Wednesday, Oct 05, 2022
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कश्मीर को लेकर तुर्की ने पाकिस्तान के साथ मिलकर रचाई खतरनाक साजिश, ऐसे हुआ खुलासा....

  • Updated on 12/4/2020

नई दिल्ली/टीम डिजिटल। जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद पाकिस्तान (Pakistan) ने अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इसमें पाकिस्तान का साथ तुर्की (Turkey) ने भी दिया। लेकिन अब खबर मिल रही है कि तुर्की कश्मीर को लेकर पाकिस्तान के साथ मिलकर नई साजिश रच रहा है। 

मीडिया से सामने आई एक रिपोर्ट् के अनुसार तुर्की जल्द ही ईस्ट सीरिया के अपने लड़ाकों को कश्मीर भेजने की तैयारी कर रहा है। इस रिपोर्ट को लिखने वाले ग्रीस के एक पत्रकार एंड्रीस माउंटजोरिलियास ने रिपोर्ट में बताया है कि तुर्की की इस बड़ी साजिश का खुलासा हुआ है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दवान इस्लामिक दुनिया में सऊदी के प्रभुत्व को चुनौती देना चाहते हैं और वो खुद इसका नेतृत्व में आना चाहते हैं। राष्ट्रपति रेचेप का कश्मीर में लड़ाकों को भेजना भी उनकी इसी रणनीति का एक हिस्सा है।

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गौरतलब है कि तुर्की काफी लंबे समय से पूर्वी भूमध्यसागर में ग्रीस-मिस्त्र-साइप्रस के खिलाफ अपना सैन्य गठजोड़ खड़ा करता रहा है। अपने इस अभियान में तुर्की भूमध्यसागर में पाकिस्तान की भी स्थायी मौजूदगी स्थापित करने में लगा हुआ है। इस अभियान की पूर्ति के लिए पाकिस्तानी रक्षा मंत्रालय के एयरक्राफ्ट और सेना की मौजूदगी को सुनिश्चित किया जा रहा है।

वहीँ, रिपोर्ट में बताया गया है कि तुर्की ने काराबाख संघर्ष के बाद सीरिया में अपने लड़ाकों को भारत के खिलाफ लड़ने के लिए कश्मीर भेजने की तैयारी शुरू कर दी है। स्थानीय की माने तो इस रिपोर्ट में बताया गया है कि तुर्की कश्मीर को मजबूत होते देखना चाहता है।

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वहीँ, सीरियाई राष्ट्रीय सेना में शामिल हुए गैंग सुलेमान शाह के प्रमुख अबू एस्मा ने कहा है कि तुर्की अधिकारी बाकी गैंग के कमांडरों से भी बातचीत करना चाहता है और उन लड़ाकों की लिस्ट बना रहा है जो कश्मीर जाना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जो भी कश्मीर अभियान में शामिल होंगे, उन्हें 2000 डॉलर की धनराशि दी जाएगी।

दरअसल, अबू एस्मा के लड़ाकों के लिए कश्मीर में अभियान को पूरा करने में आसानी रहेगी क्योंकि कश्मीर भी वैसा ही पहाड़ी इलाका है, जैसा काराबाख। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, तुर्की एजाज, गेराब्लस, बैप, अफरीन और इदलिब में कश्मीर भेजे जाने वाले लड़ाकों को चुनने की प्रक्रिया को अंजाम देने वाला है और इसे गुप्त रखा जाएगा।

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बताते चले कि जम्मू-कश्मीर के मद्दे पर पाकिस्तान को तुर्की से काफी बड़ा और मजबूत समर्थन मिला था और अभी भी मिल रहा है। जबकि पाकिस्तान चाहता था कि उसे सऊदी अरब और यूएई का समर्थन मिले लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। तुर्की पाकिस्तान के साथ है इसका सबूत यह है कि 14 फरवरी 2020 को तुर्की राष्ट्रपति ने अपने भाषण में कहा था कि कश्मीर हमारे लिए उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना पाकिस्तान के लिए है।

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