अचला सप्तमी पर पूजा करने से बरसती है सूर्यदेव की कृपा, 7 साल बाद बन रहा दुर्लभ संयोग

  • Updated on 2/12/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। माघ माह के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को रथ सप्तमी या अचला सप्तमी कहते हैं। जो इस बार 12 फरवरी को यानी आज मनाई जाएगी। इस दिन भक्तों में काफी उल्लास देखने को मिलता है। कहा जाता है कि सुबह उठकर सूर्य नमस्कार करने से घर में सुख शांति आती हैं साथ ही मन की इच्छा भी पूरी होती है।

इस दिन भक्ति भाव से किए गए पूजन से प्रसन्न होकर प्रत्यक्ष देवता सूर्यदेव अपने भक्तों को आरोग्य का आशीर्वाद प्रदान करते हैं, इसलिए आरोग्य सप्तमी भी कहते हैं। ज्योतिष के मुताबिक माघ शुक्ल सप्तमी तिथि पर इस बार कृतिका व भरणी नक्षत्र का दुर्लभ संयोग बन रहा है। यह संयोग लगभग 7 साल बाद बना है।

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पुराणों के अनुसार अचला सप्तमी सूर्यदेव की उपासना का दिन होता है। उपासक अपनी उपासना का त्याग कर अन्न ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि इसी दिन से सूर्यदेव ने अपने प्रकाश सेस जगत को प्रकाशित किया। इस दिन को सूर्यदेव के जन्मदिन के रुप में भी मनाया जाता है।

क्या है प्रचलित कथा
शास्त्रों में सूर्य को आरोग्यदायक माना गया है और रोग मुक्ति के लिए सूर्य अराधना को उपाय के रुप में बताया गया है। माघ मास की शुक्ल पक्ष की सप्तमी से संबंधित कथा का उल्लेख पुराणों में मिलता है।

कथा के अनुसार भगवान कृष्ण के पुत्र शाम्ब को अपने शारीरिक बल और सौष्ठव पर अभिमान होने लग गया था। इसी अभिमान के कारण शाम्ब ने दुर्वसा ऋषि का अपमान कर दिया, ऋषि ने क्रोध में शाम्ब को कुष्ठ होने का श्राप दे दिया।

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भगवान कृष्ण को ऋषि के श्राप के बारे में पता चला तो उन्होनें अपने पुत्र को सूर्य की आराधना करने के लिए कहा। अपने पिता की आज्ञा का पालन करते हुए शाम्ब ने सूर्य आराधना शुरु कर दी जिसके फल के रुप में उसे सूर्य भगवान ने आशीर्वाद दिया।

शाम्ब के सभी कष्टों का अंत हो गया। इसी कारण से सप्तमी के दिन श्रद्धालु सूर्य की आराधना विधिवत करते हैं और सूर्य को प्रसन्न करके आरोग्य, पुत्र, धन और सुख की प्राप्ति करते हैं।

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ऐसे करें सूर्य अराधना

  • अचला सप्तमी के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करके उगते हुए सूर्य का दर्शन करें और साथ हीउन्हें ओम घृणि सूर्याय नम: का जाप करते हुए जल अर्पित करें।
  • जल अर्पित करते समय ध्यान दें कि लाल रोली और लाल फूल मिलाकर जल दें।
  • आसन में बैठकर पूर्व दिशा में मुख करके इस मंत्र का जाप 108 बार करें।

एहि सूर्य सहस्त्रांशो तेजोराशे जगत्पे।
अनुकम्पय  मां भक्त्या गृहणाध्र्य दिवाकर।।

  • ऐसा करने से आपको सूर्य देवता कि कृपा मिलेगी और साथ सुख समृद्धि और अच्छी सेहत का आपको आशीर्वाद मिलेगा।

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