसे लंबे समय तक इस पद रहीं। 2017 यानी 19 साल तक सोनिया पार्टी की अध्यक्ष रहीं।
  • इसके बाद 16 दिसंबर, 2017 को सोनिया गांधी के बेटे राहुल गांधी को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया।

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बेशक कांग्रेस पार्टी के 18 अध्यक्ष में से 13 अध्यक्ष गैर गांधी परिवार से बने थे लेकिन कहीं न कहीं कांग्रेस की पहचान गांधी परिवार की पार्टी जैसे आरोपों में घिर गई। अब इस आरोपों से निकलने के लिए कांग्रेस अपना 19वां पार्टी अध्यक्ष तलाश रही है। यह तलाश आज शाम तक खत्म हो जाएगी और पार्टी को अपना  14वां गैर गांधी परिवार का अध्यक्ष मिल जाएगा।

 

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