Wednesday, Aug 04, 2021
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कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 9.45 लाख करोड़ रुपए रहा: सी.बी.डी.टी.

  • Updated on 4/10/2021

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। वित्त वर्ष 2020-21 में कुल प्रत्यक्ष कर संग्रह 9.45 लाख करोड़ रुपए रहा, जो बजट में संशोधित अनुमान से 5 प्रतिशत अधिक है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सी.बी.डी.टी.) के अध्यक्ष पी.सी. मोदी ने कहा कि आयकर विभाग ने वित्त वर्ष 2020-21 में पर्याप्त रिफंड जारी करने के बावजूद संशोधित अनुमानों से अधिक कर संग्रह किया है। रिफंड जारी करने में इससे पिछले साल के मुकाबले 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वित्त मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि कोविड-19 महामारी की चुनौतियों के बावजूद शुद्ध प्रत्यक्ष कर संग्रह में उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली। पिछले वित्त वर्ष में सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 12.06 लाख करोड़ रुपए था। रिफंड के रूप में 2.61 लाख करोड़ रुपए देने के बाद शुद्ध सकल प्रत्यक्ष कर संग्रह 9.45 लाख करोड़ रुपए रहा।

वित्त वर्ष के दौरान शुद्ध कॉर्पोरेट कर संग्रह 4.57 लाख करोड़ रुपए था, जबकि शुद्ध व्यक्तिगत आयकर 4.71 लाख करोड़ रुपए रहा। इसके अलावा 16,927 करोड़ रुपए प्रतिभूति लेनदेन कर (एस.टी.टी.) से मिले।  आम बजट के संशोधित अनुमानों के अनुसार 2020-21 के लिए प्रत्यक्ष कर संग्रह के रूप में 9.05 लाख करोड़ रुपए का लक्ष्य तय किया गया था। 

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संशोधित अनुमानों से 5 प्रतिशत अधिक
इस तरह कर संग्रह संशोधित अनुमानों से 5 प्रतिशत अधिक रहा, लेकिन 2019-20 में तय किए गए लक्ष्य से 10 प्रतिशत कम रहा। मोदी ने कहा कि विभाग ने कागजी कार्रवाई के बोझ को कम करने और बेहतर करदाता सेवाएं मुहैया कराने के लिए कई उपाय किए हैं, जिसका असर पिछले वित्त वर्ष के कर संग्रह में दिखाई दिया। 

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ईमानदार-पारदर्शी कराधान को लागू करना उद्देश्य
मोदी ने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि पूरी प्रणाली अधिक निष्पक्ष और पारदर्शी हो। मूल विषय जिस पर हम काम कर रहे हैं, वह है ईमानदार-पारदर्शी कराधान को लागू करना... जो मुझे कठिन समय के बावजूद भरोसा देता है कि हम वर्तमान लक्ष्यों को भी पूरा कर पाएंगे।’’ उन्होंने आगे कहा कि विवाद से विश्वास योजना के तहत अब तक लगभग 54,000 करोड़ रुपए का समाधान किया गया है। इस योजना के तहत भुगतान की अंतिम तिथि 30 अप्रैल है।

बता दें कि अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) ने मंगलवार को 2021 में भारत की आॢथक वृद्धि दर तेजी से बढ़कर 12.5 प्रतिशत पर पहुंचने का अनुमान लगाया है। यह वृद्धि दर चीन के मुकाबले भी अधिक होगी। हालांकि, चीन एकमात्र बड़ी अर्थव्यवस्था रहा है, जिसकी वृद्धि दर 2020 में महामारी के दौरान भी सकारात्मक रही। आईएमएफ ने अपने सालाना वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में कहा कि 2022 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत के आसपास आ जायेगी। मुद्राकोष ने विश्वबैंक के साथ होने वाली सालाना बैठक से पहले यह रिपोर्ट जारी की है। 

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