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कश्मीर मध्यस्थता: सच्चाई जानते हुए भी सदन में हंगामा क्यों?

  • Updated on 7/24/2019

नई दिल्ली/ कामिनी बिष्ट। लोकतंत्र के मंदिर में बैठने वाले जनप्रतिनिधियों को भारत की विदेश नीति के विषय में सब कुछ मालूम है। उसके बाद भी अमेरिकी राष्ट्रपति (American President) डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के कश्मीर विवाद (Kashmir Dispute) को लेकर मध्यस्थता (Arbitration) वाले बयान पर मंगलवार से लेकर अब तक सदन में हंगामा हो रहा है। क्यों? क्या विपक्ष के पास सरकार को घेरने के लिए मुद्दे खत्म हो गए हैं? क्या इस देश में कोई और समस्या है ही नहीं? आखिर सिद्ध क्या करना चाहता है विपक्ष?  

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री (Pakistan PM) इमरान खान (Imran Khan) अमेरिका (America) के तीन दिवसीय दौरे पर गए। वहां उनसे मुलाकात के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ने कश्मीर विवाद पर बात करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने कश्मीर विवाद में उनसे मध्यस्थता का अनुरोध किया है। जैसे ही ये बयान आया विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने इसका खंडन किया और स्पष्टिकरण दिया। उसके बाद सदन में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी ट्रंप के इस बयान को खारिज कर दिया।

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अमेरिका के पूर्व राजदूत ने दिया था ये बयान

यहां तक कि भारत में रहे अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा ने कहा, 'राष्ट्रपति ने आज बहुत बड़ा नुकसान किया है। कश्मीर और अफगानिस्तान पर उनकी टिप्पणी समझ से परे है।' अमेरिका में पाकिस्तान के पूर्व राजदूत हुसैन हक्कानी के अनुसार, राष्ट्रपति को जल्द ही दक्षिण एशियाई मुद्दों की जटिलता समझ आएगी। इन सबके बावजूद विपक्ष की ये किस प्रकार की जिद है? क्यों किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति के इस बेबुनियाद बयान पर हमारे देश के प्रधानमंत्री सफाई पेश करें? क्यों सदन की कार्यवाही को चलने नहीं दिया जा रहा?

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विपक्ष को नहीं दिख रही देश की समस्याएं

दुर्भाग्य है भारतीय लोकतंत्र का कि यहां का विपक्ष केवल संख्या में ही नहीं अपने देश के गंभीर मुद्दों को पहचानने में भी असमर्थ हैं। देश में व्याप्त गरीबी, बेरोजगारी, जलसंकट, किसान की बदहाल हालत, आए दिन होती मॉब लिंचिंग ऐसे कई मुद्दे विपक्ष को क्यों दिखाई नहीं देते? कश्मीर पर अमेरिका तो क्या किसी भी देश की मध्यस्थता का सवाल ही नहीं उठता और इस बात से पूरा देश वाकिफ है। सिर्फ मोदी ही नहीं हमारे देश का कोई भी प्रधानमंत्री इस प्रकार का बचकाना बयान दे ही नहीं सकता, तो फिर विपक्ष के इस ड्रामे का क्या मतलब है?

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प्रियंका की कोशिशें हो सकती है नाकाम

विपक्ष के इस जानबूझकर किए जाने वाले सियासी ड्रामे से इस बात पर मुहर लगती है कि लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को मिलने वाले प्रचंड बहुमत के पीछे विपक्ष का ही हाथ है। देश की सबसे पुरानी राष्ट्रीय पार्टी के इस प्रकार से क्षत-विक्षत होने के पीछे कोई और नहीं खुद कांग्रेस है। इस बात का प्रमाण कांग्रेस ने ट्रंप के बयान को राजनीतिक मुद्दा बनाकर सदन की कार्यवाही में बाधा डालते हुए एक बार फिर दे दिया है। अगर कांग्रेस अब भी नहीं संभली तो प्रियंका गांधी जमीनी स्तर पर जो काम कर रही हैं वो सभी कोशिशें भी नाकाम हो जाएंगी। 

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