रसूखदार कैदियों की ऐशगाह बन चुकी है तिहाड़ जेल  

  • Updated on 1/14/2019

दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी तथा देश की सबसे सुरक्षित मानी जाने वाली तिहाड़ जेल देश के कुछ सबसे कुख्यात कैदियों से लेकर वक्त-वक्त पर अपने हाई प्रोफाइल कैदियों तक को लेकर भी सुर्खियों में रही है।

जनकपुरी से करीब 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित दिल्ली के सबसे पुराने गांवों में से एक तिहाड़ गांव में स्थित तिहाड़ जेल को एक ‘सुधार गृह’ के रूप में स्थापित किया गया है जिसका मकसद कैदियों को अपनी सजा पूरी करने के बाद समाज की मुख्यधारा में लौटने में मदद करना था। 

कैदियों के सुधार तथा कल्याण के लिए जेल में कुछेक अच्छे कार्य हुए हैं परंतु हाल के दिनों यह किसी न किसी गलत कारण से सुॢखयों में रहने लगी है।

एक ओर कई कैदी भेदभाव तथा मूलभूत सुविधाओं की कमी की शिकायतें तक करते रहे हैं तो दूसरी ओर हाल ही में तिहाड़ में बंद कैदियों की फोन पर बातचीत की लीक हुई रिकॉॄडग्स से खुलासा हुआ है कि किस तरह पैसे के दम पर दबंग तथा हाई प्रोफाइल कैदी तिहाड़ जेल में ऐश ही नहीं करते, हर सुख-सुविधा उनकी पहुंच में रहती है। 

9 हजार कैदियों की क्षमता के बावजूद वर्तमान में 15 हजार से अधिक कैदियों वाली इस जेल में 3 स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है जिसे सी.आर.पी.एफ., आई.टी.बी.पी. और तमिलनाडु पुलिस सम्भालती है परंतु इस सारे सुरक्षा तामझाम के बावजूद तिहाड़ जेल में बंद गिरोह सरगना, बड़े बदमाश तथा हाई प्रोफाइल कैदी दौलत, ताकत और पहुंच के बल पर पूरी ऐश कर रहे हैं। इन कैदियों को पैसे के दम पर हर वह चीज आसानी से हासिल हो जाती है जिनकी इन्हें इच्छा होती है। 

मोबाइल फोन की मदद से जेल में बंद होने के बावजूद वे वसूली तथा अन्य गैरकानूनी धंधों को अंजाम दे रहे हैं। जेल में वक्त-वक्त पर छापों के दौरान महंगे से महंगे मोबाइल फोन बरामद होते रहे हैं। फोन पर ही कैदी अपने घरवालों और दोस्तों ही नहीं, अपने गिरोह के सदस्यों से सम्पर्क में रह कर अपने सभी गोरखधंधों को बेरोक-टोक चलाए रखे हुए हैं। 

दूसरी ओर जेल में सजा काट चुके एक कैदी ने भी हैरान करने वाले खुलासे किए हैं कि इस हाई सिक्योरिटी जेल में क्या कुछ हो रहा है। उसके अनुसार पैसा हो तो जेल में सब कुछ मिल जाता है जिसमें स्मैक, गांजा, तम्बाकू तथा बीड़ी समेत सब कुछ शामिल है। इनके लिए कोड लैंग्वेज का इस्तेमाल किया जाता है। जैसे कि चरस को ‘कॉलर’, गांजा को ‘घास’ और तंबाकू को ‘ढक्कन’ कहते हैं। 

गौरतलब है कि कुछ महीने पहले एडिशनल सैशन जज रमेश कुमार ने जेल में छापा मारने के बाद हाईकोर्ट को सौंपी अपनी रिपोर्ट में भी तिहाड़ के कैदियों के बारे में कुछ ऐसे ही खुलासे किए थे। 

जेल के कम से कम 25 कैदियों ने शिकायत की थी कि ग्राहकों से धोखा करने के आरोपों में जेल भेजे गए रियल एस्टेट कम्पनी यूनिटेक के प्रबंध निदेशक संजय चन्द्रा और उनके भाई अजय अपनी हाई सिक्योरिटी कोठरी में पूरी ऐशो-आराम में रह रहे हैं और जेल अफसरों की मिलीभगत से उनके पास हर सुख-सुविधा की चीज पहुंच रही है। इस पर रमेश कुमार ने सितम्बर में तिहाड़ में छापेमारी करने के बाद दिल्ली हाईकोर्ट को रिपोर्ट सौंपी थी। 

इस रिपोर्ट में उन चीजों के बारे में विस्तार से बताया गया जो संजय और अजय के कमरे में छापे के दौरान पाई गई थीं। पता चला कि दोनों भाइयों के लिए जेल की कोठरी किसी लग्जरी होटल से कम नहीं जहां एल.ई.डी. टी.वी., सोफा, नारियल पानी, बोतलबंद पानी, सीङ्क्षलग फैन, कपड़ों से भरे बैग, अचार, घडियों सहित विभिन्न प्रकार की प्रतिबंधित चीजें मिलीं। उन्हें एक विशेष कमरे में कम्प्यूटर, प्रिंटर, इंटरनैट तथा मोबाइल फोन की सुविधाएं भी उपलब्ध करवाई गई थीं।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी केन्द्र सरकार को लताड़ लगाई थी कि क्या तिहाड़ जेल में शासन की कोई समानांतर व्यवस्था चल रही है? क्या जेल में बंद इन लोगों के पास विशेष अधिकार हैं?

ये लोग टी.वी. देख रहे हैं, वे सोफे पर बैठते हैं। भगवान जाने वे किस-किस चीज का आनंद ले रहे होंगे? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को जेल अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने को कहा था। 

परंतु जिस तरह के खुलासे तिहाड़ जेल के फोन कॉल्स की रिकॉॄडग्स से हुए हैं उनसे नहीं लगता कि तिहाड़ जेल में रसूखदार कैदियों की सुख-सुविधाओं तक पहुंच पर अभी तक किसी तरह की लगाम लगाई जा सकी है।  ---विजय कुमार

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