Monday, Nov 18, 2019
this place is full of beautiful temples like ayodhya

अयोध्या जैसे खूबसूरत मंदिरों से भरी हुई हैं ये जगह

  • Updated on 11/9/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हमारा देश सदियों से आस्था का केंद्र माना जाता है, जहां आपको भगवान के बहुत से रूप देखने को मिलेंगे। मगर एक नाम आपको इस समय हर भारतीय की जुबान पर मिलेगा अयोध्या (Ayodhya)और श्रीराम। आज सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने सुबह तकरीबन 10:30 मीनट पर ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए सालो से विवादो में घीरी हुई अयोध्या जमीन को न्यास को दे दिया है। इस फैसले के आने के साथ ही अयोध्या में सुरक्षा व्यवस्था को काफी सख्त कर दिया गया है।

जब कभी भी प्राचीन तीर्थ स्थलों का उल्लेख किया जाता है, तो सबसे पहले अयोध्या का ही नाम आता है। अयोध्या कि स्थापना 22000 BC के आस पास की गई थी। राजा दशर्थ अयोध्या के 63वें शासक थे। भारत के प्राचिन ग्रंथो में भी अयोध्या को सर्वोपरी माना गया है। गरूडकुराण में इन तीर्थ स्थलो के नाम कुछ इस प्रकार वर्णित है- "अयोध्या मथुरा माया काशी काँची ह्य्वान्तिका, पुरी द्वारावती चैव  सप्तैता मोक्षदायिका'' भगवान श्रीराम की नगरी के रूप में प्रसिद्ध अयोध्या की खुबसुरती और इतिहास एक अभुतपूर्व एहसास दिलाते है। राम जन्मभुमी के अलावा अयोध्या में ऐसे ओर भी बहुत से मंदिर है जिनकी मान्यता, सौन्दर्य और इतिहास सभी को एक अलग एहसास दिलाता है। तो आईये जानते है कि कौन सी है वो जगहें जहां पर हम सैर के लिए जा सकते है...

स्वामीनारायण मंदिर

Swaminarayan Temple

अयोध्या से करीब चालीस किमी दुर गोंडा जिले में स्थित स्वामीनारायण (Swaminarayan Temple) का मंदिर बना हुआ है। यह मंदिर अपने सौंदर्य ओर अलौकिकता के लिए जाना जाता है। स्वामीनारायण का जन्म 1781 में उत्तर प्रदेश गोंडा जिला के छपिया में घनश्याम पांडे के रूप मे हुआ था। 1792 में उन्होने नीलकंठ वर्णी नाम को अपनाते हुए 11 वर्ष की आयु मे भारत भर में सात साल का तीर्थ यात्रा शुरू की, इस यात्रा के 9 वर्ष 11 महीनो के बाद वे 1799 के आसपास गुजरात राज्य में बस गए। 1800 में उन्हे अपने गुरू स्वामी गुरू रामानंद द्वारा उद्धव संप्रदाय में शामिल किया गया और उन्हे साहजनंद स्वामी का नाम दिया गया।1802 में उन्के गुरू ने अपनी मृत्यु से पहले उन्हे उद्धव संप्रदाय का नेतृत्व सौंप दिया। सहजनंद स्वामी ने एक सभा आयोजीत की और स्वामीनारायण मंत्र को पढ़ाया। इस बिंदु से वह स्वामीनारायण के रूप में प्रख्यात हो गए।उद्धव संप्रदाय को स्वामीनारायण संप्रदाय के रूप मे जाना जाता है।

श्रंगीऋषि आश्रम

Shringarishi Ashram

उत्तर प्रदेश (Uttar pradesh) के फैजाबाद जिले में अयोध्या से कुछ दुरी पर शेरवा घाट में अवस्थित श्रंगीऋषि आश्रम (Shringarishi Ashram) का एक ऐतिहासिक महत्तव है। रामायण ग्रंथ के अनुसार त्रेता युग में अयोध्या से कुछी दुरी चलने के बाद अगले प्रात:काल मुनि विश्वामित्र ने राम जी को बला और अति बला विद्या की शिक्षा दी थी। सरयू जी के तट पर रामजी ने सभी विद्याओं की माता कही जाने वाली ये विद्या प्राप्त की थी। इसके अलावा रामजी के जन्म के लिये हुए पुत्रेष्टि यज्ञ के ऋषि श्रृंगी को इसी क्षेत्र में ठहराया गया था जिसके निशान आज भी यहा चिन्हित है। यह भी माना जाता है कि उस समय भी यहाँ अनेक ऋषि रहते थे। उन्हीं के आश्रम में ऋषि विश्वामित्र ने श्रीराम लक्ष्मण के साथ विश्राम किया था।

हनुमानगढ़ी मंदिर 

Hanumangarhi TempleAshram

हनुमानगढ़ी मंदिर (Hanumangarhi Temple) सबसे प्रमुख हनुमान मंदिरो में से एक है। मान्यता है की यहा हनुमान जी सदैव वास करते है। इसलिए अयोध्या आकर भगवान राम से पहले भक्त हनुमान जी के दर्शन करते है। यह मंदिर राजकोट के सामने एक ऊंचे टीले पर स्थित है। जहां हनुमान जी का यह प्यारा सा मंदिर बना हुआ है।

भरतकुंड

bharatkund

वनवास से लौटे श्रीराम और भरत के मिलन के साक्षी भरतकुंड (Bharatkund) की एक एतिहासिक गाथा रही है।माना जाता है भगवान राम के वनवास के दौरान भरतजी ने उनकी खड़ाऊं रखकर यहीं 14 वर्ष तक तप किया था।  मान्यता है कि यही भगवान राम ने राजा दशरथ का श्राद्ध किया था।इसीलिए पितृपक्ष में देश भर से श्रद्धालु  यहां जुटते है। इस स्थल को भरत की तपोभूमि भी कहा जाता है।

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