Saturday, Jul 31, 2021
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सफरनामा 2020: कांग्रेस के लिए बुरा रहा साल 2020, इन बड़े नेताओं ने किया पार्टी का विरोध

  • Updated on 12/30/2020

नई दिल्ली/ सोहित शर्मा। देश की सबसे पुरानी पार्टी कां (Congress) आज अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही है। देश के अलग-अलग राज्यों के चुनाव में पार्टी का लगातार नीचे गिरता ग्राफ कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन की कमजोरी को उजागर करता है। यही कारण है कि राजनीति के बदलते परिदृश्य में कांग्रेस  ने अपनी बनी बनाई जमीन भी खो दी है। पार्टी के नेतृत्व और संगठन की कमजोरी के लेकर काग्रेस के ही कई दिग्गज कई मौकों पर सवाल खड़े करते आए हैं। आइए एक नजर डालते हैं पार्टी के उन वरिष्ठ नेताओं पर जिन्होंने उठाए सवाल...

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दिल्ली महिला कांग्रेस अध्यक्ष ने पार्टी नेतृत्व पर खडे किए सवाल 
साल 2020 में कांग्रेस के पतन की शुरूआत फरवरी महीने में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव से हुई। दिल्ली विधानसाभा की 70 सीटों में से 62 सीटों पर यहां आम आदमी पार्टी ने जीत दर्ज की। वहीं भारतीय जनता पार्टी को महज 8 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। इस चुनाव में अगर सबसे बुरी हार किसी की हुई तो वो थी देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस, जिसके  लगभग सभी प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई। कांग्रेस का यहां प्रदर्शन इस हद तक गिर गया कि पार्टी अपना खाता तक नहीं खोल सकी, जिसके चलते दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष ने पार्टी पर कई सवाल खड़े किए।

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शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया कांग्रेस की हार का कारण
दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद दिल्ली महिला कांग्रेस की अध्यक्ष और पूर्व राष्ट्रपति की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी (Sharmistha mukherjee) ने पार्टी के नेतृत्व और संगठन की कमजोरी को लेकर बड़ा सवाल खड़ा किया था। उन्होंने इस बड़ी हार के लिए पार्टी स्तर पर निर्णय लेने की देरी, राज्य स्तर पर रणनीति और एकजुटता का अभाव, निचले स्तर पर संवाद का अभाव और कार्यकर्ताओं में कम उत्साह हार के कारण को जिम्मेदार ठहराया।

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पार्टी में संगठन की कमजोरी को कपिल सिब्बल ने किया उजागर 
कांग्रेस की कार्यशैली से असंतुष्ट नेताओं में से एक नेता कपिल सिब्बल भी हैं। बिहार चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार पर उन्होंने कांग्रेस में नेतृत्व और संगठन की कमजोरी को उजागर करते हुए कहा कि सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी डेढ़ साल से बिना अध्यक्ष के कैसा काम कर सकती है। कार्यकर्ता अपनी समस्या लेकर कहां जाएं? सिब्बल ने कहा कि हाल के चुनाव बताते हैं कि यूपी में कांग्रेस फैक्टर नहीं थी, लेकिन गुजरात और मध्य प्रदेश जहा कांग्रेस की सीधी लड़ाई बीजेप से थी। वहां भी नतीजे बुरी तरह से चौंकाने वाले हैं, जो कांग्रेस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करते हैं। उन्होंने आगे कहा, 'जहां बीजेपी के साथ लड़ाई में कोई नहीं है, हम एक मजबू विकल्प नहीं बन पा रहे हैं। कुछ तो गड़बड़ है। हमें इस बारे में कुछ करना चाहिए।'

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पी चिदंबरम ने  कांग्रेस में नेतृत्व की कमजोरी के लेकर सवाल खड़े किए
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने न सिर्फ बिहार विधानसभा चुनाव, बल्कि विभिन्न राज्यों के अलग-अलग चुनावों में पार्टी के लगातार गिरते ग्राफ का जिम्मेदार कांग्रेस में नेतृत्व और स्थिति की कमजोरी के लेकर सवाल खड़े किए। चिदंरबम ने बिहार में कांग्रेस के अपनी क्षमता से ज्यादा सीटों पर चुनाव लडने के फैसले पर चिंता जाहिर करते हुए सवाल खड़े किए।  

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बिहार चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ने लगाया  ये आरोप
दिल्ली विधानसभा चुनाव में जमानत जब्त करा चुकी कांग्रेस पार्टी बिहार में जीत की उम्मीद के साथ मैदान में उतरी, लेकिन सही नेतृत्व और संगठन की कमजोरी के चलते महज 19 सीटें ही अपने नाम कर सकी। बिहार चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह ने बड़ा सवालिया निशान खड़ा करते हुए कहा कि कांग्रेस को चुनाव जीतना है तो संगठन की कमजोरी दूर करने के साथ-साथ बड़े स्तर पर बदलाव भी करने होंगे।

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देश में बिहार विधानसभा चुनाव उस दौरान हुए जब नोवेल कोरोना वायरस अपने चरम पर था। हालांकि, कोरोना गाइडलाइंस के सहारे राज्य में मतदान सफलतापूर्वक हुए तो देश की सबसे पुरानी पार्टी को यहां भी उम्मीद के अपेक्षा असफलता ही हाथ लगी। इस चुनाव में एनडीए ने 125 सीटों पर बंपर जीत दर्ज की, तो महागठबंधन को महज 110 सीटों पर ही संतोष करना पड़ा। राज्य की जनता का भरोसा जीतने में सबसे सफल पार्टी राजद रही जिसने 75 सीटे अपने नाम कर सबसे बड़ी पार्टी होने का तमगा अपने नाम किया। राज्य में दूसरे नंबर पर भाजपा रही जिसने 74 सीटें अपने नाम की।

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दरअसल, देश के विभिन्न चुनावों में कांग्रेस के लगातार खराब प्रदर्शन को देखते हुए पार्टी के कई शीर्ष नेताओं ने पार्टी की अन्तरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को चिट्ठी लिखकर बड़े फेरबदल की मांग की थी। इस पत्र में 23 वरिष्ठ नेताओं ने अध्यक्ष पद के लिए फिर से चुनाव कराने और नई जिम्मेदारी तय करने की मांग की थी। जिसके बाद कांग्रेस कार्यसमिति ने बैठक कर संगठनात्मक मुद्दों पर चर्चा की। कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे गए पत्र में चर्चा की गई है कि कांग्रेस का पुनरुत्थान एक राष्ट्रीय अनिवार्यता है, यह लोकतंत्र के लिए भी आवश्यक है।

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