Saturday, Mar 23, 2019

पाकिस्तान की इस जगह से जुड़ा है महाभारत का ये अहम पहलू

  • Updated on 3/6/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। ऐसे बहुत से धार्मिक स्थल है जो हमारे पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान में स्थित है जिनमें हम सबसे पहले करतारपुर को तवज्जों देते हैं। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी वहां के पंजाब प्रांत के उत्तरी भाग में चवकवाल जिले में पोठोहार के पठारी क्षेत्र में नमक कोह पर्वत श्रंखला में स्थित हिंदुओं का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान भी मौजूद है, जिसका संबंध महाभारत काल से बताया जाता है।

जन श्रुतियों की मानें तो ये देव स्थान हजारों साल पुराना है, जिसको लेकर मान्यता है कि उसका निर्माण भगवान श्री कृष्ण ने करवाया था और यहां स्थित शिवलिंग की स्थापना उन्हीं के हाथों हुई थी। सिर्फ यहीं नहीं ये स्थान सिख गुरू नानक देव जी को भी काफी प्रिय बताया जाता है। 

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कहते हैं महाभारत काल में पांडव वनवास के दिनों इसी पहाड़ियों में अज्ञातवास के दौरान आए थे, और यहीं वह कुंड है जहां पांडव प्यास लगने पर पानी की खोज में पहुंचे थे।

कुंड पर यक्ष का अधिकार था। पानी की तलाश में जब पांडव इस कुंड पर आए तो यक्ष ने उन्हें आगाह किया कि इसपर उनका अधिकार है, और अगर पानी पीना है तो पहले उनके प्रश्नों का उत्तर देना होगा। 

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यक्ष के प्रश्नों का उत्तर न देकर पांडवों ने उस कुंड के पानी को पीने का प्रयास किया, जिसके बाद यक्ष ने उनको मूर्छित कर दिया।

अंत में जब युधिष्ठिर अपने भाइयों को खोजते हुए कुंड के पास पहुंचे तो यक्ष ने उन्हें इस बात से वाकिफ कराया, जिसके बाद युधिष्ठिर ने कहा कि वे यक्ष के प्रश्नों के उत्तर देंगे। तब यक्ष ने उनसे प्रश्न पूछे और उनके चारों भाइयों को जीवित करके उन्हें धर्मराज का नाम दिया।
 

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