Tuesday, Apr 07, 2020
tis hazari lawyers litigants with flowers

तीस हजारी: अब गांधीगीरी पर उतरे वकील, हड़ताल जारी और बांट रहें फूल

  • Updated on 11/8/2019

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। तीस हजारी अदालत (tis hazari Court) परिसर में 2 नवम्बर को दिल्ली पुलिस (Delhi Police) और वकीलों के बीच हुए हिंसक प्रदर्शन (Protest) को लेकर वीरवार को भी वकीलों ने काम नहीं किया। चौथे दिन भी दिल्ली (Delhi) की सभी 6 जिला अदालतों में कामकाज ठप है। सुप्रीम कोर्ट के वकील जीएस मणि समेत कुछ अन्य वकीलों ने वीरवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर कर मांग की है कि 5 नवम्बर को प्रदर्शन में शामिल पुलिस कर्मियों और अधिकारियों पर कार्रवाई व पुलिस मुख्यालय पर धरने में शामिल पुलिस कर्मियों पर मामला दर्ज करने की मांग की।

मीडिया को दिशा-निर्देश देने के लिए याचिका दायर
वकील पवन कुमार पटनायक और प्रकाश शर्मा ने वीरवार को दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर कर 2 नवम्बर को दिल्ली पुलिस और वकीलों के बीच हुई झड़प को लेकर निष्पक्ष रिपोॄटग की मांग की है। इससे पहले कुछ वकीलों ने High Court में याचिका दायर कर मीडिया रिपोर्टिंग पर बैन की मांग की, लेकिन शीर्ष अदालत ने उन्हें High Court जाने की बात कही।

वकीलों की हड़ताल का बड़ा असर- तीन दिन में एक लाख से ज्यादा मामले हुए पेंडिंग
 
सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी
दिल्ली के एक वकील विनोद यादव ने गृहमंत्रालय, दिल्ली के उपराज्यपाल और दिल्ली पुलिस कमिश्नर के पास सूचना के अधिकार के तहत याचिका डालकर पूछा है कि क्या 5 नवम्बर को दिल्ली पुलिस कर्मियों और अफसरों का प्रदर्शन कानून सम्मत था या नहीं और ऐसे अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ  क्या कार्रवाई की गई।

अदालतों में काम ठप, नारेबाजी 
तीस हजारी अदालत में वीरवार को भी बड़ी संख्या में वकील ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। व काम काज ठप रखा। साकेत अदालत में भी वीरवार को वकीलों ने जम कर प्रदर्शन करते हुए पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। पटियाला हाउस अदालत में भी  वकीलों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। कड़कडड़ूमा व द्वारका अदालत में कामकाज ठप रखा। 

सुरक्षा ना होने के कारण लोगों को नहीं जाने दिया अंदर
जिला बार एसोसिएशन की कोआर्डिनेशन कमेटी के महासचिव धीर सिंह ने कहा कि अदालतों में लोगों को सुरक्षा कारणों के चलते जाने से रोका गया क्योंकी पुलिस परिसर में मौजूद नहीं थी।

tis hazari lawyers Litigants with Flowers

वकीलों ने बांटे फूल
लगातार चार दिनों तक अदालतों में गतिरोध के बाद पटियाला हाउस कोर्ट के वकीलों ने वीरवार को गांधीगीरी का रास्ता अपनाया। कुछ वकीलों ने अदालत परिसर में आने वाले लोगों को गुलाब के फूल दिए। वहीं लोगों का कहना है कि पुलिस कर्मियों के मुख्यालय पर प्रदर्शन करने के बाद से वकील गांधीगीरी पर लौटे हैं। 

दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने खत लिखकर पुलिस वालों से की ये अपील

महिला डीसीपी को वकीलों की भीड़ से बचाकर निकाला गया
वकील और पुलिस के बीच विवाद के दौरान हुए हंगामे को शांत कराने पहुंची उत्तरी जिला डीसीपी मोनिका भारद्वाज को सैकड़ों वकीलों ने घेर लिया था। इसके बावजूद हिम्मत दिखाते हुए उन्होंने अंत समय तक भीड़ को समझाने की कोशिश की। पर जब माहौल बिगडऩे लगा तो मौजूद कुछ पुलिस कर्मियों ने वहां पहुंचकर भीड़ के बीच के बड़ी मशक्कत उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। 2 नवम्बर को तीस हजारी कोर्ट परिसर में जब यह घटना हुई तो उसका वीडियो भी वायरल हो गया। वीरवार को उस घटना का सीसीटीवी का फुटेज वायरल हो गया है। करीब डेढ़ मिनट के इस वीडियो में यह पूरी घटना दिख रही है। वायरल हो रहे वीडियो में 2 नवम्बर को हंगामा के बाद वकीलों द्वारा पुलिस के गाडिय़ों में लगाई गई आग की लपटें उठती दिख रही हैं। वहीं दूर उस स्थान पर पहले सैकड़ों वकील हंगामा करते दिख रहे हैं। तभी करीब आठ से दस पुलिसकर्मी उस भीड़ की ओर दौड़ते दिख रहे हैं। कुछ ही सेकेंड बाद वे पुलिस कर्मी किसी प्रकार भीड़ के बीच से उत्तरी जिला डीसीपी मोनिका भारद्वाज, जोकि हंगामा कर रहे वकीलों को समझाने गई थीं, को अपने घेरे में लेकर आते दिख रहे हैं। सादे लिबास में दो पुलिस कर्मी उन्हें अपने जैकेट से ढके हुए हैं। वहीं उन के पीछे करीब आधा दर्जन वकील, जिनमें से कुछ ने रुमाल से मुंह ढक रखा है, लगातार उन पर हमला कर रहे हैं। पीछे दिख रहा है कि भीड़ में शामिल वकील उन पुलिस कर्मियों की पिटाई करते दिख रहे हैं, जो डीसीपी को बचाने पहुंंचे थे। इस दौरान दोनों पुलिस कर्मी डीसीपी को वहां से सुरक्षित निकाल ले जाते हैं। 

पुलिस- वकील झड़प को लेकर कांग्रेस का तंज, कहा- मोदी है तो मुमकिन है

उन्नाव बलात्कार कांड का आरोपी सेंगर व 140 कैदी थे हवालात में 
वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प के समय उन्नाव बलात्कार कांड के एक आरोपी और निष्कासित भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर तीस हजारी अदालत में हवालात में बंद था। अधिकारियों ने कहा कि झड़प के समय सेंगर के अलावा तीस हजारी हवालात में लगभग 140 कैदी बंद थे। एक वकील ने बताया कि सेंगर को शनिवार की सुबह तिहाड़ जेल से यहां लाया गया थाए और सुनवाई के लिए सुबह साढ़े दस बजे अदालत के समक्ष पेश किया गया। सेंगर को जिला जज धर्मेश शर्मा की अदालत में पेश किया गया। अर्धसैनिक बल के पहुंचने के बाद उन्हें लगभग शाम सात बजे बाहर निकाला गया।  

सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों ने एलजी, पुलिस कमिश्नर को लिखा पत्र 
दिल्ली पुलिस के सेवानिवृत्त अधिकारियों ने उपराज्यपाल (एलजी) अनिल बैजल और दिल्ली पुलिस प्रमुख अमूल्य पटनायक को पत्र लिखकर कहा है कि वकीलों के साथ टकराव की हालिया घटना के बाद पुलिस बल के मनोबल को बढ़ाया जाना चाहिए। दिल्ली पुलिस सेवानिवृत्त राजपत्रित अधिकारी संघ (डीपीआरजीओए) ने बुधवार को एक बयान जारी कर कहा कि वह दिल्ली की जिला अदालतों में वकीलों और पुलिसर्किमयों के बीच ङ्क्षहसक झड़प की घटनाओं को लेकर बेहद चिंतित है। पत्र में कहा गया है, जांच पूरी होने तक किसी भी वकील के खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं किये जाने के निर्देश में संशोधन की आवश्यकता है। पुलिस अधिकारियों के निलंबन और तबादले को चुनौती दी जानी चाहिए क्योंकि दोषी वकीलों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई का आदेश नहीं दिया गया है।’’ 

 

comments

.
.
.
.
.