Friday, May 14, 2021
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TPDDL ने यूरोपियन कमीशन के साथ किया करार, आपदा के समय भी नहीं रुकेगी बिजली आपूर्ति

  • Updated on 3/16/2019

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। राजधानी दिल्ली को पारंपरिक बिजली उपलब्ध कराने वाली नॉदर्न ग्रिड या अन्य ग्रिडों से अगर बिजली आपूर्ति ठप्प हो जाती है तो राजधानी के कई इलाकों में इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।

इन इलाकों में स्मार्ट ग्रिड डेमॉन्स्ट्रेटर तकनीकी से बिजली की आपूर्ति सुचारू रहेगी। बिजली कंपनी इस स्मार्ट ग्रिड में सोलर पावर, विंड पावर और बैटरी से मिलने वाली बिजली को स्टोर कर रखा जायेगा, जिसे आपदा के समय इस्तेमाल किया जाऐगा। 

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उत्तर व उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में बिजली वितरण करने वाली टाटा पावर दिल्ली डिस्ट्रीब्यूशन लिमिटेड (टीपीडीडीएल) ने शुक्रवार को इसके लिए यूरोपियन देशों के एक साझा कमीशन के साथ समझौता किया। प्रयोगिक तौर पर टीपीडीडीएल सिविल लाइन क्षेत्र में 800 बिजली उपभोक्ताओं के बीच इस तकनीक को इस्तेमाल कर रही है।

दो महीने तक यह प्रयोग सफल रहता है तो इसे पूरे टीपीडीडीएल वितरण क्षेत्र में लागू करने के लिए 10 मेगावाट बिजली स्मार्ट ग्रिड में हमेशा उपलब्ध रहेगा। टीपीडीडीएल इस परियोजना को यूरोपीयन कमीशन द्वारा दिए गए  7.9 मिलियन यूरो  अनुदान की राशि से शुरू करने जा रहा है।

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परियोजना का कुल बजट है 10.7 मिलियन यूरो है। टीपीडीडीएल के सीईओ संजय बांगा ने यूरोपियन कमीशन के सदस्य कंपनियों के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए। सीईओ बांगा ने बताया कि इस परियोजना को मई 2019 में शुरू करने की योजना बनाई गई है और इसके अक्टूबर 2022 तक पूरा होने की उम्मीद है। 

7400 मेगावाट के पार जा सकती है बिजली की मांग 
 दिल्ली में इस वर्ष गर्मियों में  बिजली की अधिकतम मांग 7400 मेगावाट के आंकड़े को पार कर सकती है। पिछले साल दिल्ली की अधिकतम बिजली मांग 7016 मेगावाट थी। निजी बिजली कंपनियों ने इस वर्ष मांग से ज्यादा बिजली बैंकिंग करने का दावा किया है।

पिछले साल गर्मियों में बीआरपीएल इलाके में बिजली की पीक डिमांड 3081 मेगावाट, बीवाईपीएल क्षेत्र में 1561 मेगावाट तथा टाटा पावर डीडीएल क्षेत्र में 1960 मेगावाट थी। इस साल गर्मियों में बीआरपीएल इलाके में पीक डिमांड 3205 मेगावाट, बीवाईपीएल इलाके में 1642 मेगावाट तथा टाटा पावर डीडीएल क्षेत्र में 2100 मेगावाट के पार पहुंचने की उम्मीद है।

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दिल्ली में हर साल काफी तेज गति से बिजली की मांग बढ़ रही है। मुंबई और चेन्नई  के अधिकतम मांग को अगर मिला दें, तो भी वह दिल्ली की अधिकतम मांग से कम है।  बीएसईएस के अनुसार ने बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए इसकी पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है।

एनटीपीसी और दिल्ली के पावर प्लांटों से मिलने वाली बिजली के अलावा, बीएसईएस ने हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, मेघालय और सिक्किम से भी लंबी अवधि के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट्स व पावर बैंकिंग अरेंजमेंट्स किए हैं। पावर बैंकिंग के माध्यम से बीएसईएस को 865 मेगावाट बिजली मिलेगी। इसी साल अप्रैल से 100 मेगावाट विंड पावर भी मिलनी शुरू हो जाएगी। 

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