Wednesday, May 12, 2021
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प. बंगाल चुनावः शेष चरणों के लिए TMC और भाजपा ने बदली रणनीति

  • Updated on 4/21/2021

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। विधानसभा चुनाव में भाजपा और सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने एक दूसरे के खिलाफ जमकर बयानबाजी की और आरोप- प्रत्यारोप लगाए लेकिन अब आखिरी के तीन चरणों के मतदान के मद्देनजर दोनों ही दलों को अपनी रणनीति बदलने को मजबूर होना पड़ा है।

तृणमूल कांग्रेस ने ‘बांग्ला निजेर मेये के चाय’ (बंगाल अपनी बेटी को चाहता है) और ‘दुआरे सोरकार’ (सरकार आपके द्वार) के नारे के साथ से आठ चरणों के इस चुनाव में अपने अभियान की शुरुआत की थी लेकिन अब उसने रणनीति बदलते हुए इसके केंद्र में कोविड-19 महामारी को ला दिया है। कोविड-19 की ताजा लहर और रोजाना आ रहे डराने वाले आंकड़ों का हवाला देकर वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर सीधे हमले कर रही हैं और आरोप लगा रही है कि उन्होंने इसके मद्देनजर कोई तैयारी नहीं की।

मुख्यमंत्री पश्चिम बंगाल में कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रही हैं और कह रही बड़ी संख्या में उसके ‘बाहरी नेताओं’ के आने से राज्य में यह स्थिति पैदा हुई है। भाजपा अब कोविड प्रबंधन के आरोपों के मद्देनजर बचाव की मुद्रा में आ गई है।

कलकत्ता शोध समूह के निदेशक और प्रसिद्ध राजनीतिक विज्ञानी रणबीर समाद्दार ने कहा, ‘बनर्जी के अभियान में जीवंतता थी, वहीं भ्रष्टाचार के मुद्दों पर तृणमूल कांग्रेस को घेरेते हुए विकास करने का भाजपा का अभियान बेहतर तरीके से क्रियान्वित किया गया।

भाजपा ने बंगाली समाज की खामियों का भी बखूबी इस्तेमाल किया।’ उन्होंने कहा, ‘अब ममता बनर्जी को यह समझ आया है कि इतने लंबे चुनावी अभियान में सिर्फ विकास और भाषा की बदौलत बढ़त नहीं बनाई जा सकती है। उनके सलाहकारों को कोविड-19 प्रबंधन का मुद्दा पहले से रेखांकित करना था।’ 

चुनाव के बीच कार्यक्रम में कटौती की मांग करना असंवैधानिक

कोविड-19 के बढ़ते प्रकोप की रोकथाम के लिए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों के शेष कार्यक्रम में कटौती को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मांग को भाजपा महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने मंगलवार को असंवैधानिक करार दिया। उन्होंने यह भी कहा कि तृणमूल कांग्रेस प्रमुख में चुनावों के तकनीकी ज्ञान की कमी है।

गौरतलब है कि बनर्जी ने सोमवार को निर्वाचन आयोग से अनुरोध किया था कि वह राज्य में पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार विधानसभा चुनाव संपन्न कराने के अपने फैसले पर पुर्निवचार करे। उन्होंने इस सिलसिले में कहा था कि राज्य में आखिरी तीन चरणों का मतदान एक बार में या दो दिन में कराने से कोविड-19 का प्रकोप एक हद तक कम हो जाएगा। विजयवर्गीय, भाजपा संगठन में पश्चिम बंगाल मामलों के प्रभारी महासचिव हैं।

चुनावी सरर्गिमयों के बीच अपने गृहनगर इंदौर पहुंचे भाजपा महासचिव ने कहा, ‘बनर्जी में (चुनावों के) तकनीकी ज्ञान की कमी है। निर्वाचन आयोग जब एक बार चुनाव कार्यक्रम घोषित कर देता है, तो तमाम चुनावी प्रक्रिया की अवधि पहले से तय होती है और उम्मीदवारों को प्रचार का निर्धारित समय मिलता है।’ उन्होंने कहा, ‘आप किसी उम्मीदवार के प्रचार के समय को आखिर कैसे कम कर सकते हैं? चुनाव आयोग इस प्रकार का कोई फैसला कर भी नहीं सकता क्योंकि यह असंवैधानिक होगा।

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