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टाइम कैप्सूल: जब इंदिरा गांधी ने लालकिले में 32 फीट नीचे रखे थे साक्ष्य, मच गया था बड़ा बवाल

  • Updated on 7/28/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। अयोध्या में राममंदिर बनने जा रहा है, उससे पहले राम मंदिर भूमि पूजन का कार्यक्रम 5 अगस्त को होने जा रहा है। इस बीच खबर आई थी कि राम मंदिर की नींव में 200 फीट नीचे टाइम कैप्सूल रखा जाएगा, हालांकि इस खबर को फर्जी बताया गया है।

लेकिन इस खबर ने 15 अगस्त के दिन साल 1973 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के हाथों से लाल किले के 32 फीट नीचे टाइम कैप्सूल रखने की घटना की याद दिला दी। ये दावा किया जाता रहा है कि इस टाइम कैप्सूल में आजादी के बाद 25 वर्षों का घटनाक्रम सबूतों के साथ मौजूद था।

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घटना पर हुआ था विवाद
पीएम इंदिरा गांधी ने अतीत की अहम घटनाएं दर्ज करने का काम इंडियन काउंसिल ऑफ हिस्टोरिकल रिसर्च को सौंपा था। लेकिन तब सरकार के इस फैसले पर काफी विवाद हुआ था। इस सम्बंध में विपक्षी पार्टी ने आरोप लगाया था कि इस कैप्सूल में इंदिरा गांधी ने अपना और अपने परिवार का महिमामंडन किया है।

विवाद इतना बढ़ा कि साल 1970 में मोरारजी देसाई ने ये तक कह दिया कि वो कालपत्र को निकालकर देखना चाहते हैं कि उनमें क्या लिखा गया है और ऐसा हुआ भी। जब मोरारजी देसाई की सरकार बनी तक कालपत्र निकाला भी गया, लेकिन ये आज तक पता नहीं चल सका है कि उसमें लिखा क्या था। एक तरफ से उस कालपत्र का रहस्य आज तक बना हुआ है।

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टाइम कैप्सूल दबाने उद्देश्य
दरअसल, टाइम कैप्सूल को जमीन के नीचे दबाने का एकमात्र उद्देश्य भविष्य की पीढ़ियों को गुजरे हुए कल के बारे में बताया होता है। ताकि कोई मनगड़ंत न लिखे या बता सके अगर कोई गलतफहमी हो तो टाइम कैप्सूल को निकाल कर जानकारी ली जा सके।

बता दें, देश की कई इमारतों के नीच टाइम कैप्सूल रखे गये हैं। जैसे- लाल किला, आईआईटी कानपुर, चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय में भी टाइम कैप्सूल रखा गया है।

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टाइम कैप्सूल का इतिहास
बताते चले कि टाइम कैप्सूल का इतिहास सैकड़ों साल पुराना है। ये सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि  स्पेन में 30 नवंबर, साल 2017 को बर्गोस में करीब 400 साल पुराना टाइम कैप्सूल मिला था। जिसमें ईसा मसीह की मूर्ति के अंदर दस्तावेज थे, जिसमें साल 1777 के आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक जानकारियां दर्ज थीं।

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टाइम कैप्सूल खराब नहीं होता
टाइम कैप्सूल एक कंटेनर की शेप में होता है और ये खास सामग्री से बनाया जाता है। जिस पर किसी भी तरह केमिकल रिएक्शन नहीं होता। ये टाइम कैप्सूल हर तरह के मौसम और हर तरह की परिस्थितियों में ठीक रहता है। यह न तो कभी खराब होता है और न ही  सड़ता-गलता है।

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