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चीन के संविधान में बदलाव कर भारत के लिए खतरा बन सकते हैं शी चिनपिंग, जानिए...

  • Updated on 2/26/2018

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। हाल ही में चीन के राष्ट्रपति जी शिपनिंग को चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी अनिश्चित काल के लिए राष्ट्रपति बनाने के प्रस्ताव को आगे लेकर आई है। बता दें कि अगर इसतरह का प्रस्ताव पारित होता है तो इसका असर ना केवल चीन के संविधान पर दिखेगा। साथ ही पड़ोसी मुल्कों से चीन के रिश्तों पर बड़ा असर देखा जाएगा। 

बन जाएंगे सबसे ताकतवर नेता

चीन में शी चिनपिंग के अनिश्चिकाल के लिए राष्ट्रपति बनने से कई तरह की अटलकें लगाई जा रही हैं। उनका ये कदम भारत के लिए मुश्किले खड़ी कर सकता है। चीन की सबसे बड़ी कम्यूनिस्ट पार्टी ने उन्हें सबसे पहले ही देश का सबसे बड़ा नेता मान लिया है। पिछले साल शी चिनपिंग को चीन के सबसे बड़े कम्यूनिस्ट नेता दिवंगत माओ त्सेतुंग के बाद पार्टी कांग्रेस के संविधान के आधार पर सबसे ताकतवर नेता मानते हुए अपने संविधान में शामिल किया है। उनकी विचारधारा को कांग्रेस के दौरान पार्टी के संविधान में शामिल किया गया था और सम्मेलन के दौरान उनका कोई उत्तराधिकारी नहीं चुना गया था।

अब अटकलें लगाई जा रही है कि 2023 के बाद तक राष्ट्रपति पद पर रहने के बाद भी शी का राष्ट्रपति पद पर बनाए रखा जा सके। उम्मीद ये लगाई जा रही है कि पार्टी के केंद्रीय समिति के वरिष्ठ नेता सोमवार को बीजिंग में एक बैठक करेंगे। साथ ही संसद में जाने से पहले यह अटकलें हैं कि यह प्रस्ताव 5 मार्च से शुरू हो रहे नेशनल पीपल्स कांग्रेस में भी रखा जाएगा।

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पुतिन जैसा चीन में होगी शी का कद

वैसे इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हैं लेकिन नेशनल पीपल्स कांग्रेस की मीटिंग पर इस पर चर्चा होगी, तभी साफ तौर पर कुछ कहा जा सकेगा। लेकिन चीन की कम्यूनिस्ट पार्टी के इस कदम से ये बात साफ होती है कि शी जिनपिंग अपने दोस्त व्लादिमीर पुतिन की तरह शासन करने का मन बना चुके हैं। इसके लिए तैयारियां भी की जा रही है। बता दें कि पुतिन रुस में अपने 18 वर्ष का कार्यकाल पूरा चुके हैं और अगले की तैयारी में हैं।

भारत के लिए नहीं हैं अच्छे संकेत

वहीं चीन के इस फैसले को भारत से भी जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसा माना जा रहा है कि अगर शी चीन में 2023 के बाद भी राष्ट्रपति बनते हैं तो ये भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है। 

ऐसा इसलिए क्योंकि शी के चीन में कार्यभार संभालने के बाद से ही चीन की भारत में घुसपैठ बढ़ी थीष तो ऐसा माना जा रहा है कि निरंकुश रुप से चीन में अधिकार होने के बाद भारत से संबंधों के लेकर चीन कोई बदलाव करेंगा या स्थितियां कुछ और होगी?

शी के लिए रास्ता बहुत आसान

वैसे शी चिनपिंग के लिए ये रास्ता उतना मुश्किल नहीं है क्योंकि संविधान में अगर कोई फेरबदल होता है तो उसे चीन की संसद यानि नेशनल पीपल्स कांग्रेस से स्वीकृति मिलनी जरूरी है और समीति में 3000 लोग हैं जो संविधान को बदलने और कानून बनाने की पावर होती है। इन सभी 3000 लोगों में से 70 प्रतिशत मेंबर शी की पार्टी कम्यूनिस्ट पार्टी के हैं। ज्यादातर लोगों का कहना है कि शी चिनफिंग के लिए इससे कोई परेशानी नहीं होगी।

क्या चीन का ये कदम, 'तानाशाही' की तरफ?

अगल ये प्रस्ताव पारित होता है तो शी जिनपिंग एक हद तक चीन में निरकुंश और निर्विवाद रुप से चीन के नेता हो जाएंगे। वैसे इसे ऐसे भी देखा जा सकता है कि चीन का ये कदम शी जिनपिंग को निरंकुश तानाशाही की तरफ पहले पायदान की तरफ चढ़ा देगा। ऐसा सिर्फ चीन में नहीं होने जा रहा। इससे पहले भी कई देशों में नेताओं को इस तरह से ताकत सौंपी गई। जो बाद में गलत दिशा में ले गई। 

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