Friday, Jan 18, 2019

निराशा में आशा की किरण जगाने के लिए संजीवनी का काम करेंगे स्वामी विवेकानंद के ये विचार: पढ़ें...

  • Updated on 1/12/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। उठो और जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि तुम अपना लक्ष्य प्राप्त नहीं कर लेते। इन बातों को अपने निजी जीवन में चरितार्थ करने वाले और युवाओं के प्रेरणास्त्रोत स्वामी विवेकानंद की आज 156 वीं जयंती है। इसके अलावा उनके जन्मदिवस को राष्ट्रीय युवा दिवस के रूप में मनाया जाता है।

वे स्वामी विवेकानंद जी ही थे जिन्होंने 11 सितंबर 1893 को शिकागो, अमेरिका की विश्व धर्म सम्मेलन सभा में भाषण देकर दुनिया के ध्यान को भारत की ओर केंद्रित करने के लिए मजबूर कर दिया था। स्वामी के विचार युवाओं के लिए प्रेरणादायी हैं। इसके अलावा उनके विचारों का स्मरण करने से आपके उदास जीवन में भी उर्जा का संचार होगा।  

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स्वामी विवेकानंद का जन्म 12 जनवरी 1863 को कोलकाता के एक कुलीन बंगाली परिवार में हुआ था। वे बचपन से ही आध्यात्मिकता की ओर झुके हुए थे। उनके गुरु रामकृष्ण देव थे। जिनसे वे काफी ज्यादा प्रभावित थे। जिनसे उन्होंने सीखा कि सारे जीव स्वयं परमात्मा का ही एक अवतार हैं। इसलिए मानव जाति की सेवा द्वारा परमात्मा की भी सेवा की जा सकती है। रामकृष्ण की मृत्यु के बाद विवेकानंद ने बड़े पैमाने पर भारतीय उपमहाद्वीप का दौरा किया। विश्व धर्म संसद 1893 में भारत का प्रतिनिधित्व करने, संयुक्त राज्य अमेरिका के लिए कूच की।

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स्वामी जी ने अपने जीवन में अनेक ऐसे काम किए जिन्हें आज भी नहीं भुलाया जा सकता। उन्होंने युवा शक्ति को अपनी क्षमता को पहचानने और उसके सदुपयोग में लाने के लिए आहृान किया है। उनके विचारों से देश प्रेरित होता हैं। लोगों में निराशा के अंधकार से आशा की ओर लाने के लिए स्वामी विवेकानंद जी के विचार संजीवनी की तरह काम करते हैं। हम आपको कुछ ऐसे ही विचारों को आपको बताने जा रहे हैं। 

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  • ज्ञान स्वयं में वर्तमान है, मनुष्य केवल उसका आविष्कार करता है।
  • आप जो भी सोचेंगे। आप वही हो जाएंगे। अगर आप खुद को कमजोर सोचेंगे तो आप कमजोर बन जाएंगे। अगर आप सोचेंगे की आप शक्तिशाली हैं तो आप शाक्तिशाली बन जाएंगे।
  • ब्रह्मांड की सारी शक्तियां पहले से ही हमारे भीतर मौजूद हैं। हम ही मूर्खतापूर्ण आचरण करते हैं, जो अपने हाथों से अपनी आंखों को ढक लेते हैं और फिर चिल्लाते हैं कि चारों तरफ अंधेरा है, कुछ नजर नहीं आ रहा है।
  • अगर आप पौराणिक देवताओं में यकीन करते हैं और खुद पर यकीन नहीं करते हैं तो आपको मुक्ति नहीं मिल सकती है। अपने में विश्वास रखो और इस विश्वास पर खड़े हो जाओ, शक्तिशाली बनो, इसी की हमें जरूरत है।
  • लोग तुम्हारी स्तुति करें या निन्दा, लक्ष्य तुम्हारे ऊपर कृपालु हो या न हो, तुम्हारा देहांत आज हो या युग में, तुम न्यायपथ से कभी भ्रष्ट न हो।
  • जिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिये, नहीं तो लोगो का विश्वास उठ जाता है।
  • एक समय में एक काम करो , और ऐसा करते समय अपनी पूरी आत्मा उसमे डाल दो और बाकी सब कुछ भूल जाओ।
     
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