Wednesday, Jul 24, 2019

वरिष्ठ नेताओं की कृपा दृष्टि पाने के लिए  चापलूसी की हदें लांघते हमारे नेता 

  • Updated on 6/16/2019

चढ़ते सूरज को सभी सलाम करते हैं और राजनीति में तो इसके उदाहरण अक्सर देखने को मिलते हैं। यही कारण है कि 23 मई को चुनाव परिणाम आने के बाद विभिन्न नेताओं द्वारा अपने वरिष्ठïों की तारीफ के पुल बांधने की एक बाढ़ सी आ गई है। 
नरेंद्र मोदी की जीत के बाद पार्टी के सभी नेताओं द्वारा उनकी तारीफ की जा रही है और कुछ नेता तो तारीफ करते समय इतना आगे बढ़ गए कि यह भी भूल गए कि वे क्या बोल रहे हैं :

27 मई को राजस्थान भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष ज्ञान देव आहूजा ने श्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा करते हुए कहा कि ‘‘मोदी जी एक दिव्य शक्ति हैं जो भगवान श्री कृष्ण के स्वरूप और भगवान विष्णु के अवतार हैं।’’

02 जून को भोजपुरी फिल्मों के अभिनेता और कांग्रेस से भाजपा में आए नवनिर्वाचित सांसद रवि किशन ने कहा कि ‘‘योगी आदित्यनाथ मेरे भगवान कृष्ण हैं और मैं उनका अर्जुन हूं।’’

और अब 13 जून को आंध्र प्रदेश विधानसभा में वाई.एस.आर. कांग्रेस के एक नवनिर्वाचित विधायक कोटाम रैड्डïी श्रीधर रैड्डïïी ने चापलूसी की इंतहा करते हुए ‘ईश्वर के नाम पर’ शपथ लेने की बजाय मुख्यमंत्री जगन मोहन रैड्डïी के नाम पर शपथ लेकर उनके प्रति अपनी वफादारी का प्रकटावा करने की कोशिश की व कहा, ‘‘मुख्यमंत्री जगन मोहन रैड्डïी ही मेरे भगवान हैं।’’ 

परंतु प्रोटेम स्पीकर सबांगी अपाला नायडू ने इसे स्वीकार नहीं किया और   उन्हें दोबारा शपथ लेने का आदेश दिया जिसके बाद श्रीधर को दोबारा ईश्वर के नाम पर ही शपथ लेनी पड़ी।

चापलूसी की उक्त मिसालें सिद्ध करती हैं कि प्रभावशाली पदों पर पहुंच जाने के बाद भी हमारे नेतागण वरिष्ठï नेताओं की चापलूसी की सारी हदें लांघ जाने में भी संकोच नहीं करते ताकि उन पर वरिष्ठï नेताओं की कृपा दृष्टिï बनी रहे ।

 

    —विजय कुमार 
 

Hindi News से जुड़े अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करें।हर पल अपडेट रहने के लिए NT APP डाउनलोड करें। ANDROID लिंक और iOS लिंक।
comments

.
.
.
.
.