Saturday, Jan 22, 2022
-->
today congress will march against farmers laws sohsnt

राहुल गांधी ने की राष्ट्रपति कोविंद से मुलाकात, कृषि कानूनों को वापस लेने की रखी मांग

  • Updated on 12/24/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। केंद्र की मोदी सरकार (Modi Govt) द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के विरोध में किसानों का आंदोलन आज 29वें दिन भी लगातार जारी है। सरकार और किसानों के बीच 5वें दौर की बैठक के बाद भी कोई हल नहीं निकल सका है। ऐसे में नए कानूनों को लेकर केंद्र पर पहले से हमलावर कांग्रेस (Congress) ने एक बार फिर सरकार को घेरने की तैयारी कर ली है। इस क्रम में आज राहुल गांधी (Rahul Gandhi) राष्ट्रपति भवन तक मार्च करेंगे वाले थे, फिलहाल, उन्हें इस मार्च की इजाजत नहीं दी गई है।  

कृषि कानूनों के खिलाफ 40 से ज्यादा किसान यूनियनों को पक्षकार बनाने की गुजारिश

कांग्रेस ने केंद्र से की कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग
बता दें कि आज कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में पार्टी के एक प्रतिनिधिमंडल ने  राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मुलाकात की और केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को संसद का संयुक्त सत्र बुलाना चाहिए और इन कानूनों को वापस लेना चाहिए।

शताब्दी समारोह में PM मोदी बोले- विश्व भारती के लिए गुरुदेव का विजन आत्मनिर्भर भारत का सार

किसान विरोधी हैं कानून- राहुल
उन्होंने संवाददाताओं से कहा, 'राष्ट्रपति से हमने कहा कि ये कानून किसान विरोधी हैं और इससे मजदूरों और किसानों का बहुत नुकसान होने जा रहा है तथा किसान इन कानूनों के खिलाफ खड़ा है।' गांधी ने कहा, 'प्रधानमंत्री को यह नहीं सोचना चाहिए कि ये मजदूर और किसान वापस चले जाएंगे। जब तक ये कानून वापस नहीं लिए जाते तब तक ये किसान पीछे नहीं हटेंगे। उन्होंने कहा, 'संयुक्त सत्र बुलाइए और कानूनों को वापस लीजिए।'   

कांग्रेस नेता ने दावा किया कि अगर प्रधानमंत्री ने कानून वापस नहीं लिए तो सिर्फ भाजपा और आरएसएस को नहीं, बल्कि देश को नुकसान होने जा रहा है। उन्होंने कहा कि दो करोड़ हस्ताक्षरों के साथ राष्ट्रपति को ज्ञापन दिया गया है।  

किसान विरोधी कृषि कानून के खिलाफ कांग्रेस ने किया सरकार जगाओ कार्यक्रम

किसानों की सरकार से नया ठोस प्रस्ताव लाने की मांग 
उधर, प्रदर्शनकारी किसान संघों ने गेंद सरकार के पाले में होने की जिक्र करते हुए बुधवार को उससे कहा कि वह बातचीत फिर से शुरू करने के लिये नया ठोस प्रस्ताव लेकर आए, वहीं कृषि मंत्री ने कहा कि समाधान तक पहुंचने का संवाद ही एक मात्र रास्ता है और सरकार कृषि क्षेत्र में सुधार के लिये प्रतिबद्ध है। तीन नए कृषि कानूनों को निरस्त किये जाने की मांग को लेकर सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच गतिरोध खत्म होने की कोई संभावना नजर नहीं आने के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को छह राज्यों के किसानों के साथ बातचीत करेंगे और इस दौरान किसान केंद्र द्वारा की गई विभिन्न पहलों को लेकर अपने अनुभव साझा करेंगे।

आंदोलनरत किसानों की ना के बावजूद मोदी सरकार को है बात बनने की उम्मीद 

विपक्षी दलों ने सरकार पर लगाए ये आरोप
कृषि कानूनों में संशोधन के प्रस्ताव को खारिज कर चुके किसान नेताओं ने कहा कि उन्हें केंद्र के ‘खुले दिल’ से वार्ता के लिये आगे आने का इंतजार है और 'अगर सरकार एक कदम आगे बढ़ाएगी तो किसान दो कदम बढ़ेंगे।' बीते बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह की जयंती और ‘किसान दिवस’ था तथा कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना जैसे विपक्षी दलों और वाम दलों ने इस मौके पर सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार की रुचि सिर्फ कॉरपोरेट को फायदा पहुंचाने में है जबकि किसान सड़कों पर प्रदर्शन करने के लिये मजबूर हैं।

ये भी पढ़ें-

comments

.
.
.
.
.