Monday, Mar 25, 2019

शहीद की अंतिम यात्रा… हजारों आंखें ही नहीं, आसमां भी रो पड़ा चित्रेश को रुखसत करते-करते

  • Updated on 2/18/2019

देहरादून/ब्यूरो। सुबह करीब 8:30 बजे का वक्त। आसमान खुला है। दो दिन बाद चटख धूप खिली है। देहरादून की नेहरू कॉलोनी। करीब 500 मीटर लंबी सड़क ट्रैफिक के लिए बंद है। सड़क के एक छोर से दूसरे छोर तक कतारें लगी हैं। रस्सियों के सहारे अनुशासित कतारों में हर उम्र के लोग हैं। हजारों इस भीड़ की मुटि्ठयां हवा में लहरा रही हैं। लगातार नारे गूंज रहे हैं। शहीद चित्रेश बिष्ट अमर रहे। देश के शहीद अमर रहें। जब तक सूरज चांद रहेगा-चित्रेश तेरा नाम रहेगा। पाकिस्तान मुर्दाबाद…।

इस समय तक शहीद चित्रेश बिष्ट का ताबूत में रखा पार्थिव शरीर घर पहुंच चुका है। घर में महिलाओं के रोने की आवाज लगातार तेज हो रही है। पिता एसएस बिष्ट सन्न से हैं। मां रेखा बिष्ट लगभीग बेसुध हैं। आंगन में रखे ताबूत पर पुष्पांजलि-पुष्प चक्र अर्पित करने के लिए होड़ लगी है।

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करीब 9:00 बजे का वक्त। भीड़ लगातार बढ़ रही है। हर ओर से लोगों का रुख नेहरू कॉलोनी की उस सड़क की ओर है, जहां शहीद का घर है। इस भीड़ में बुजुर्ग हैं। महिलाएं हैं। युवा हैं और बच्चे भी। हर किसी के दिल में गम है। गम, एक हंसते-खेलते परिवार के नौजवान के अचानक यूं ही रुखसत हो जाने का। हर किसी की आंखों में गुस्सा है। बेहद आक्रोश।

आक्रोश, उस पाकिस्तान के प्रति जिसकी नर्सरी में पल-बढ़ रहा है आतंकवाद। गुस्सा, उन आतंकवादियों के खिलाफ जिनकी गोलियां-जिनके धमाके इस देश के जवानों को शहीद कर रहे हैं। इस आक्रोश की अभिव्यक्ति हो रही थी नारों की शक्ल में। कई ने हाथों में मेजर चित्रेश के चित्र पकड़े हुए हैं। मुस्कुराते चेहरे वाले चित्र। जिन हाथों में ये चित्र हैं, उनकी आंखें नम हैं। अधिकांश महिलाओं की आंखें नम हैं।  

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करीब साढ़े 9 बज चुके हैं। आसमान अब भी एकदम नीला है। धूप भी खिली है। सड़क के बीचों-बीच हलचल तेज हो गई है। पुलिस महानिदेशक अनिल रतूड़ी पहुंचे हैं। सेना के आला अफसर भी एक के बाद एक पहुंच रहे हैं। मंत्रियों-विधायकों, राजनीतिक दलों के नेता लगातार आ रहे हैं।

सभी अपने श्रद्धासुमन देश के इस शहीद को अर्पित करना चाह रहे हैं। भीड़ के बीच डीएम एसए मुरुगेशन खामोशी से खड़े व्यवस्थाओं पर नजर रखे हैं। एसएसपी निवेदिता कुकरेती व्यवस्था बनाने में जुटी हैं। पुलिस के शहर से लेकर प्रदेश स्तर तक के सभी अफसर यहां मौजूद हैं।

ठीक 9 बजकर 40 मिनट हुए हैं। तेजी से मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत की कार शहीद के घर के बाहर आकर रुकी है। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही हलचल तेज हो गई हैं। वे आगे बढ़े। शहीद के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र अर्पित किया। फिर झुककर शहीद को नमन किया। इस समय तक धूप गायब हो चुकी है। आसमान में बादलों का घना डेरा छा चुका है। मानों, कुदरत भी शहीद को गमगीन होकर अंतिम विदाई दे रही हो। गोरखा सैन्य टुकड़ी ने कतारबद्ध होकर अंतिम विदाई दी। जवानों ने शहीद के ताबूत में रखे पार्थिव शरीर को कंधों पर उठाया। धीमे-धीमे कदमों से वे आगे बढ़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र व अन्य भी कंधा देने आगे बढ़े। नारे लगातार तेज हो चुके हैं। पुष्पवर्षा हो रही है। दूर तक घरों की छतों पर एकत्र लोग पुष्प बरसा रहे हैं। शहीद के पिता एसएस बिष्ट पुलिस इंस्पेक्टर रहे हैं। अर्से तक देहरादून के कोतवाल भी रहे। मगर, बेटे के अचानक चले जाने से वे बेहद टूट चुके हैं। आखिर, धैर्य रखें भी तो कैसे। पिता की आंखों के आगे उनका लाडला रुखसत हो रहा है। चित्रेश के बड़े भाई भी कभी खामोशी ओढ़ रहे हैं। कभी फफक पड़ रहे हैं।

लगभग 10:15 बज चुके हैं। शहीद की पार्थिव देह सेना के ट्रक में रखी है। पीछे-पीछे जनसैलाब है। नारे लगातार तेज हैं। शहीद के सम्मान में धर्मपुर और नेहरू कॉलोनी के बाजार पूरी तरह बंद हैं। धीरे-धीरे शहीद की अंतिम यात्रा हरिद्वार रोड रिस्पना पुल की ओर बढ़ रही है। रिस्पना पुल पर भी लोग श्रद्धांजलि देने को उमड़े हैं। यहां श्रद्धांजलि के बाद अंतिम यात्रा सेना और पुलिस के वाहनों में हरिद्वार के लिए रवाना हो गई है।

पीछे-पीछे सैकड़ों लोग अन्य वाहनों में हैं। 60 किलोमीटर लंबे रास्ते पर जगह-जगह लोग पुष्पांजलि अर्पित करने के लिए जुटे हैं। इस बीच में बूंदाबांदी भी हो चुकी। मानों, आसमान ने नम आंखों से शहीद को अंतिम विदाई दी हो। करीब 11:30 बजते-बजते मौसम फिर खुल गया है। चटख धूप निकल गई है।

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