Wednesday, Dec 01, 2021
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World blood donation day: ये है भारत की एक ऐसी जोड़ी जिसनें बनाया रक्तदान का लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड

  • Updated on 6/14/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। वो कहावत तो आपने जरूर सुनी ही होगी 'रक्तदान यानी महादान'। जी हां, हम बात कर रहें हैं रक्तदान कि जो देश के हर हिस्सों में मनाया जाता है। रक्त एक ऐसी चीज है जिसे दान कर आप किसी की जिंदगी बचा सकते हैं और खुद को उसका मसीहा बना सकते हैं। युं तो, रक्तदान साल में एक ही बार आता है लेकिन हमारा मानना है कि यह दिन हर रोज मनाना चाहिए क्योंकि आप किसी को एक नई जिंदगी दे रहे हैं।

दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में इस दिन को 14 जून में मनाया जाता है। वैसे तो रक्तदान (Blood donation) एक बहुत ही अच्छी पहल है लेकिन इस पहल को बहुत कम लोग ही गंभीरता से लेते हैं जैसे की भारत और भारत में रहने वाले लोग। हमारे देश में ऐसे सामाजिक कार्यों के लिए लोग काफी जागरूक रहते हैं। और इसकी एक झलक मोहाली में देखने को मिली है। चंदीगढ़ (Chandigarh) के मोहाली में रहने वाले इस दंपत्ति ने वो कर दिखाया है जो कि बहुत कम लोग कर पाते हैं।

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मोहाली की वो जोड़ी जिसने बनाया रक्तदान का रिकॉर्ड

दरअसल, मोहाली के रहने वाले इस दंपत्ति ने लोगों को अपना खून देकर एक नई मिसाल कायम कि है और बड़े-बड़े रिकॉर्ड बनाए हैं। बता दें कि, चंदीगढ़ के रहने वाले इस पति पत्नी ने भारत (India) में सबसे ज्यादा रक्तदान का रिकॉर्ड (Record) बनाया है और इनका नाम लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड (Limca book of record) में भी दर्ज हो गया है। मोहाली (Mohali) के रहने वाले जसवंत कौर और उनके पति बलवंत सिंह ने देश में रक्तदान को लेकर एक नई जागरूकता (Inspirational) फैलाई है। पति पत्नी के इस जोड़े ने लगभग 25 साल से 91 बार रक्तदान किया है और साथ ही जसवंत कौर और पति बलवंत सिंह के परिवार का हर सदस्य इस जागरूकता अभियान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेता आ रहा है।

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आमतौर पर सरकार रक्तदान को लेकर कई ऐसी योजनाएं और जागरूकता अभियान चलाती है जिसमें करीब 12 लाख लोग हिस्सा लेते हैं और 9 प्रतिशत लोग इस अभियान से अनभिज्ञ होते हैं। आपको बता दें कि, वर्ष 1986 में एक ऐसा ही कैंप लगा था फरीदकोट (Faridkot) के बाबा फरीद मेले में जहां माडल टाउन मुंडी खरड़ वासी पंजाब पशुपालन विभाग (Punjab Animal Husbandry Department) में कार्यरत जसवंत कौर ने पहली बार इस कैंप में रक्तदान किया था। तभी से ही वो इस कैंप और बाकि सभी अभियानों में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेती आ रही हैं।

जसवंत कौर का मानना है कि उनके द्वारा दान किया गया रक्तदान लोगों की जिंदगी से अंधेरा हटाकर उजाला ला सकता है। पहली बार रक्तदान करने के बाद उन्होंने इसके लिए अपने पति बलवंत सिंह को भी प्रेरित किया। पत्नी की बात से प्रेरित होकर बलवंत सिंह ने पहली बार 7 अप्रैल 1991 को जसवंत कौर के साथ रक्तदान किया। पति पत्नी के मुताबिक सन् 1991 के बाद से ये दंपत्ति अब तक करीब 91 बार रक्तदान कर चुका है। जसवंत कौर और बलवंत सिंह की बेटी संदीप संधू और बेटा अमनदीप संधू कनाडा के सिटीजन हैं और वे दोनों भी अब तक करीब 36 बार रक्तदान कर चुके हैं और इस अभियान में अपना योगदान देते हैं।

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