Saturday, Apr 17, 2021
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train did not stop even during the war indian railways stalled in 167 years prshnt

सफरनामा 2020: युद्धकाल में भी नहीं रूकी थी भारतीय ट्रेन लेकिन इस साल हो गई थी बिल्कुल ठप

  • Updated on 12/28/2020

नई दिल्ली/ टीम डिजिटल। दुनिया भर में जारी कोरोना (Coronavirus) के कहर ने लोगों की जिंदगी में एक बड़ी बदलाव ला दिया। कोरोना के साथा- साथ इस समय काल में कई ऐसी घटनाएं हुई जिसने एक नया इतिहास रच दिया। भारत में वैश्विक महामारी से बचने के लिए 167 सालों के रेलवे (Railway) के इतिहास में पहली बार 22 मार्च 2020 से 31 मार्च तक चार हजार से अधिक रेल सेवाओं पर रोक लगाई गई। वहीं 24 मार्च के मध्य रात्री से 21 दिनों का लॉकडाउन लगने के साथ ही 14 अप्रैल तक रेल सेवाओं को बंद रखने का ऐलान किया गया। वहीं मालगाड़ियों पर कोई पाबंदी नहीं लगा। इतिहास में पहली बार करीब दो महीने तक रेलवे की सेवा पूरी तरह ठप रही।

इसके बाद स्थिति को देखते हुए 1 मई को श्रमिक स्पेशल ट्रेन की शुरुआत की गई। लॉकडाउन बाद रेलवे सेवा के ठप हो जाने के कारण लाखों प्रवासी मजदूर देश के अलग-अलग कोने में फंस गए थे। इसके बाद वे पैदल अपने घर की ओर निकल पड़े. ऐसे में 1 मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेन का संचालन शुरू किया गया।

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15 जोड़े स्पेशल ट्रेनों की शुरुआत
कोरोना संक्रमण के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए पीएम नरेंद्र मोदी ने 3 मई 2020 तक के लिए देशभर में लॉकडाउन को बढ़ाने का फैसला लिया और इस लॉकडाउन के मद्देनजर भारतीय रेलवे द्वारा सभी यात्री ट्रेन सेवाओं के रद्द करने का निर्देश जारी कर दिया गया था। भारतीय रेलवे द्वारा जारी निर्देश में प्रीमियम ट्रेनें, मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें, पैसेंजर ट्रेनें, उपनगरीय ट्रेनें, कोलकाता मेट्रो रेल, कोंकण रेलवे सहित सभी यात्री ट्रेन सेवाएं रद्द किया गया। लेकिन 2 मई से स्पेशल ट्रेनों की शुरुआत की गई जिसमें राजधानी दिल्ली से पहले 15 जोड़े स्पेशल ट्रेनों की शुरुआत की गई। अभी देश में कुल 1089 स्पेशल ट्रेनें सर्विस में है।

वहीं भारतीय रेलवे ने 11 अगस्त को सभी नियमित यात्री ट्रेन सेवाएं अगले नोटिस तक निलंबित कर दी थी। वहीं 230 विशेष ट्रेनें चलती रहेंगी।

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ऑनलाइन बुक की गई टिकटों को किया गया रद्द
वहीं भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम ने ऐलान किया कि लोगों से कहा है कि वे ट्रेनों की ऑनलाइन बुक की गई टिकटों को रद्द न करें, उन्हें खुद ही पूरा पैसा मिल जाएगा। भारतीय रेलवे ने कहा कि कोरोना वायरस से संक्रमण की वजह से सभी यात्री सेवाओं को निलंबित करने के लिये बाध्य होने के बावजूद वह देश में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित कर रहा है।

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रेलवे के 30 हजार कर्मचारी कोरोना की चपेट में
बता दें कि इन दिनों रेलवे ने कोरोना संकट में सरकार की भी बहुत मदद की। रेल डिब्बों को आइसोलेशन वार्ड में बदल दिया गया और हजारों वार्ड का इस्तेमाल भी किया जा रहा है। इस साल कोई बड़ा रेल हादसा तो नहीं हुआ है लेकिन उसके 30 हजार कर्मचारी कोरोना की चपेट में आए और 700 से ज्यादा फ्रंटलाइन वर्कर्स की मौत भी हुई। 

वहीं एक आरटीआई के माध्यम से पता चला है कि रेलवे ने कोरोना वायरस महामारी के कारण इस साल मार्च से 1.78 करोड़ से ज्यादा टिकट रद्द किए और 2727 करोड़ रुपये की रकम वापस की गयी।  सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले जवाब के मुताबिक इस दौरान रेलवे ने 1,78,70,644 टिकट रद्द किए। रेलवे ने 25 मार्च से ही अपनी यात्री ट्रेन सेवाएं स्थगित कर दी थी। 

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