Monday, Jun 27, 2022
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मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ श्रमिक संगठनों की हड़ताल, बैंकों और खनन क्षेत्र पर असर

  • Updated on 3/28/2022

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। कर्मचारियों, किसानों और आम लोगों पर प्रतिकूल असर डालने वाली सरकार की कथित गलत नीतियों के विरोध में श्रमिक संगठनों की दो दिन की देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन सोमवार को बैंकिंग कामकाज, परिवहन और खनन एवं उत्पादन पर असर देखा गया। देश के प्रमुख श्रमिक संगठनों के संयुक्त मोर्चा की तरफ हड़ताल का आह्वान किया गया है। हड़ताल के पहले दिन पश्चिम बंगाल और केरल में इसका खास असर देखा गया। हालांकि, जरूरी सेवाएं काफी हद तक अप्रभावित रहीं लेकिन बैंकिंग कामकाज पर कई हिस्सों में असर पड़ा और खनन गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। 

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बिजली एवं ईंधन आपूर्ति पर हड़ताल का कोई खास असर नहीं देखा गया लेकिन श्रमिक संगठनों ने दावा किया कि झारखंड, छत्तीसगढ़ एवं मध्य प्रदेश के कोयल खनन वाले इलाकों में कामगार इसका हिस्सा बने हैं। अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि हड़ताल को असम, हरियाणा, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, बिहार, पंजाब, राजस्थान, गोवा और ओडिशा के औद्योगिक क्षेत्रों से बढिय़ा समर्थन मिला है। 

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एटक के अलावा श्रमिक संगठन सीटू और इंटक समेत कुल 10 संगठन हाल में किए गए श्रम सुधारों और निजीकरण की कोशिशों का विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा मनरेगा के लिए बजट आवंटन बढ़ाने और संविदा पर काम करने वाले कर्मचारियों को नियमित करने की भी मांग है। पश्चिम बंगाल में हड़ताल में शामिल लोगों ने जगह-जगह प्रदर्शन करने के अलावा वाहनों एवं ट्रेनों के आवागमन को भी बाधित करने की कोशिश की। केरल में भी परिवहन निगम की बसों के अलावा ऑटोरिक्शा एवं निजी बसें नहीं चलीं लेकिन जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति, अस्पताल एवं एम्बुलेंस सेवाएं इससे अछूती रहीं। सार्वजनिक उपक्रमों सेल, आरआईएनएल और एनएमडीसी के भी हजारों कर्मचारी इस हड़ताल में शामिल हुए जिससे उनके कामकाज पर बुरा असर देखा गया। 

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इस हड़ताल ने बैंकों के कामकाज पर भी असर डाला। हालांकि, यह असर आंशिक रूप से ही देखा गया क्योंकि तमाम कर्मचारी काम पर नहीं पहुंचे। बैंक कर्मचारी संगठनों का एक हिस्सा ही इस हड़ताल का समर्थन कर रहा है। निजी क्षेत्र के बैंकों का कामकाज इससे लगभग बेअसर रहा। अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सी एच वेंकटचलम ने कहा कि इस हड़ताल का असर पूर्वी भारत में ज्यादा देखा गया और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तमाम शाखाएं बंद रहीं। अन्य क्षेत्रों में भी बैंक शाखाओं में कर्मचारियों के अनुपस्थित होने से कामकाज पर असर पड़ा। भारतीय बैंक कर्मचारी महासंघ (बीईएफआई) और अखिल भारतीय बैंक अधिकारी संघ (एआईबीओआई) भी इस हड़ताल को अपना समर्थन दे रहे हैं। बैंक संगठन दो सार्वजनिक बैंकों के निजीकरण की सरकारी योजना का विरोध कर रहे हैं। इसके अलावा वे जमा पर ब्याज दर बढ़ाने और सेवा शुल्कों में कटौती की भी मांग कर रहे हैं। 

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कोयला क्षेत्र में कार्यरत कर्मचारियों का एक बड़ा तबका भी इस हड़ताल में शामिल है। इससे कोयला खदानों में कोयला उत्पादन और आपूर्ति पर असर पडऩे की आशंका है। हिंद खदान मजदूर महासंघ ने कहा कि कोयला क्षेत्र, खासकर कोल इंडिया लिमिटेड (सीआईएल) के वजूद को खत्म करने वाली सरकार की नीतियों के विरोध में कर्मचारी खुलकर खड़े हुए हैं। महासंघ के अध्यक्ष नाथूलाल पांडेय ने कहा कि कोयला क्षेत्र के कर्मचारी देशभर में इस हड़ताल का हिस्सा बने हैं। उन्होंने कहा कि वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, भारत कोकिंग लिमिटेड और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड के तमाम कर्मचारी संगठन इस हड़ताल में खुलकर भाग ले रहे हैं।  

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