Monday, Sep 20, 2021
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tokyo olympics: vandana kataria did not leave the preparation camp after death of father musrnt

Tokyo Olypics: पिता की मौत के बाद भी वंदना कटारिया ने नहीं छोड़ा था कैंप

  • Updated on 7/31/2021

हरिद्वार/योगेश योगी। ओलंपिक में हैट्रिक लगाने वाली भारत की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी वंदना के पिता की मौत  ओलंपिक की तैयारियों के दौरान हो गई थी। लेकिन उसने कैंप को बीच में नहीं छोड़ा।
वंदना का परिवार हरिद्वार के रोशनाबाद में रहता है। बी एच ई एल से रिटायर होने के बाद वंदना के पिता दूध का व्यवसाय करते थे। इसी साल मई के महीने में वंदना के पिता नाहर सिंह की मृत्यु हो गई थी। उस समय वंदना ओलंपिक की तैयारियों में जुटी थी। पिता की मृत्यु के बावजूद वंदना ने  तैयारी कैंप को नहीं छोड़ा था। वंदना अपने पिता के अंतिम दर्शन भी नहीं कर सकी थी। मां सोरण देवी का कहना है कि वंदना ने गोल की हैट्रिक कर अपने पिताजी को श्रद्धांजलि दी है।

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परिवार ने सहे थे लोगों के ताने
आज भले ही लोग वंदना की उपलब्धियां पर खुशियां मना रहे हों और बधाई देने उनके घर जा। रहे हो लेकिन एक समय वह भी था जब वंदना के परिवार ने लोगों के ताने से सहे थे।

वंदना ने अपने कैरियर की शुरुआत रोशनाबाद से की थी।वंदना ने हॉकी खेलना शुरू किया तो उसके परिवार को लोगों की आलोचना का शिकार बनना पड़ा लेकिन पिता नाहर सिंह और माता सोरण देवी ने बेटी के सपने को साकार करने के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगा दिया।

पहले खेलती थी खो खो
 वंदना कटारिया स्कूली दिनों में खो-खो खेलती थी। एक दिन जब वह स्पोर्ट्स स्टेडियम रोशनाबाद में खो-खो प्रतियोगिता में भाग ले रही थी, तभी एक क्रीडा अधिकारी की नजर उस पर पड़ी।वह वंदना की चुस्ती फुर्ती से प्रभावित हुए और उसे हाकी खेलने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद वंदना ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वंदना ने  2006 में जूनियर अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में भाग किया। जर्मनी में हुए जूनियर महिला विश्व कप में वंदना की टीम ने कांस्य पदक जीता था। वंदना भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं।

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