Tuesday, Oct 19, 2021
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सर्जिकल स्ट्राइक से पहले भी सेना कर चुकी थी ये बड़ी कार्रवाई, मनोहर पर्रिकर ने किया था नेतृत्व

  • Updated on 3/18/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल।  अपने अंतिम सफर में भी देश की सेवा के लिए आतुर दिखने वाले कर्मठ नेता और गोवा के लोगों की धड़कन पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर बीमारी के चलते जिंदगी से जंग हार गए। उन्होंने मौत के साथ एक लंबी जंग लड़ी। जिसके चलते आज पूरा देश उनके अद्भुत साहस को नमन कर रहा है।

मनोहर पर्रिकर काफी समय से एक खतरनाक बीमारी के से जूझ रहे थे। लिहाजा उन्होंने रविवार की शाम को अपने निवास पर अंतिम सांस ली। पर्रिकर ने नवंबर 2014 ले लेकर मार्च 2017 तक देश के बतौर रक्षा मंत्री सेवा की। पर्रिकर के कार्यकाल के दौरान ही भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक करके आतंकवाद को करारा जवाब दिया।

साल 1994 में राजनीति की शुरुआत करने वाले पर्रिकर ने अपने करियर में गोवा के मुख्यमंत्री बनने से लेकर देश के रक्षा मंत्री बनने तक का सफर तय किया। सबसे पहले उन्होंने पणजी से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़कर विधान सभा पहुंचे। इसके बाद ने विपक्ष के नेता चुने गए। वह पहली बार 24 अक्टूबर 2000 में गोवा के मुख्यमंत्री बने, लेकिन उनका कार्यकाल केवल 27 फरवरी 2002 तक ही चला। इसके बाद पांच जून, 2002 को उन्हें फिर से चुना गया और उन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में सेवाएं दीं। 

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नवंबर 2014 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व की मोदी सरकार में वे देश के रक्षा मंत्री के पद पर सुशोभित किए गए। इस दौरान उनके कार्य को देश गर्व के साथ याद करता है। जब भारतीय सेना ने पीओके में घुसकर आतंक वाद के खिलाफ सर्जिकल स्ट्राइक की थी तब मनोहर पर्रिकर देश के रक्षा मंत्री थे। उनके नेतृत्व में ही इस बड़े कारनामे को अंजाम दिया गया। इससे पहले साल 2015 में मणिपुर के चंदेल में उग्रवादियों ने सेना के जवानों पर हमला करके 18 जवानों की जान ले ली थी। जिसके बाद भारतीय सेना ने म्यामांर की सीमा में घुसकर आंतकियों के कैंप तबाह किए जिसमे 100 उग्रवादी मारे गए। 

सर्जिकल स्ट्राइक...

2016 को सितंबर के महीने में उरी में भारतीय सेना के कैंप पर रात में सोते हुए जवानों पर आतंकी हमला किया गया। जिसके बाद पूरे देश में गुस्से का माहौल था। लोगों में पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए मांग उठ रही थी। जिसके बाद तत्कालीन रक्षा मंत्री पर्रिकर ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के साथ मिलकर सर्जिकल स्ट्राइक की पृष्ठभूमि तैयार की। इसके बाद वे पीएम मोदी के साथ रात जागकर हालात का जायदा लेते रहे और पल- पल की खबर से अपडेट रहे। 

भारतीय सेना ने पीओके में घुसकर सर्जिकल स्ट्राइक की प्लानिंग बनाई।  जिसके भारत की सेना ने पीओके में करीब 3 किलोमीटर अंदर घुसकर आतंकी ठिकानों को नेस्तनाबूत कर दिया था। इसके बाद भारतीय सेना वापस अपनी सर्जमी में वापस लौट आई थी। इसमें सबसे बड़ी बात ये थी की पाक की सीमा में घुसकर इतने बड़े कारनामों को अंजाम देते ने के बाद भारतीय सेना को कोई क्षति नहीं हुई थी। सेना के सभी जवान सकुशल वापस लौट आए थे। जिसके बाद देश भर में सरकार के इस साहसिक कदम की सराहना हुई थी।

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चंदोल में उग्रवादियों का हमला...

इससे पहले साल 2015 में मणिपुर के चंदेल में उग्रवादियों ने सेना के जवानों पर हमला कर दिया था। जिसमें 18 जवान शहीद हो गए थे। जिसके चलते देश भर में गुस्से का माहौल था। इसके बाद भारतीय सैना के पैराकमांडो ने उग्रवादियों के दो कैंप तबाह किए हैं। जिसमें करीब 100 उग्रवादी मारे गए। उस वक्त सेना को कार्यवाही करने की पूरी छूट दे दी गई थी। उस समय इसके सूत्रधार भी मनोहर पर्रिकर ही थे। 

पर्रिकर ने बहुत छोटी उम्र से आरएसएस से रिश्ता जोड़ लिया था। वह स्कूल के अंतिम दिनों में आरएसएस के ‘मुख्य शिक्षक’ बन गए थे। पर्रिकर ने संघ के साथ अपने जुड़ाव को लेकर कभी भी किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं की। आईआईटी से पढ़ाई पूरी करने के बाद वह 26 साल की उम्र में मापुसा में संघचालक बन गए।


 

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