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इन दो महिला वैज्ञानिकों के अथक परिश्रम से सफल हो पाया मिशन चंद्रयान-2, जानिए विस्तार से

  • Updated on 8/13/2019

नई दिल्ली/अदिती सिंह। यह पहली बार नहीं है जब इसरो में महिलाओं ने किसी बड़े अभियान में मुख्य भूमिका निभाई हो। चंद्रयान-2 को आकार देने में इसरो की दो महिला वैज्ञानिकों के रूप में नारी शक्ति का एक नया रूप देखने को मिला। ऋतु करिधाल और एम वनिता के लिए आज का दिन खास था। इससे पहले मंगल मिशन में भी आठ महिलाओं की बड़ी भूमिका रही थी। 

इसरो के अध्यक्ष ने की तारीफ 
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के अध्यक्ष के. सिवन ने प्रक्षेपण से पहले जारी एक संदेश में कहा, ‘हमने हमेशा ही यह सुनिश्चित किया कि महिला वैज्ञानिक पुरुष वैज्ञानिकों के बराबर रहें।.हमने पाया कि ये महिला वैज्ञानिक यह कार्य करने में सक्षम हैं और इसीलिए हमने उन्हें यह जिम्मेदारी दी।’

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वीडियो के जरिए दिया संदेश 
एक अधिकारी ने बताया कि ये महिला इंजीनियर उम्र के 40वें दशक में हैं और इसरो के साथ उनकी सेवा दो दशक से अधिक की है। ये दोनों महिलाएं बेंगलुरु स्थित यूआर राव अंतरिक्ष केंद्र में तैनात हैं। ऋतु करिधाल 2013 में प्रक्षेपित मंगल ऑॢबटर मिशन की उप अभियान निदेशक थीं और उनमें विज्ञान के लिए जुनून है। उन्होंने इसरो द्वारा साझा किए गए एक वीडियो संदेश में कहा, ‘मैंने महसूस किया कि विज्ञान मेरे लिए कोई विषय नहीं बल्कि एक जुनून है। 

भारत के दूसरे चंद्रमिशन चंद्रयान-2 को 22 जुलाई को 2 बजकर 43 मिनट पर आंध्रप्रदेश (Andra Pradesh) के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया। इसके 7 सितंबर को चंद्रमा पर पहुंचने की उम्मीद है। इस मिशन के लिए जीएसएलवी-एमके3 एम1 प्रक्षेपण यान का इस्तेमाल किया गया है।

पहले टला था लॉन्च
दरअसल 21 जुलाई को यह लांच होने वाला थ पर लांच से ठिक 56.24 मिनट पहले कुछ तकनीकी खराबी होने को कारण चंद्र-यान-2 का काउंटडाउन रोक दिया गया था। पर इस खराबी को ISRO ने सात दिनो के अंदर दूर कर भारत को दुनिया में एक नई उपलब्धि दिलाई।

 
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महिला वैज्ञानिक पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला बनी वनिता
प्रक्षेपण यान के हार्डवेयर के विकास की देखरेख करने वाली वनिता एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी आफ इंडिया द्वारा स्थापित सर्वश्रेष्ठ महिला वैज्ञानिक पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिला हैं। इसरो की 2018-2019 की वाॢषक रिपोर्ट के अनुसार इसमें 2069 महिलाएं विज्ञान संबंधी और तकनीकी श्रेणियों में कार्यरत हैं जबकि प्रशासनिक क्षेत्र में 3285 महिलाएं हैं।

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क्यों खास था यह अभियान
यह अभियान इसलिए भी खास है क्योंकि यह पहला ऐसा अंतरग्रहीय मिशन होगा जिसकी कमान दो महिलाओं के हाथ में होगी। रितू करिधल चंद्रयान-2 (chandrayan 2) की मिशन डायरेक्टर और एम. वनीता प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं। रितू करिधलको 'रॉकेट वुमन ऑफ इंडिया' (Rocket Woman Of India) भी कहा जाता है। वह मार्स ऑर्बिटर मिशन में डिप्टी ऑपरेशंस डायरेक्टर भी रह चुकी हैं। 

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2008 में चंद्रमा कक्षा में पहुचा था यान
2008 में भारत ने पहले चंद्रयान को चंद्रमा की कक्षा में भेजने में सफलता हासिल की थी, हालांकि ये यान चंद्रमा पर उतरा नहीं था। भारत 10 साल में दूसरी बार चांद पर जाने वाला अपना मिशन पूरा करने जा रहा है। 

अभियान के हैं तीन मॉड्यूल्स
चंद्रयान-2 को भारत में निर्मित जीएसएलवी मार्क III रॉकेट अंतरिक्ष में लेकर जाएगा। इस अभियान के तीन मॉड्यूल्स हैं - लैंडर, ऑर्बिटर और रोवर। 

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भविष्य की योजनाओं में मिशन वीनस 
भविष्य की योजनाओं पर इसरो चेयरमैन ने कहा की 'मिशन गगनयान दिसंबर 2021 तक पूरा होगा। इस मिशन का बजट 10,000 करोड़ है। इस मिशन में इसरो पहली बार भारत में बने रॉकेट को स्पेस में भेजेगा।  साथ ही बताया इसरो ग्लोबल वॉर्मिंग की चुनौती से निपटने के लिए भी खास मिशन पर काम कर रहा है। 

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