Sunday, Mar 29, 2020
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मोदी सरकार के 5 सालः आज ही के दिन लहराया था भगवा, परास्त हुए थे सियासत के महारथी

  • Updated on 5/16/2019

नई दिल्ली/अमरदीप शर्मा। पांच साल पहले आज ही के दिन 16 मई को 2014 लोकसभा चुनावों के नतीजे आए थे। जिसमें पूरा देश भगवामय हो गया था। चारो और मोदी-मोदी के नाम का शोर गूंज रहा था। सियासी पंडितों के सभी समीकरण ध्वस्त हो गए थे। विपक्ष के दावों की हवा निकल गई थी। करीब 3 दशक बाद देश में पूर्ण बहुमत की सरकार बनने के लिए मुहर लग गई थी। उस दौरान सभी पार्टियां मोदी लहर के नीचे दबी हई नजर आईं। इसके साथ ही हिंदी भाषी राज्यों में बीजेपी का जमकर डंका बजा। 

साल 1984 को बाद ये पहला मौका था जब देश में कोई पार्टी पूर्ण बहुमत के साथ देश की सत्ता पर काबिज होने जा रही हो। भ्रष्टाचार, गरीबी, बेरोजगारी, कालाधन जैसे तमाम मुद्दों कों लेकर सरकार के खिलाफ आवाज उठा कर बीजेपी ने नई राजनीति का उदय किया। इसके बाद पूरा देश भगवा रंग में रंग गया। तत्कालीन सत्ताधारी पार्टी पर तमाम तरह के आरोप लगते रहे। इन सब के बीच राजनीति के तमाम दिग्गजों का अनुमान था कि इस बार एनडीए की सरकार बन सकती है। हालांकि इस बात का किसी को अंदाजा किसी को नहीं था कि बीजेपी अकेले दम पर सरकार बना पाएगी। 

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 सोलहवीं लोकसभा के लिए देश भर में 7 अप्रैल से 12 मई 2014 तक कुल 9 चरणों में चुनाव हुए। जिसके नतीजे 16 मई को आए। नजीतों के साथ ही देश भगवामय हो गया था। दिलचस्प बात ये है कि अब के इतिहास में ये सबसे लंबे समय तक चलने वाला चुनाव था। इस बीच मतदाताओं में भी काफी जोश देखने को मिला। देश भर में सत्ता परिवर्तन की लहर दिखी। जिसके चलते लोगों मे मतदान में जमकर हिस्सा लिया और 66.38 प्रतिशत लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया। 

विपक्ष के लायक तक नहीं पहुंची कांग्रेस...

जब 16 मई को नजीते सामने आए तो सभी राजनीतिक पंडितों की आखें खुली की खुली रह गईं। 282 सीटों के साथ भारतीय जनता पार्टी देश में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर बनकर उभरी। इसके साथ एनडीए के सीटों का आंकड़ा 336 पर पहुंचा। इसके अलावा कांग्रेस को बेहद बड़ी हार का सामना करना पड़ा। लंबे समय तक देश की सत्ता पर काबिज रहने वाली कांग्रेसा पार्टी महज 44 सीटों पर सिमट कर रह गई। 

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खास बात तो ये है कि अगर पूरे यूपीए गठबंधन की बात करों तो वे कुल मिलकर 59 सीटों तक ही पहुंच पाया। लिहाजा वे संसद भवन में मुख्य विपक्षी पार्टी के तौर पर भी नहीं बन पाई। बता दें कि संसद में विपक्षी दल की हैसियत रखने के लिए किसी भी पार्टी को सीटों की कुल संख्या के 10 प्रतिशत यानि 54 सीटों का होना जरुरी है। 

अमेरिका को झुकना पड़ा...

देश की जनता ने जब गुजरात के सीएम रहे नरेंद्र मोदी को चुनकर पीएम की कुर्सी पर बैठाया तो अमेरिका को भी अपने फैसलों पर सोचने के लिए मजबूर होना पड़ा। दरअसल गोधरा कांड में कथित तौर पर लिप्त होने के आरोपों पर अमेरिका ने पीएम मोदी को वीजा देने से मना कर दिया था, लेकिन भारत के लोकतंत्र की ताकत के सामने झुकना पड़ा और पीएम मोदी के लिए अमेरिका के वाइट हाउस मे स्वागत के लिए अपने दरवाजे खोल दिए। 

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2014 में  किसको  कितनी सीटें

साल 2014 में बीजेपी को सबसे ज्यादा 282 सीटें मिली थीं। इसके अलावा कांग्रेस को 44, एआईएडीएमके(अन्नाद्रमुक) को 37,  ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस को 34, ओडिशा में बीजद को 20 सीट, महाराष्ट्र में शिवसेना को 18, तेलंगाना में तेलंगाना राष्ट्रीय समिति(टीआरएस) को 11 सीटें, सीपीआई(एम) के खाते में 9 और समाजवादी पार्टी ने 5 सीटों पर जीत हांसिल की थी। 

विभिन्न दलों का वोट प्रतिशत

बीजेपी-31.1 प्रतिशत
कांग्रेस-19.3
बसपा-4.1
तृणमूल कांग्रेस-3.8
समाजवादी पार्टी 3.4 प्रतिशत
अन्नाद्रमुक 3.3
सीपीआई(एम) 3.3 प्रतिशत
अन्य 31.8

 

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