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trade union will hit the streets on july 3 for anti labor policies albsnt

ट्रेड यूनियन श्रमिक विरोधी नीतियों को लेकर 3 जुलाई को उतरेगी सड़कों पर

  • Updated on 6/6/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। केंद्र सरकार (Central Government) के श्रमिक विरोधी नीतियों के खिलाफ ट्रेड यूनियनों ने धमकी दी है कि वे लोग प्रदर्शन करेंगे। इस बाबत  दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने एक साथ स्वर में स्वर मिलाते हुए घोषणा की है कि 3 जुलाई को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। जिसके लिये सभी संगठनों से मजदूर वर्ग और ट्रेड यूनियनों को समर्थन देने की अपील की गई है। हालांकि इससे पहले भी सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियन यानी CITU ने यूपी, एमपी और गुजरात सरकार द्वारा श्रम कानून में किए गए बदलाव पर चिंता जाहिर की थी।

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देश के दस प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने मिलाया हाथ

बता दें कि इस भारतीय राष्ट्रीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस और भारतीय व्यापार संघ सहित 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने सरकार के हाल के फैसले कापुरजोर विरोध किया है। इस विरोध प्रदर्शन में इंडियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस, ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस, हिंद मजदूर सभा, सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन, ऑल इंडिया यूनाइटेड ट्रेड यूनियन सेंटर, ट्रेड यूनियन को-ऑर्डिनेशन सेंटर, ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस, सेल्फ-एम्प्लॉइड वुमेंस एसोसिएशन, लेबर प्रोग्रेसिव फेडरेशन और यूनाइटेड ट्रेड यूनियन ने हिस्सा लेने का फैसला किया है।

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CITU ने पहले भी की थी आवाज बुलंद

दूसरी तरफ इससे पहले CITU ने अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) को एक पत्र लिखकर यूपी, एमपी और गुजरात सरकार द्वारा श्रम कानून में किए गए बदलाव को देखते हुए हस्तक्षेप की मांग की थी। जिसके बाद ILO ने पीएम नरेंद्र मोदी को खत लिखकर अपनी नाराजगी भी व्यक्त की थी। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के महानिदेशक गाय राइडर ने मोदी सरकार को हर हाल में श्रमिकों के अधिकारों को सुनिश्चित करने को कहा था। उन्होंने पीएम मोदी को याद दिलाया कि श्रम कानून द्वारा निर्धारित मानकों का पालन होना चाहिये। बता दें कि सेंटर फॉर इंडियन ट्रेड यूनियन यानी CITU भारतीय मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी से संबंद्ध रखता है।

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