Monday, Mar 30, 2020
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#महाशिवरात्रि: बड़े तप, समर्पण से परिपूर्ण है शिव- पार्वती की प्रेम कहानी

  • Updated on 2/21/2020

नई दिल्ली / टीम डिजिटल। शिव भक्तों के लिए आज का सबसे बड़ा दिन यानी महाशिवरात्रि का पावन दिन है। इस महाशिवरात्रि को लेकर कई पौराणिक कथाएं हैं। फिर भी आज की युवा पीढ़ी को समझाने के लिए एक लाइन में कहा जा सकता है कि आज शिव और पार्वती जी की शादी की सालगिरह है। इस अवसर पर आज हम आपको भगवान शिव और पार्वती जी कि प्रेम कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं।

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सबसे बड़ी प्रेम कहानी
शिव विवाह कोई साधारण विवाह नहीं था प्रेम, समर्पण और तप की परीक्षा थी। दुनिया की बड़ी से बड़ी लव स्टोरी इस कहानी के आगे फेल है। जितने उतार-चढ़ाव इस प्रेम कहानी में देखने को मिला है, वो दुनिया की सबसे हिट रोमांटिक फिल्म में भी आपको देखने को नहीं मिल सकती है। कम ही लोग जानते होंगे कि शिव जी ने दो शादी की थी। पार्वती जी पिछले जन्म में शिव जी की पहली पत्नी थी, तब उनका नाम सती था और वे प्रजापति दक्ष की बेटी थी।

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एक बार राजा दक्ष ने जानबूझकर अपने दामाद शिव को अपमानित किया था जिससे नाराज होकर माता सती हवनकुंड में कूद गई थी। सती के जाने के बाद भगवान शिव ने रुद्र अवतार लेकर प्रजापति दक्ष का सिर धर से अलग कर दिया था। बाद में शिव जी तपस्या में लीन हो गए थे। लेकिन यह प्रेम कहानी का अंत नहीं है।

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तपस्या से पार्वती ने पाया भोले को
शिव पार्वती की प्रेम कहानी का अब दूसरा भाग इंतजार कर रहा था। माता सती का जन्म पार्वती बनकर हिमालय में हुआ। इस जन्म में पार्वती जी शिव को पाने के लिए तपस्या जारी रखी। इस तप को देख कर देवों के देव महादेव को पिघलना पड़ा। शिव पार्वती का विवाह दुनिया भर में आज भी याद किया जाता है।

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शिवपुराण के मुताबित है शिव जी की बारात में देवी देवताओं के साथ भूत-प्रेत से लेकर तमाम पशु-पक्षियों और कीड़े-मकोड़े तक इस बारात का हिस्सा रहे थे। शिव पार्वती कि यह प्रेम कहानी प्यार का दिन महाशिवरात्रि, प्यार के इस मिलन को कहा गया है महाशिवरात्रि, जिसे हम महापर्व के रूप में हर साल मनाते हैं।   

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