Friday, Dec 09, 2022
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tihar jail is also famous for factory and bakery, there are outlets in many places

फैक्ट्री और बेकरी के लिए भी मशहूर है तिहाड़ जेल, कई जगह हैं आउटलेट्स

  • Updated on 9/14/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। एनसीआरबी रिपोर्ट में दिल्ली की जेलों में कैदियों द्वारा बनाए जा रहे उत्पाद व तिहाड़ परिसर की एकमात्र महिला जेल में कैदियों के लिए चलाए जा रहे प्रोफेशनल कोर्स को महत्वपूर्ण बताया है। एनसीआरबी की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली की जेलों में कैदियों ने वर्ष 2021 में 19.32 करोड़ रुपए मूल्य के उत्पाद बनाए।

तिहाड़ जेल की फैक्ट्रियों में काम करने वाले सभी कैदी ही होते हैं। कैदी अपनी रुचि व क्षमता के अनुसार हुनरमंद बनें इसके लिए जेलों में कई तरह के व्यवसायिक कोर्स कराए जाते रहते हैं।  फैक्ट्री संचालन के जरूरी कुशल या अर्धकुशल मानव संसाधन उसे जेल में ही मिल जाते हैं। 

जेल नंबर-2 में है सबसे बड़ी फैक्ट्री और बेकरी

तिहाड़ परिसर स्थित जेल संख्या दो में सबसे बड़ी फैक्ट्री है। यहां कारपेंट्री व बेकरी हैं। इनमें सैकड़ों की तादाद में कैदी काम करते हैं। कारपेंट्री के तहत यहां कार्यालय या घेरलू उपयोग से जुड़े फर्नीचर बनाए जाते हैं। तिहाड़ की बेकरी भी प्रसिद्ध है। लेकिन बेकरी का अधिकांश सामान जेलों की कैंटीन में ही इस्तेमाल हो जाता है।

जेल संख्या आठ- नौ में कंबल बनाए जाते हैं। वहीं जेल संख्या चार में कागज व जूट से जुड़े सामान बनाए जाते हैं। जेल संख्या एक में हथकरघा इकाई कुछ समय पहले ही स्थापित की गई। यहां प्रसिद्ध माहेश्वरी साड़ी के निर्माण की यूनिट कुछ वर्ष पहले ही लगाई गई थी।

क्या-क्या बनता है...

तिहाड़ में सबसे पहले वर्ष 1960 में कागज निर्माण से जुड़ी फैक्ट्री खोली गई थी। तब से विस्तार होते-होते दिल्ली की विभिन्न जेलों में करीब 35 फैक्ट्रियां हैं। इन फैक्ट्रियों में परिधान से लेकर ईत्र तक का निर्माण किया जाता है। यहां की बेकरी, सिलाई-बुनाई, हथकरघा, लकड़ी से बने सामान, सरसों तेल, मसाले, पेंटिंग्स, कागज काफी प्रसिद्ध हैं।

यहां बने उत्पादों की ब्रांडिंग टीजे नाम से की जाती है। टीजे के दिल्ली में कई जगह पर आउटलेट हैं। इनमें दिल्ली के सभी जिला न्यायालय परिसर, हाई कोर्ट व पूसा परिसर शामिल हैं।


कैदियों को मिलती है  काम के अनुसार दिहाड़ी

जेल में एलईडी बल्ब निर्माण, गैराज मैकेनिक, प्लंबर, कारपेंट्री व अन्य तमाम विधाओं के लिए प्रशिक्षण दिया जाता है। अपनी विधा में कुशल कैदियों को जेल की फैक्ट्री में कार्य करने के एवज में 308, अर्धकुशल को 225 व अकुशल को 200 रुपए का भुगतान किया जाता है। कई ऐसे भी कैदी हैं, जो यहां अर्जित कमाई का एक बड़ा हिस्सा अपने परिवार को भेजते हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट में तिहाड़ की महिला जेल की रिपोर्ट में कहा गया है कि यहां बने फैशन लैब में जो बुटिक है, वहां कैदियों को अत्याधुनिक परिधान बनाने का प्रशिक्षण दिया जाता है। आभूषण डिजाइन भी यहां महिला कैदी सीखती हैं। इसके अलावा यहां कुंभकारी, अचार व नमकीन बनाना, पेंटिंग बनाने का भी प्रशिक्षण दिया जाता है।

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