Monday, Feb 06, 2023
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पारसनाथ पर्वत बचाने को लेकर जैन समाज ने लालकिला से राजघाट तक निकाला पैदल मार्च

  • Updated on 8/2/2022

नई दिल्ली। टीम डिजिटल। विश्व जैन संगठन द्वारा सर्वोच्च जैन तीर्थ पारसनाथ पर्वत को बिना जैन समाज की सहमति के वन्य जीव अभ्यारण्य का एक भाग घोषित कर पर्यटन स्थल बनाकर तीर्थ की स्वतंत्र पहचान व पवित्रता नष्ट करने वाली अधिसूचना को रद्द करवाने के लिए प्रसिद्ध जैन लाल मंदिर, लालकिला से राजघाट तक विशाल पैदल मार्च निकाला गया। उनकी मांग थी कि पारसनाथ पर्वत को जैन तीर्थस्थल घोषित किया जाए।
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जैन समाज से वन्यजीव अभ्यारण्य बनाने की अनुमति नहीं ली गई : संजय जैन
विशाल पैदल मार्च के संयोजक विश्व जैन संगठन के अध्यक्ष संजय जैन ने बताया कि झारखण्ड के गिरिडिह जिले के सबसे ऊंचे पहाड़ पारसनाथ पर्वत से 24 जैन तीर्थंकरों में से बीस ने मोक्ष प्राप्त किया था। केंद्रीय वन मंत्रालय द्वारा 2 अगस्त 2019 को झारखंड सरकार की अनुसंशा पर बिना जैन समाज की सहमति लिए अंतिम अधिसूचना से पूर्व लोगो की आपत्ति या सुझाव व प्रकाशन के बिना सर्वोच्च जैन तीर्थ को वन्य जीव अभ्यारण्य का एक भाग घोषित कर इको सेंसिटिव जोन में पर्यावरण पर्यटन, धार्मिक पर्यटन का नाम दे दिया गया है। हम इस अधिसूचना को रद्द करने की मांग कर रहे हैं। संगठन द्वारा केंद्र व झारखंड सरकार को दिए निवेदनों पर कोई कार्यवाही न किए जाने के विरोध में 2 अगस्त को काला दिवस के रूप में मनाते हुए विशाल पैदल मार्च का आयोजन किया गया।  इस दौरान संगठन के उपाध्यक्ष यश जैन, संरक्षक राजेश जैन, महामंत्री सुदीप जैन, मंत्री मनीष जैन, राजीव जैन, विपिन जैन और महिला प्रकोष्ठ की संयोजिका रूचि जैन, प्रचारमंत्री प्रदीप जैन और नीरु जैन भी मौजूद रहे।

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