Friday, Dec 06, 2019
this-muslim-family-performs-mrityubhoj-and-death-ceremony-of-hindu-person-by-hindu-rituals

इस मुस्लिम परिवार ने ब्राह्मण भोज के साथ की कर्मचारी की तेरहवीं

  • Updated on 6/27/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हिंदू और मुस्लिम (Hindu And Muslism) ये दो ऐसे धर्म हैं जो अपने धर्मों (Religion) का बखूबी से पालन करते हैं और एक दूसरे के धर्म से इन दोनों समुदायों (Communities) का कोई लेना देना नहीं हैं। लेकिन इंसानियत के नाते अगर कोई अपने धर्म के विरूध जाकर किसी की मदद करता है तो ये किसी महानता से कम नहीं हैं। एक ऐसी ही मिसाल पेश की है भदोही के रहने वाले एक मुस्लिम परिवार ने जिन्होंने 65 वर्षीय एक हिंदू कर्मचारी (Hindu Employee) की मौत के बाद उसका पूरे रिती-रिवाजों के साथ उसका दाह संस्कार किया है। साथ ही उसकी 13वीं भी की है।

जब असली शेर आ जाए तो बचने के लिए ये उठाएं कदम, देखें वीडियो

आखिर क्या है पूरी कहानी

मृत कर्मचारी (Dead Employee) की 13वीं के भोज के लिए बांटे गए कार्ड के नीचे शोकाकुल परिवार में इरफ़ान अहमद खान और फरीद खान का नाम छपे होने के साथ भवदीय में उनकी फर्म का नाम भी लिखा था। दरअसल, इरफ़ान अहमद खान और फरीद खान अपने एक कर्मचारी मुरारी लाल श्रीवास्तव के आत्मा की शांति के लिए 13वीं रखवा रहे हैं। आपको बता दें कि, 65 वर्षीय मुरारी लाल श्रीवास्तव को खेत में किसी ज़हरीले जानवर ने काट लिया था जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मुंबई के रहने वाले इस शख्स ने कम समय में ज्यादा कैचअप पीकर रचा इतिहास

इस मुस्लिम परिवार ने हिंदू रिती रिवाज से किया एक हिंदू कर्मचारी का अंतिम संस्कार

मृतक मुरारी लाल श्रीवास्तव के परिजन न होने की वजह से अस्पताल के कर्मचारियों ने उनके शव इरफ़ान अहमद खान (Irfan Ahmed Khan) और फरीद खान (Farid Khan) को सौंप दिया जिसके बाद इस मुस्लिम परिवार ने इंसानियत दिखाकर पूरे रिती रिवाज (Rituals) के साथ मृतक का अंतिम संस्कार किया। मुरारी लाल श्रीवास्तव (Murari lal shrivastav) की आत्मा की शांति के लिए 25 जून की रात शहर के हरिराम पुर (Hariram pur) में किया, जिसमें हिंदू-मुस्लिम (Hindu-Muslim) दोनों समुदाय के एक हज़ार से ज़्यादा लोग शामिल भी हुए।

इरफान और फरीद ने बताया इसे फर्ज

साथ ही हिंदू धर्म के मुताबिक तीजो भी कराया, और सिर भी मुंडवाया। इरफान और फरीद ने बताया कि मुरारी हमारे घर के सदस्य की तरह थे। पिछले 15 साल से हम लोगों के साथ जुड़े रहे और हमेशा घर के सदस्य की तरह हमें उनका समर्थन मिला। इरफान के मुताबिक मुरारी लाल श्रीवास्तव (Murari lal shrivastav) उनके घर के सदस्य की तरह थे और घर के बुज़ुर्ग भी थे। इसलिए हम लोगो ने वही किया जो हमारा फर्ज था और हमे करना चाहिए था।

तमिलनाडु के इस गांव में होती है किन्नरों की शादी, अगले ही दिन हो जाती है विधवा

हमने वही किया जो हर परिवार के सदस्य करते हैं। साथ ही कहा कि जब हम लोग 13वीं का कार्ड बांटने हर जगह गए तो सभी ने आश्चर्य जताया। उन्होनें आगे बताया कि 22 जून को ब्राह्मण भोज से पहले सिर मुंडवाने की रस्म की और 25 जून को ब्राह्मणों को भोजन कराने के लिए करीब एक हजार से ज्यादा हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोगों को आमंत्रित भी किया। मुस्लिम परिवार की इस इंसानियत के चलते वहां के लोगों में इसकी चर्चा हो रही है और ये वहां के चर्चा का विषय बन गया है।

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।

comments

.
.
.
.
.